सन् 1942 के आंदोलन की यादगार एवं अन्य आंदोलन की यादगार में छुट्टी घोषित किया जाये – डॉ. मोदी

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सन् 1942 के आंदोलन की यादगार एवं अन्य आंदोलन की यादगार में छुट्टी घोषित किया जाये – डॉ. मोदी


सारनी। सन् 1942 के आंदोलन एवं अन्य आंदोलन की याद में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णा मोदी ने छुट्टी घोषित करने की मांग की।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. मोदी ने प्रेस नोट जारी करते हुए बताया कि हमारे देश वासियों ने 9 अगस्त 1942 को बम्बई में जबरदस्त अधिवेशन लेकर अंग्रेजों को अलमेटम दिया था कि आप अपने देश को चले जाये तथा हमें अपने देश को चलाने हेतु सक्षम है इस विषय पर सन् 1940 में विश्व युद्ध छेड़ा गया था हमारे देश के एकमात्र क्रांतिकारी नेता सुभाष चन्द्र बोस ने महात्मा गांधी को सलाह दी कि इस मौके पर अंग्रेजों को भगाने का नारा देकर आंदोलन करना चाहिए परन्तु उनकी बातों को नहीं माना गया जिसकी वजह से वे अपने देश से गायब होकर विदेशों में जाकर आजाद हिन्द फौज का निर्माण अंग्रेजों को भगाने का कार्य शुरू किया था।

उन्होने बताया कि सन् 1942 के जून जुलाई माह में देश की राजनीतिक पार्टी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी जिसमें सभी राजनीतिक पार्टीयां जैसे- समाजावादी पार्टी, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी, क्षेत्रीय पार्टी भी शामिल थी जिसमें यह निर्णय लिया कि अगस्त में भारत छोड़ो या करो मरो का नारा देकर आंदोलन की घोषणा 9 अगस्त 1942 को बम्बई में विशाल अधिवेशन कर घोषणा की जाय।

जब अंग्रेज सरकार को मालूम हुआ कि देश की जनता भगावत करने वाली है तो अंग्रेजों सरकार ने बड़े बड़े नेताओं को गिरफतार कर जेल में बंद करने का कार्यक्रम चलाया। इस कार्यक्रम के खिलाफ संपूर्ण देश की जनता आंदोलन में कूद पड़ी सन् 1942 के बाद क्रांतिकारी नेताओं ने भूमिगत होकर आंदोलन को संचालित किया जिसके डर से अंग्रेज सरकार घबरा गयी और उन्होंने गिरफतार किये गये लोगों को बिना शर्त छोड़ना शुरू किया और 1945 का आम चुनाव करने का निर्णय लिया।

आमचुनाव हुए भी उसमें भारतीय की सरकार बनी परन्तु 1942 की आग ठंडी भी नहीं हुई इसलिए फरवरी 1946 को अंग्रेजों के अंतर्गत जो भारतीय फौज थी उन्होंने करीब 4000 लोगों ने बगावत की जिसमें 400 सैनिक बलिदान हुए। सन् 1942 के आंदोलन एवं सन् 1946 के सैनिक विद्रोहने अंग्रेजो को मजबूर कर दिया कि वे देश की सत्ता चुने हुए सरकारको दे। परन्तु अंग्रेज सरकार चुने हुए लोगों में फुट डालकर साम्प्रादायिकता को बढ़ावा दिया

जिसकी वजह से हिन्दूस्तान का बटवारा हुआ। सन् 1942 की जनता का आंदोलन से ही अंग्रेजों को मजबूर होना पड़ा और भारतीयों को 15 अगस्त 1947 को सन् 1945 में चुने गये जनता के प्रतिनीधियों को सत्ता देकर जाना पड़ा।

आजादी सन् 1957 में हमारे देश के आदिवासी नेता बिरसा मुण्डा एवं अन्य नेताओं की कुर्बानी एवं अंत में सन् 1942 के आंदोलन में अंग्रेजो की गोलियों से शिकार हुए तथा सन् 1857 में अंग्रेजों के तख्ता पलट करने हेतु सैनिक विद्रोह स्व. क्रांतिकारी मंगल पाण्डे जी बलिदान होने एवं उसके बाद से 1946 तक भिन्न-2 आंदोलनों में शहीद हुए हमारे क्रांतिकारी साथी स्व. भगतसिंग जी, चन्द्रशेखर आजाद आदि की कुर्बानी की वजह से ही हमें 15 अगस्त को सत्ता मिली है इसलिए 9 अगस्त हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है जिसको हम भुलते जा रहे है उन तमाम शहीदों की यादगार में 9 अगस्त को सरकार ने छुट्टी देकर बलिदास दिवस के रूप में मनाना चाहिए।

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