आम आदमी पार्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर 20 विधायकों वाली याचिका ली वापस

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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर 20 विधायकों वाली याचिका ली वापस

नई दिल्ली। लाभ के पद मामले में चुनाव आयोग की सिफारिश के खिलाफ AAP के 20 विधायकों द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका को सोमवार को वापस ले लिया गया है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव आयोग की सिफारिश को अपनी मंजूरी दे चुके हैं, इसलिए अब इस याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाता है। इसके पहले जो मूल याचिका हाई कोर्ट में दायर की गई थी, उस पर सुनवाई जारी रहेगी। उसके लिए 20 मार्च की तारीख तय की गई है। वहीं, AAP ने तो सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर केजरीवाल को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती तो वह सुप्रीम कोर्ट जरूर जाएंगे। इससे पहले रविवार को AAP को बड़ा झटका लगा जब राष्ट्रपति ने 20 AAP विधायकों की सदस्यता रद करने के चुनाव आयोग के फैसले पर मुहर लगा दी। आधिकारिक प्रवक्ता ने रविवार को यह जानकारी दी। कानून मंत्रालय ने भी इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

आप को लगा बड़ा झटका-
ये सभी विधायक 13 मार्च, 2015 से 8 सितंबर, 2016 तक संसदीय सचिव पद पर थे, जिसे ‘लाभ का पद’ माना गया है। दिल्ली की सत्ता पर काबिज आप सरकार भले ही अभी गिरेगी नहीं, मगर उसके लिए यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका है। AAP ने पूरा दोष चुनाव आयोग पर मढ़ते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता आशुतोष ने इस फैसले को ‘असंवैधानिक तथा लोकतंत्र के लिए खतरा’ बताया। वहीं, आप के दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने कहा कि राष्ट्रपति से न्याय की उम्मीद थी।

राष्ट्रपति से नहीं हुई आप नेताओं की मुलाकात-
पार्टी ने उनसे मुलाकात का समय भी मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति के सामने हमें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दिया गया। वहीं भाजपा और कांग्रेस ने इस फैसले को सही ठहराया है। चुनाव आयोग ने जून 2016 में इन विधायकों के खिलाफ आई शिकायत को सही ठहराते हुए शुक्रवार को सदस्यता रद करने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी। AAP ने विधायकों के वेतन या सुविधा नहीं लेने का हवाला देते हुए लाभ का पद होने से इन्कार किया था। लेकिन, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जया बच्चन केस का हवाला देते हुए आप के तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि संसदीय सचिव के तौर पर विधायकों ने वेतन या सुविधाएं ली हैं या नहीं यह अप्रासंगिक है।

मंगलवार को होगी मामले की सुनवाई-
अहम बात यह है कि कोई पद लाभ के दायरे में आता है, तो फिर कानून के मुताबिक सदस्यता जाएगी। चुनाव आयोग द्वारा अपनी सिफारिशें राष्ट्रपति के पास भेजे जाने के तुरंत बाद शुक्रवार को ही इन विधायकों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मगर वहां से भी उन्हें फौरी राहत नहीं मिली। अब मंगलवार को मामले की सुनवाई होनी है। इससे पहले रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर काम में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा कि 20 विधायकों के खिलाफ झूठे मामले गढ़े गए। मेरे ऊपर भी रेड कराए गए, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि मिला तो सिर्फ चार मफलर। सबकुछ आजमाया और अंत में 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करा दिया। जब हमारे 67 विधायक जीते तो मुझे बड़ी हैरानी हुई, पूरी दुनिया यह भी जानती है कि ये 20 विधायक क्यों अयोग्य हुए। ऊपर वाले ने 67 सीट कुछ सोच कर ही दी थी।

जानें क्या है पूरा मामला –
तकरीबन दो साल पहले 13 मार्च, 2015 को दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी की सरकार ने एक आदेश पारित कर आपने 21 विधायकों को सचिव बनाया था। वकील प्रशांत पटेल ने इनकी अयोग्यता को लेकर राष्ट्रपति के पास चुनौती दी थी, दिल्ली सरकार ने इसे रोकने के लिए 2015 में असेंबली में एक विधेयक पारित किया। मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली (रिमूवल ऑफ डिसक्वालिफिकेशन) (अमेंडमेंट बिल) के नाम से इस बिल में तत्काल प्रभाव से लाभ के पद से संसदीय सचिवों को बाहर कर दिया गया। हालांकि राष्ट्रपति ने इस अमेंडमेंट बिल को रोक लिया और आगे की कार्रवाई के लिए मामले को चुनाव आयोग को सौंप दिया था। आखिरकार 21 जनवरी को इस पर राष्ट्रपति ने फैसला देते हुए आयोग के फैसले पर मुहर लगा दी।

 

NEWS IN English

Aam Aadmi Party withdraws petition with 20 MLAs filed in Delhi High Court

new Delhi. The petition filed in Delhi High Court has been withdrawn on Monday by 20 AAP MLAs against the recommendation of the Election Commission in the matter of profit. It is being told that the President has given his approval to the recommendation of the Election Commission, hence this petition no longer means any meaning. Earlier, the original petition was filed in the High Court, the hearing will continue. For that, the date of March 20 has been fixed. At the same time, the AAP has said to go to the Supreme Court. It is believed that if Kejriwal does not get relief from the Delhi High Court, then he will definitely go to the Supreme Court. Earlier on Sunday, AAP was shocked when the President stamped the Election Commission’s decision to cancel the membership of 20 AAP legislators. The official spokesman gave this information on Sunday. The Ministry of Law has also issued notification in this regard.

You felt a big blow-
All these MLAs were on March 13, 2015 to September 8, 2016 as the Parliamentary Secretary, who is considered to be ‘the post of profit’. You may not fall even though the government is in control of Delhi but it is the biggest political blow to it till now. The AAP termed the complete blunder on the Election Commission as a political conspiracy. Ashutosh, senior party leader, described this decision as “a threat to unconstitutional and democracy”. At the same time, your Delhi coordinator Gopal Rai said that the President was expecting justice.

President did not meet you leaders-
The party had also asked for the time to meet him, but we have not been given the opportunity to talk to the President in front of him. The BJP and Congress have justified this decision. Justifying the complaint filed against these MLAs in June 2016, the Election Commission had asked the President to cancel the membership on Friday. The AAP had refused to accept the salary or the facilities of the legislators, not having the post of profit. However, the EC has rejected your arguments while citing Jaya Bachchan case in the Supreme Court. The Commission said that as Parliamentary Secretary, the legislators have taken salaries or facilities, it is irrelevant.

The case will be heard on Tuesday-
The important thing is that any post comes under the scope of profit, then according to the law it will be subscribed. Immediately after the EC sent its recommendations to the President, these MLAs had approached the Delhi High Court on Friday. But there was no immediate relief from them. Now the case has to be heard on Tuesday. Earlier on Sunday, Delhi Chief Minister and its convener Arvind Kejriwal accused BJP of obstructing work. Kejriwal said that false cases were fabricated against 20 MLAs. They were also raided on me, but they could not find anything.
He said that only four mufflers were found. Tried everything and ultimately disqualified 20 legislators. When I won 67 of our MLAs, I was amazed, the whole world also knows why these 20 MLAs have become inept. The above person had given 67 seats to some thought.

Learn what is the whole case –
About two years ago on March 13, 2015, in Delhi, the ruling Aam Aadmi Party government passed an order and you made 21 legislators as secretaries. Advocate Prashant Patel had challenged the President about his ineptitude, the Delhi government passed a bill in 2015 to stop it. The parliamentary secretaries were expelled from the post of benefits with immediate effect in the name of the Member of Legislative Assembly (Removal of Disqualification) (Amendment Bill). Although the President stopped this amendment bill and handed the case to the Election Commission for further action. Eventually, on January 21, the President stipulated the decision of the Commission giving the decision.

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