बैंक होल्डिंग कंपनी बनाएगी सरकार

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 बैंक होल्डिंग कंपनी बनाएगी सरकार
पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी)-नीरव मोदी मामले में 11,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने के बाद सरकार बैंक होल्डिंग कंपनी बनाने की अपनी पुरानी योजना को अमलीजामा पहनाने पर विचार कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की सभी हिस्सेदारी इस कंपनी के तहत आएगी और उक्त कंपनी ही बैंकों के लिए पूंजी जुटाएगी। होल्डिंग कंपनी का विचार सबसे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015-16 के बजट में दिया था। इसी कवायद के तहत फरवरी 2016 में विनोद राय के नेतृत्व में बैंक बोर्ड ब्यूरो का गठन किया गया था।

ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों की संख्या राज्यसभा में अप्रैल में बढ़कर करीब 100 हो जाएगी लेकिन यह सदन के आधी संख्या बल 123 से कम ही होगी। हालांकि सरकार के नीति निर्माताओं को लगता है कि बैंक राष्ट्रीयकरण अधिनियम (बीएनए) में संशोधन को पारित करना संंभव होगा। बैंक होल्डिंग कंपनी बनाने के लिए ऐसे संशोधन को पारित कराना जरूरी होगा।

सरकार के एक अधिकारी ने कहा, ‘पिछले कुछ साल से होल्डिंग कंपनी गठित करने पर काम किया जा रहा है। हालांकि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं होने की वजह से कई अन्य महत्त्वपूर्ण विधेयकों और संशोधनों को पहले पारित करना जरूरी था। इनमें ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता, वस्तु एवं सेवा कर के लिए संविधान संशोधन, जीएसटी विधेयक आदि शामिल हैं।’

अधिकारी ने कहा, ‘अप्रैल के बाद सरकार के पास बीएनए संशोधन को पारित कराने के अच्छे मौके होंगे, जिससे वह होल्डिंग कंपनी बनाने में सक्षम होगी।’ हालांकि उक्त अधिकारी ने होल्डिंग कंपनी के ढांचे या कब तक उसका गठन किया जाएगा, इसके बारे में समयसीमा नहीं बताई। सरकार के अंदर माना जा रहा है कि इसे अर्ध-स्वायत्त होल्डिंग कंपनी के तौर पर बनाना चाहिए और परिचालन पेशेवर तरीके से हो। इस कंपनी में केंद्र सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी होगी। इस कंपनी में सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक बैंकों में सरकार की पूरी हिस्सेदारी होगी। सरकार के पास यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की 87 फीसदी, यूनियन बैंक की 55.5 फीसदी, भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नैशनल बैंक की 57 फीसदी तथा बैंक ऑफ बड़ौदा की 59 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा भी अन्य सरकारी बैंकों में सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है।

यह कंपनी जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी और प्रावधान एवं विकास की जरूरतों के हिसाब से पुनर्पूंजीकरण का प्रबंध करेगी। अगर अभी इस तरह की होल्डिंग कंपनी होती तो वह 1.35 अरब रुपये के पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड जारी कर सकती थी। उक्त अधिकारी ने कहा, ‘बैंक होल्डिंग कंपनी को निजी क्षेत्र सहित दक्ष बैंकरों द्वारा पेशेवर तरीके से चलाया जाना चाहिए तथा अफरशाही या राजनीतिक नेेतृत्व का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।’

पीएनबी मामले और रोटोमैक पेन्स का मामला सामने आने के बाद सावर्जनिक बैंकों के निजीकरण करने की मांग बढ़ रही और बैंकों के एकीकरण एवं निजीकरण की दिशा में तेजी से आगे नहीं बढ़ाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना भी हो रही है। जेटली ने पिछले हफ्ते एक कार्यक्रम में कहा था कि सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण चुनौतिपूर्ण निर्णय है और इसके लिए राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बनानी होगी। हालांकि होल्डिंग कंपनी बनाने से बैंकों का सीधा निजीकरण नहीं होगा लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इससे सरकार को अपनी आलोचना से बचने का मौका मिलेगा।

 

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NEWS IN ENGLISH

Government will set up bank holding company

After the fraud of Rs 11,400 crore in Punjab National Bank (PNB) -Nirov Modi case, the government is contemplating to implement its old plan to create a bank holding company. All stakeholders in public sector banks will come under this company and the said company will raise the capital for the banks. The idea of ​​holding company was first given by Finance Minister Arun Jaitley in the 2015-16 budget. Under this exercise, the Bank Board Bureau was formed in February 2016 under the leadership of Vinod Rai.

It appears that the number of members of the Bharatiya Janata Party and its allies will increase to about 100 in the Rajya Sabha in April, but it will be less than 123 in the half-house force of the House. Although government policy makers feel that it will be possible to pass amendments to the Bank Nationalization Act (BNA). To make such a bank holding company it would be necessary to pass such amendment.

A government official said, “The work is being done to set up a holding company for the last few years. However, due to lack of majority in government in the Rajya Sabha, it was necessary to pass several other important bills and amendments first. These include loan defaultability and bankruptcy code, constitution amendment for goods and services tax, GST bill etc.

The official said, “After April, the government will have good opportunities to pass the BNA amendment so that it will be able to make the holding company.” Although the said officer did not specify the time frame for the structure of the holding company or for how long it will be constituted. Inside the Government it is believed that it should be made as a semi-autonomous holding company and operational in a professional manner. The central government will have a majority stake in this company. The government will have the full share of the government in all listed public banks. Government has 87 percent of United Bank of India, 55.5 percent of Union Bank, 57 percent from State Bank of India and Punjab National Bank and 59 percent of Bank of Baroda. Apart from this, the government has a large share in other government banks.

This company will disinvest the stake of the public banks when needed, and will arrange recapitalization according to the provisions and requirements of the development. If this was a holding company, then it could issue recapitalization bonds of 1.35 billion rupees. The said officer said, ‘Bank holding company should be run professionally by skilled bankers including private sector and there should not be interference of bureaucratic or political leadership’.

The demand for privatization of public banks after the PNB case and the Rotopmak pens case emerged and the Narendra Modi government is being criticized for not increasing the pace of integration and privatization of banks. Jaitley had said in a program last week that privatization of public banks is a challenging decision and for this, there will be a broad consensus among political parties. Although creating a holding company, banks will not have a direct privatization, but officials believe that this will give the government a chance to avoid its criticism.

 

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