भू-अलंकरण दिवस के रूप में मनाया गया विश्व पृथ्वी दिवस

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भू-अलंकरण दिवस के रूप में मनाया गया विश्व पृथ्वी दिवस


सारनी, (ब्यूरो)। हमारी सनातनी संस्कृति और परंपरा में पृथ्वी को माँ कहा गया है। धरती माता भी जन्म देने वाली माँ के समान निस्वार्थ भाव से दुलारती है तथा पालन-पोषण करती है। धरती हमारी माता है और हम सब इसके पुत्र हैं। आज हमें अपने पूर्वजों के इस भाव को अपने जीवन में उतारने और इसे पुष्ट करने की आवश्यकता है। उक्त विचार सरस्वती विद्या मंदिर में संस्कार भारती द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जिला नगरपालिका एवं नगर पंचायत कर्मचारी संघ के महामंत्री हरिओम कुशवाहा ने व्यक्त किए। श्री कुशवाहा ने आगे कहा कि विश्व पृथ्वी दिवस को भू अलंकरण दिवस के रूप में मनाने का यही उद्देश्य है कि हम पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से मुक्त होकर पुत्रवत् अपनी धरती माता की रक्षा करें। धरती को प्रदूषण से बचाकर पेड़ -पौधे लगाकर तथा हरा-भरा बनाकर उसका श्रृंगार करें। इस अवसर पर विद्यालयीन छात्रों के लिए रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें भाग लेने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। अनुषा मौर्य, अनुष्का राय, साक्षी शिंदे, चंचल लोखण्डे, आमिर कुरैशी, हर्ष चौहान, सुखनंदन कुमरे आदि छात्रों ने भू अलंकरण के भाव को रंगोली के विभिन्न रंगों के माध्यम से उकेर कर व्यक्त किया। इससे पहले कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों द्वारा भारतमाता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। नगर में संस्कार भारती द्वारा इस प्रकार का अनूठा कार्यक्रम पहली बार किया गया। इस अवसर पर संस्कार भारती की ओर से इकाई के अध्यक्ष अंबादास सूने, महामंत्री दीपक वर्मा, प्राचार्य राजेंद्र तिवारी, श्रीमती रेणु त्रिपाठी, भारती तिवारी, सरीता, लता हारोडे, अनिता कोसे एवं नवीन चयनित आचार्य सहित विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।

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