निर्भया केस के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज, फिर भी फांसी की सजा में इस वजह से हो सकती है देरी

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निर्भया केस के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज, फिर भी फांसी की सजा में इस वजह से हो सकती है देरी

नई दिल्ली। निर्भया केस के चार दोषियों में से एक मुकेश की दया याचिका को राष्ट्रपति ने आज खारिज कर दिया है। इसके साथ अब उसे फांसी होना तय हो गया है, हालांकि यह फांसी कब होगी इसे लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता। मुकेश ने भले ही सारे कानून हथकंडे अपना लिये हों और अब उसके पास कोई भी रास्ता नहीं हो, लेकिन उसके साथियों की वजह से उसकी फांसी की सजा में देरी हो सकती है। दरअसल निर्भया मामले के चारों दोषियों में अब तक सिर्फ मुकेश ही ने अपने सारे कानूनी दांवपेंच इस्तेमाल किए हैं। बाकी दोषियों के कुछ कानूनी रास्ते अब भी खुले हैं। ऐसे में दोषियों की फांसी की सजा में देरी हो सकती है।

निर्भया केस का आरोपी मुकेश ने ऐसे कानूनी दांवपेंच किए इस्तेमाल

निर्भया के चारों दोषियों में से मुकेश ने ही क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दोनों का इस्तेमाल कर लिया। जिसे कोर्ट और राष्ट्रपति की ओर से खारिज कर दिया गया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से 7 जनवरी को डेथ वारंट जारी होने के बाद सबसे पहले मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन लगाई। इसके बाद वह पटियाला हाउस कोर्ट से खारिज हुई याचिका को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। वहां से उसकी याचिका खारिज होने के बाद वह दोबारा पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचा था। यहां कोर्ट ने उसकी याचिका यह कहते हुए खारिज की हम अपने ही फैसले पर विचार नहीं कर सकते। आज पटियाला हाउस कोर्ट फांसी की नई तारीख पर विचार करेगा।

निर्भया केस का दूसरा आरोपी विनय की दया याचिका का रास्ता खुला

निर्भया केस का दूसरा आरोपी विनय शर्मा सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल कर चुका है जिसे शीर्ष कोर्ट द्वारा खारिज किया गया था। हालांकि उसके पास अब भी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाने का विकल्प खुला हुआ है। ऐेसे में फांसी की तारीख को आगे बढ़ाने के लिए वह इसका भी इस्तेमाल कर सकता है।

निर्भया के दोषी पवन, अक्षय नें नहीं लगाई है याचिका

निर्भया के दोषी पवन गुप्ता और अक्षयकुमार सिंह ने अब तक किसी भी कानूनी दांवपेंच का इस्तेमाल नहीं किया है। दोनों की ओर से ही अब तक न क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की गई और न ही अपनी सजा को लेकर राष्ट्रपति के सामने दया याचिका लगाई गई है। ऐसे में इन कानूनी प्रक्रियाओं से फांसी की तारीख आगे बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि किसी कैदी की दया याचिका खारिज कर दी जाती है तो उसे फांसी देने के पूर्व 14 दिन का समय दिया जाता है। ऐसे में इस वजह से भी फांसी की सजा में देरी हो सकती है।

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