आतंकी मुठभेड़ में एक भारतीय जवान ने गजब का साहस दिखाया, सिर में गोली लगने के बाद भी शहीद रमेश रंजन ने एक आतंकी को मार गिराया

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आतंकी मुठभेड़ में एक भारतीय जवान ने गजब का साहस दिखाया, सिर में गोली लगने के बाद भी शहीद रमेश रंजन ने एक आतंकी को मार गिराया

जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर में बुधवार को हुई आतंकी मुठभेड़ में एक भारतीय जवान ने गजब का साहस दिखाया। यह कहानी है शहीद कांस्टेबल रमेश रंजन की जिन्होंने सिर में गोली लगने के बाद भी आतंकी को मार गिराया। जानकारी के मुताबिक, Srinagar में स्कूटी से उतरते ही आतंकी ने नाके पर तैनात जवान पर फायर कर दिया। गोली सीआरपीएफ की 73वीं वाहिनी के कांस्टेबल रमेश रंजन के सिर में लगी। गोली लगने के बाद भी रमेश ने खुद पर काबू रखा और तुरंत राइफल संभाली और जवाबी फायर किया। जमीन पर गिरते-गिरते वह एक आतंकी को ढेर कर चुके थे। उनकी फायरिंग की आवाज सुन बाकी जवान अलर्ट हो गए और दो आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। बाद में रमेश रंजन को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया।

शहीद रमेश रंजन को दोपहर बाद हुमहामा में आयोजित भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह में अंतिम विदाई दी गई। सीआरपीएफ के आईजी रविदीप साही समेत वरिष्ठ अधिकारियों और जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह और जवानों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ विमान के जरिए दिल्ली ले जाया गया। वहां से आगे बिहार के आरा जिले में उनके निवास पर ले जाया जाएगा और अंतिम संस्कार किया जाएगा।

आईजी रविदीप साही के अनुसार, शहीद कांस्टेबल रमेश रंजन ने अपनी जान की परवाह किए बगैर आतंकियों का मुकाबला किया। वह जख्मी होने के बावजूद लड़ा। उसकी बहादुरी और कुर्बानी हम सभी के लिए प्रेरणा है। शहीद रमेश रंजन का एक माह बाद 31वां जन्मदिन था। महानिदेशक सीआरीएफ एपी महेश्वरी ने शहीद रमेश रंजन की बहादुरी को सलाम करते हुए कहा कि देश की एकता व अखंडता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले मैं अपने एक भाई को सलाम करता हूं। इस संकट की घड़ी में हम शहीद के परिजनों के साथ खड़े हैं।

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