उजड़ते शहर को बचाने व्यापारियों ने बंद रखे अपने प्रतिष्ठान, विधायक ने दिया बंद को समर्थन

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उजड़ते शहर को बचाने व्यापारियों ने बंद रखे अपने प्रतिष्ठान, विधायक ने दिया बंद को समर्थन

राजनीति से प्रेरित है, यह हड़ताल कांग्रेस ने लगाया आरोप


सारनी, (ब्यूरो)। उजड़ता उद्योग, घटता व्यापार पलायन करती जनता से परेशान व्यापारियों के द्वारा 20 सितंबर को नगर पालिका क्षेत्र के समस्त व्यापारियों ने बंद का आह्वान किया। जो कि बगडोना, शोभापुर, कालीमाई में शत-प्रतिशत एवं पाथाखेड़ा, सारनी में असर मिलाजुला रहा। विभिन्न व्यापारियों संगठनों से जुड़े व्यापारियों एवं पदाधिकारियों ने सारनी नगर पालिका गेट पर इकट्ठा होकर अपना विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी देते हुए काली में व्यापारी संघ के अध्यक्ष रमेश हारोडे ने बताया की शहर के विभिन्न व्यापारिक संगठनों द्वारा जनहित की मांगों को लेकर 20 सितंबर को बंद का आह्वान किया गया है, क्योंकि जनहित की मांगों को लेकर कई बार शासन प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से पत्राचार किया जा चुका है। किंतु उजड़ते शहर की चिंता को हवा में उडाते हुए किसी के भी द्वारा क्षेत्र के विकास एवं समृद्धि के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। इससे पहले भी 8 सितंबर को मांगो के संबध मे केन्द्र एवं राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सारनी एसडीओपी को दिया गया था परंतु आज तक कोई संतोषजनक जबाव नही मिला।

इस बंद में सुबह 11 बजे बगडोना नगरपालिका गेट पर व्यापारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जिसमें नई कोयला खदान, नया पाॅवर प्लांट, तहसील का पूर्ण दर्जा, औद्योगिक क्षेत्र का विकास, मूलभूत सुविधा उच्च शिक्षा, चिकित्सा को लेकर सभी ने विरोध दर्ज कराया। इस बंद में खास बात यह रही की शोभापुर, पाथाखेडा, बगडोना, सारनी के लगभग सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे सभी व्यापारियों ने व्यापारी संघ द्वारा बुलाए गए बंद का खुला समर्थन किया और बडी संख्या में व्यापारियों ने नगर पालिका गेट पर उपस्थित होकर अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया।

विधायक ने दिया बंद विरोध को समर्थन

व्यापारियों के समर्थन में आमला विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे भी बगडोना पहुंचे और उन्होंने इस बंद को समर्थन दिया। विधायक ने सभी व्यापारियों को आश्वस्त किया कि हर परिस्थितियों में क्षेत्र की जनता एवं क्षेत्र के व्यापारियों के साथ है और कहा कि अगर शासन द्वारा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो मैं आप सभी व्यापारियों के साथ चरणबद्ध आंदोलन में भाग लूंगा। वही विधायक ने बताया कि मेरे द्वारा क्षेत्र में लघु और कुटीर उद्योग लगाने के लिए मध्यप्रदेश शासन से लगातार पत्राचार किया है एवं केंद्रीय कोयला मंत्री से मिलकर नई खदानें खोलने का पत्र दिया है। गांधीग्राम खदान जल्द ही खुलने वाली है ग्राम समिति की सहमति ना होने के कारण एवं एक परिवार की आपत्ति के कारण ही गांधीग्राम का काम रुका हुआ है जल्द ही ग्राम समिति की सहमति लेकर गांधीग्राम खदान का काम चालू हो जाएगा और मेरे माध्यम से 17 सितंबर 2019 को ही मप्र के मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्या को लेकर आवेदन दिया गया है।

राजनीति से प्रेरित रही यह व्यापारियों की हड़ताल – कांग्रेस

इस हड़ताल में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भगवान जावरे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यह हड़ताल राजनीति से प्रेरित हड़ताल है। विगत कुछ वर्षो से उद्योग बचाओ नगर बचाओ संघर्ष समिति में सम्मिलित कांग्रेस पार्टी, शिवसेना, आम आदमी, सीपीआई ने संयुक्त रूप से लंबा आंदोलन भूख हड़ताल के साथ क्षेत्र में बंद होती हुई कोयला खदानें, विद्युत उद्योग, उजड़ते नगर, पलायन करते लोगो की समस्या को लेकर आंदोलन किया था। किंतु उस वक्त विरोध स्वरूप संयुक्त मोर्चा द्वारा दुकानदारों को प्रतिष्ठान बंद करवाया जा रहा था तो अधिकांश दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद नहीं किए और कहा कि हमें इन सब की दरकार नहीं है। इससे पहले भी कुछ वर्षों पूर्व मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पाथाखेड़ा सतपुड़ा टू खदान आकर कोयला आंदोलन का ढोंग रचा था, और तत्कालीन सांसद ज्योति धुर्वे क्षेत्र के समीप कोयला संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने भेंटकर नई खदान खोलने हेतु ज्ञापन दिया था किंतु सांसद ने इस पर अपनी कोई भी प्रतिक्रिया दर्ज नही कराते हुए कार्यवाही नहीं की। पिछले 25 से अधिक वर्षों से जिले में भाजपा के सांसद हैं, उन्होंने भी इतने वर्षों में अब तक क्षेत्र के लिए क्या किया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिजली उद्योग को 25 वर्षों के लिए निजी हाथों में दे दिया जिससे कि सरकारी संस्थाएं बंद होते गई और मजदूर कम होने लगे। जिसके बाद भी भाजपा कांग्रेस की सरकार को बदनाम करते हुए यह आंदोलन कर रही है।

सोशल मीडिया पर रही चर्चा भाजपा की प्रायोजित हड़ताल

इस हड़ताल से जुड़ा एक दिलचस्प बात यह रही कि सोशल मीडिया पर इस हड़ताल को लेकर काफी भड़ास निकाली गई और कई सोशल मीडिया यूजर ने इस हड़ताल का विरोध करते हुए कहा कि “मैं इस हड़ताल का समर्थन नहीं करता हूं क्योंकि यह हड़ताल एक भाजपा प्रायोजित हड़ताल है”। सोशल मीडिया पर सभी युवकों का कहना था कि इससे पहले एवं फिलहाल में भी जिले में भाजपा के सांसद रहे हैं और उन्हीं के कारण यह स्थिति पैदा हुई है तो फिर ऐसा ढोंग क्यों रचाया जा रहा है। वही ठीक ऐसी बातें हड़ताल स्थल बगडोना गेट पर भी सुनाई पड़ी, जहां कुछ व्यापारियों का कहना था कि 19 सितंबर को ही बैठक में यह बात सभी ने सर्व सहमति से कही थी कि इस हड़ताल में कोई भी राजनीति नही की जायेगी और इस एकदिवसीय हड़ताल में राजनीति से जुड़ा व्यक्ति नही मौजूद होगा। जिसके बाद भी राजनीति से जुड़े लोग हड़ताल का समर्थन करने पहुंच गए और वहीं अपनी बातें कहते रहे और हम व्यापारियों को तो कुछ कहने का मौका ही नहीं मिला ऐसी हड़ताल का क्या करना।

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