बैतूल : मेडीकल कालेज संचालकों पर दर्ज धोखाधड़ी का मामला उच्च न्यायालय ने किया खारिज

Advertisements

NEWS IN HINDI

बैतूल : मेडीकल कालेज संचालकों पर दर्ज धोखाधड़ी का मामला उच्च न्यायालय ने किया खारिज

बीएएमएस के छात्र से ली गई 3 लाख 74 हजार की रकम वापस न करने पर बैतूल की कोर्ट ने किया था धोखाधड़ी का मामला दर्ज

बैतूल। जिले के जामठी में स्थित ओम आयुर्वेदिक मेडीकल कॉलेज के 4 संचालकों और प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में आरोप तय कर 31 अक्टूबर 2017 को प्रकरण दर्ज किया था। इस आदेश के खिलाफ संचालकों और प्रशासनिक अधिकारी के द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राहत देने की गुहार लगाई थी। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुशील कुमार पालो के न्यायालय ने इस मामले में 24 जनवरी 2018 को सुनवाई करते हुए प्रकरण को खारिज करने का फैसला सुनाया है। ओम आयुर्वेदिक कॉलेज के संचालकों और प्रशासनिक अधिकारियों के अधिवक्ता अंशुल गर्ग ने पत्रकार वार्ता में उच्च न्यायालय के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि शिकायत करने के पीछे केवल कॉलेज संचालकों और प्रशासनिक अधिकारी को प्रताड़ित करने की मंशा है। उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और विचारण के बाद धोखाधड़ी के प्रकरण को खारिज करते हुए कहा है कि शिकायतकर्ता सिविल न्यायालय में प्रकरण दायर करने के लिए स्वतंत्र है। उच्च न्यायालय में इस प्रकरण में ओम आयुर्वेदिक कॉलेज की ओर से अधिवक्ता अनिल खरे और अभिजीत अवस्थी ने पैरवी की।
उल्लेखनीय है कि बरकतउल्लाह विश्र्व विद्यालय से संबद्घ ओम आयुर्वेदिक कालेज जामठी, पो. भारत भारती बैतूल के छात्र सुनील तारण की याचिका पर कॉलेज संचालक डॉ.वीएस श्रीवास्तव, जी. राठी, एमपी.अग्रवाल, राहुल अग्रवाल समेत प्रशासनिक अधिकारी मदन दुबे के विरुद्घ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बैतूल कमलेश सनोडिया ने धारा 420, 406 एवं 418 के तहत प्रकरण दर्ज करने का फैसला 31 अक्टूबर को सुनाया था। दायर याचिका में उल्लेख किया गया था कि बीएएमएस के छात्र सुनील तारण ने वर्ष 2009-10 में मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने के लिए ढाई लाख रुपए दिए गए थे। 22 दिसंबर 2010 को बरकतउल्लाह विश्र्वविद्यालय ने कॉलेज की मान्यता समाप्त कर दी थी लेकिन वहां अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं से फीस की वसूली की जाती रही। कॉलेज में बीएएमएस के छात्र सुनील तारण से भी ट्यूशन फीस के नाम पर 14 फरवरी 2011 को 35 हजार रुपए लिए गए। जब उनके द्वारा राशि वापस मांगी गई तो उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा।

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
इस मामले की याचिका दायर करने वाले सुनील तारण ने बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले की जानकारी मिली है। विधि विशेषज्ञों से राय लेकर डबल बेंच में अपील करेंगे या फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। छात्रों के साथ की गई धोखाधड़ी के कारण वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और सभी को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे।

 

NEWS IN English

Betul: High court dismisses fraud case registered on medical college operators

Betul’s court had filed a case of fraud against the withdrawal of 3 lakh 74 thousand rupees from BAMS student

Betul The Judicial Magistrate First Division of Justice against the four directors and administrative officials of Om Ayurvedic Medical College, situated in Jamthi of the district, filed the case on 31 October 2017 by fixing charges in other sections including fraud. The petition was filed by the authorities and the administrative officer against the order and petitioned the High Court to give relief. The court of High Court Judge Sushil Kumar Palo has ruled in the case on January 24, 2018 for rejecting the case while rejecting the case. While giving information about the decision of the High Court in the press conference, Anshul Garg, advocate of the organizers and administrative officers of the Om Ayurvedic College, said that the court has clarified in its decision that intent to oppress only the college operators and the administrative officer behind the complaint is. The High Court hearing the case, hearing the arguments of both the sides and rejecting the case of fraud, has said that the complainant is free to file a case in the Civil Court. Advocate Anil Khare and Abhijit Awasthi on behalf of the Om Ayurvedic College in the High Court in this case lobbied.
It may be mentioned that Jhamthi, Om Ayurvedic College, associated with Barkatullah University, PO. On the petition of Bharat Betul student Sunil Taran, college director Dr. V.S. Srivastava, Regarding the administrative officer Madan Dubey, including Rathi, MP, Aggarwal, Rahul Agarwal, First Class Betul Kamlesh Sunodia, had pronounced the verdict on the case of section 420, 406 and 418 on October 31. It was mentioned in the petition that the BAMS student Sunil Taran had given 2.5 lakh rupees for admission in management quota in the year 2009-10. On December 22, 2010, Barkatullah University stopped the recognition of the college, but fees were collected from students studying there. In the name of tuition fees, 35 thousand rupees were taken on February 14, 2011, from the BAMS student Sunil Taran in the college. When the amount was asked back by them, they started being tortured.

The Supreme Court will knock on the door
Sunil Taran, who filed the petition, said that the information of the High Court has been informed. Law experts will take opinions from the bench or appeal to the Supreme Court. Due to fraud with students, they will continue their fight and try to get justice for all.

Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements

Related posts

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.