भारत-म्यांमार सीमा पर इमरजेंसी जैसे हालात, ख़ुफ़िया एजेंसियों के हाथ लगी यह ‘बड़ी सूचना’

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भारत-म्यांमार सीमा पर इमरजेंसी जैसे हालात, ख़ुफ़िया एजेंसियों के हाथ लगी यह ‘बड़ी सूचना’

नई दिल्‍ली : उग्रवादी गुट अराकान आर्मी के खिलाफ पिछले हफ्ते भारतीय सेना और म्यांमार सेना के साझा ऑपरेशन के बावजूद कालादान ट्रांजिट प्रोजेक्ट पर खतरा अभी टला नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अराकान आर्मी ने दावा किया है कि उसने म्यांमार सेना के खिलाफ जवाबी करवाई में 45 बर्मीज़ सैनिकों को मार दिया है. यही नहीं, कालादान ट्रांजिट प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ले जा रहे सामानों से भरी एक वेसल को भी हमले में अराकान आर्मी ने तबाह कर दिया है, जिससे प्रोजेक्ट के काम में काफी देरी हो रही है. भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार सेना पूरे रखाईन स्टेट में इमरजेंसी लगाना चाहती है, जिससे वो अराकान आर्मी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सके.

भारतीय रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, अराकान आर्मी को विदेश से मदद मिल रही है. उन्हें हथियार और उग्रवादी कैंप में हमले की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे अराकानआर्मी म्यांमार सेना को कड़ी टक्कर दे रही है. म्यांमार सेना को दो तरफ से चुनौती मिल रही है. एक आराकान रोहिंग्‍या सोलवेसन आर्मी (ARSA) और दूसरी तरफ अराकान आर्मी. ऐसे में स्थित काफी ख़राब दिख रही है.

सूत्रों के मुताबिक, म्यांमार के रखाईन स्टेट के मरुक यू और पलेत्वा में अराकान आर्मी ने म्यांमार सेना के 45 जवानों को मारने का दावा किया है और इस हमले में खुद म्यांमार सेना ने अपने 9 जवानों के मारे जाने की बात कबूल की है. उसके बाद म्यांमार सेना ने आरकान आर्मी के कई कैंप पर हवाई हमले किये थे. भारतीय सेना ने भी 17 फ़रवरी से लेकर 2 मार्च तक म्यांमार सेना के साथ मिलकर साझा ऑपरेशन किये थे, लेकिन इसके बावजूद अभी भी खतरा टला नहीं है.

भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना ने सीमा क्रॉस न करते हुए अपने ही इलाके में अराकानआर्मी के कैंप पर करवाई की थी जो कालादान प्रोजेक्ट के लिए खतरा बने हुए थे. साउथ मिजोरम के इलाके में किये गए ऑपरेशन को सेना ने बड़ी कामयाबी बताया था, लेकिन म्यांमार सेना को भारत से बड़े मदद की उम्मीद है और तभी जाकर कालादान प्रोजेक्ट की सुरक्षा पुख्ता की जा सकती है.

सुरक्षा से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, कालादान प्रोजेक्ट को आरकान आर्मी की तरफ से लगातार निशाना बनाये जाने की कोशिशें जारी है और भारत इस हालात पर चुप नहीं बैठ सकता, क्योंकि ये प्रोजेक्ट दोनों देशो के लिए बेहद जरुरी है. अराकानआर्मी ने पिछले महीने जिस वेसल को हमले में तबाह कर दिया था वो कालादान प्रोजेक्ट के लिए कंस्ट्रक्शन मैटेरियल ले जा रहा था, जिसमें 300 स्टील के फ्रेम थे, जिससे पेल्त्वा नदी पर इस्तेमाल होना था जो इस प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है.

2008 में कालादान प्रोजेक्ट पर भारत और म्यांमार के बीच सहमती बनी थी. इस प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने के बाद मिजोरम म्यांमार के रखाईन स्टेट के सिटवे पोर्ट से जुड़ जायेगा. इस प्रोजेक्ट के लिए भारत में ऐजवाल-साईंहा नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट पर कम किया जा रहा है.

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NEWS IN ENGLISH

The situation like Emergency on the Indo-Myanmar border, this “big information”

New Delhi: Despite the operation of the Indian Army and the Myanmar Army against the militant group Arakan Army last week, the threat to the Kalanan transit project has not yet stopped. According to the report, the Arakan Army has claimed that it has killed 45 Burmese soldiers in counteracting Myanmar army. Not only this, a Vesal filled with goods carrying the construction of Kalanan Transit Project has also been destroyed by the Arakan Army, which is delaying the work of the project. According to the report of Indian intelligence agencies, the Myanmar army wants to put an emergency in the whole state, so that he can take big action against the Arakan Army.

According to an official attached to the Indian Defense Ministry, the Arakan Army is getting help from abroad. They are being given training in the attack in the arms and militant camps, from which the Arakarnimi is giving a tough fight to the Myanmar army. The Myanmar army is getting a challenge from both sides. An Arakan Rohingya Solvensen Army (ARSA) and on the other hand Arakan Army In such a situation, it looks quite bad.

According to sources, the Marak Yu of Myanmar Yu and Pelaita in Myanmar’s Myanmar army claimed to have killed 45 soldiers of Myanmar army and the Myanmar army himself confessed to the death of 9 of its soldiers in this attack. After that Myanmar Army carried out air raids on many camps of the Arakan Army. The Indian Army also conducted joint operations with the Myanmar Army from February 17 to March 2, but despite this, the danger is still not over.

According to Indian Army sources, the Indian army did not cross the border crossing on the Arakkarni camp in their own area, which was a threat to the Kaladan project. The army had described the operation in the area of ​​South Mizoram as a big success, but the Myanmar army is expected to provide greater help from India and then the security of the Kalanan project can be strengthened.

According to an official attached to the security, efforts are being made to keep the Kalanan project continuously targeted by the Arakan Army and India can not remain silent on this situation, because these projects are very important for both the countries. The Varkal which had been destroyed in the attack last month, was taking construction materials for Kaladan project, which had 300 steel frames, to be used on the river Pelvav, which is connected to this project.

In 2008, the agreement was made between India and Myanmar on the Kalanan project. After the completion of this project, Mizoram will be connected to the Sittwe Port in the Rakhine State of Myanmar. The project is being reduced to Aijwal-Siahi National Highway Project in India.

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