प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियां हर दिन ग्राहकों से ठग रही 8,280 रुपए, कैश एंड कैरी की जानकारी बॉक्स ग्राहकों को नहीं देते

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प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियां हर दिन ग्राहकों से ठग रही 8,280 रुपए, कैश एंड कैरी की जानकारी बॉक्स ग्राहकों को नहीं देते

भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियां हर दिन ग्राहकों से करीब 8,280 रुपए ले रही है और लोगों को इसकी भनक भी नहीं है। एक सप्ताह में यही आंकड़ा करीब दो लाख 48 हजार रुपए के आसपास होता है। इस तरह एक महीने में शहर की गैस एजेंसियां करीब ढाई लाख रुपए तक की अवैध कमाई कर रही है। वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वे सीएनसी (कैश एंड कैरी) स्कीम का फायदा लोगों को नहीं दे रहे हैं। राजधानी में करीब आठ लाख उपभोक्ता है। इसमें हर दिन करीब 10 हजार उपभोक्ता गैस सिलेंडर रिफिल करवाते हैं। इसमें से तीन फीसदी उपभोक्ता करीब 300 सीधे गैस गोदाम से सिलेंडर लेकर आते हैं। ऐसे में इन्हें कैश एंड कैरी रिबेट के तहत 27.60 रुपए की छूट मिलनी चाहिए। इसके बावजूद गैस एजेंसियां इस स्कीम का फायदा नहीं देती है। बता दें कि शहर में करीब 38 गैस एजेंसियों के 38 गोदाम शहर में संचालित हो रहे हैं। इनके एक-एक गैस गोदाम में करीब 20 से 30 लोग सिलेंडर उपभोक्ता अपनी जिम्मेदारी पर ले जाते हैं। इस हिसाब से भोपाल के 300 लोग हर दिन सिलेंडर घर लेकर जाते है। हालांकि इसमें शहर के कुछ ऐसे क्षेत्र है जहां होम डिलीवरी वाली गाड़ियां नहीं पहुंचती है।

कैश एंड कैरी की जानकारी बॉक्स ग्राहकों को नहीं देते हैं

सीएनसी (कैश एंड कैरी) रिबेट है। यह वैसे ग्राहकों के लिए है, जो गोदाम से अपने खर्च पर सिलेंडर ले जाते हैं। इसके लिए नियमों के अनुसार गैस एजेंसियों को बुकिंग पर्ची में ही रिबेट दिया जाता है। लोगों को ग्राहकों को इस नियम के बारे में जानकारी हो इसके लिए गैस गोदाम में स्पष्ट रूप से लिखा जाना चाहिए, लेकिन गैस एजेंसियां ऐसा नहीं करती है। लिहाजा ग्राहकों को इस छूट की जानकारी नहीं मिल पाती है और अपने खर्च पर सिलेंडर ले जाने पर मिलने वाली छूट का पैसा एजेंसी के मालिक अपनी जेब में डाल लेते हैं।

अधिकारी जांच के नाम पर कर रहे हैं खानापूर्ति

अधिकारियों के मुताबिक साल में दो बार गैस गोदामों की जांच की जाती है। इसमें एजेंसियों द्वारा सही तरीके से नियमों का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं यह देखा जाता है। तेल कंपनियों के अधिकारी जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। लिहाजा गैस एजेंसियों द्वारा यह लूट जारी है।

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