सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा

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सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपा


सारनी, (ब्यूरो)। देश में सीएए लागू होने के बाद से कही सर्मथन में तो कही विरोध में प्रदर्शन कर रैली निकाली जा रही है। उसी क्रम में 27 जनवरी को बैतूल जिले के वेकोलि क्षेत्र पाथाखेडा में संविधान बचाओ देश बचाओ समिति के तत्वाधान में सारनी, पाथाखेड़ा, शोभापूर, बगडोना के आम नागरिकों पाथाखेड़ा बस स्टैंड के पर डॉ भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के पास सीएए, एनआरसी, एनपीआर के खिलाफ धरना प्रदर्शन आंदोलन किया। प्रदर्शन को शुरू संविधान बचाओ देश बचाओ समिति के द्वारा बस स्टैंड पाथाखेड़ा के समीप स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं शहीद सुनील नाइक की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित करके शुरू किया गया। जिसके बाद प्रातः 11 बजे से शाम 4 बजे तक धरना प्रदर्शन चला, जिसके पश्चात प्रदर्शन में मौजूद सभी लोगों के माध्यम से रैली निकालकर पाथाखेडा चौकी में पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम चौकी प्रभारी पाथाखेडा को ज्ञापन सौंपा गया।

जानकारी देते हुए ज्ञापन के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा मोदी एवं राकेश महाले ने बताया कि वर्तमान केंद्रीय सरकार द्वारा जिस प्रकार से भारतीय संविधान की मूल भावना प्रस्तावना एवं संविधान के अनुच्छेद 5, 14, 15 के विरुद्ध तथा नागरिकता अधिनियम 1956 के विरुद्ध जाकर नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 पारित कर उसे लागू किया गया है। उसे बहुसंख्यक भारतीयों की सविधान को बचाए रखने की पवित्र भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना विधि सम्मत होकर संविधान की मूल भावना वह आत्मा के अनरूप होगा।

उक्त भेदभाव पूर्ण अधिनियम में अफगानिस्तान, बांग्लादेश एवं पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन एवं पारसी अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता प्रदान किए जाने का प्रावधान किया है। जबकि उपरोक्त पड़ोसी देश के मुस्लिमों तथा आदिवासियों को जो कि ना तो हिंदू हैं और ना ही उन्हें देश का कानून हिन्दू मानता है भारत की नागरिकता प्राप्त करने से वंचित कर दिया गया है। उक्त विवादित अधिनियम में श्रीलंका, तिब्बत, नेपाल एवं वर्मा के भारत में रहने वाले प्रवासियों को भारत की नागरिकता देने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि जिस प्रकार से वर्तमान भाजपा की केंद्र में बैठी सरकार संपूर्ण भारतवर्ष में एनआरसी लागू करवाए जाने एवं एनआरसी करवाए जाने के पूर्व अप्रैल 2020 एनपीआर के तौर पर सर्वे कराए जाने की घोषणा देश की संसद सहित राजनीतिक मंचों पर लगातार कर रही है तथा जिसके संबंध में भारत सरकार का गृह मंत्रालय जनगणना सहित अन्य संबंधित विभाग पारदर्शिता को अपनाए बिना बड़ी गोपनीयता के साथ सक्रिय है। अभी तत्काल प्रभाव से रोका जाना जरूरी है क्योंकि एनआरसी के प्रथम चरण में माता-पिता की जन्म तिथि एवं के संबंध में तथा अन्य और कुछ गैर जरूरी जानकारी लिए जाने के संबंध में जो भी कुछ आपतिजनक प्रश्न पूछे जाने प्रस्तावित है उसका जवाब देश के करीब 80% लोग नहीं दे सकते हैं।

ऐसी स्थिति में विवादित पूछे जाने वाले प्रश्नों व जानकारी से संबंधित भारतीयों के पास कोई कागजात होने का कोई प्रश्न ही नहीं उत्पन्न होता। जिसके लिए हमारे संविधान बचाओ देश बचाओ समिति के तत्वाधान में कई आमनागरिको ने माननीय राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौपकर उनसे निवेदन किया कि वे उपरोक्त सारी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हए और संवैधानिक कानून तथा एवं एनपीआर को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की कृपा करें। वही ज्ञापन सौपते हुए सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे।

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