बैतूल : राजस्व विभाग की मिलीभगत से भूमाफिया नियमों को ताक पर रखकर कर रहे प्लाटों की बिक्री

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बैतूल : राजस्व विभाग की मिलीभगत से भूमाफिया नियमों को ताक पर रखकर कर रहे प्लाटों की बिक्री

हेमंत पवार
बैतूल। बैतूल शहर और शहर से सटी ग्राम पंचायतों में पिछले दो सालों से प्रशासनिक अमला और कॉलोनाइजरो के गठजोड़ से निकटवर्ती क्षेत्र में प्लाटिंग कर अवैध कालोनियों का निर्माण नियम कायदों को ताक पर रख हो रहा है। मानकों की अनदेखी कर हो रहे इस अवैध कारोबार से अतिक्रमण की समस्या और गहरी होती जा रही है। वहीं इस गोरखधंधे में शामिल सरकारी कर्मी और कॉलोनाइजर खेतो की जमीन पर प्लाटिंग कर मालामाल हो रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैतूल शहर में और आसपास के ग्रामीण क्षत्रो में 200 से ज्यादा कॉलोनियों का राजस्व रिकार्ड में दर्ज ही नही है। इस पूरे मामले में बड़ी बात ये है की सरकारी नियम कायदे ताक पर रख कर कृषि भूमि को बिना मद परिवर्तन किए प्लाट काटे गए है। इन कालोनियों में आम लोग कालोनाइजरों के प्रलोभन में आकर प्लाट तो खरीद लेते है। लेकिन जब वो अपना आशियाना बनाने के लिए बैंक से लोन लेने के लिए आवेदन करते है। तो बैंक द्वारा लोगो को लोन देने से मना कर दिया जाता है।

प्लाट नही आपने खरीद ली है मुसीबत
प्लाट खरीदने वालों ने प्लाट नही सीधे मुसीबत मोल ले ली है। क्योंकि कॉलोनाइजर के द्वारा ना तो डायवर्सन और ना ही टीएन्डसीपी का अप्रूवल लिया । यानी के यह कॉलोनियां सीधे-सीधे अवैध है। सबसे ज्यादा नुकसान यदि किसी का होगा तो वह है इन कॉलोनियों में प्लाट खरीदने वाले। कॉलोनाइजर प्लाट काटकर ऐसे रफू चक्कर होते जैसे गधे के सिर पर से सिंग। प्रशासन और कॉलोनाइजर की मिलीभगत का खामियाजा सीधे सीधे प्लाट खरीदने वालों को भुगतना पड़ता है।

इन इलाकों में हुई है सबसे ज्यादा प्लाटिंग
शहर के चक्कर रोड, मरामझिरी पंचायत, रानीपुर रोड, आमला रोड, बैतूल बाजार रोड, आठनेर रोड, चिचोली रोड और भारत भारती रोड पर सबसे ज्यादा प्लाटिंग हुई है । इन इलाकों में सबसे ज्यादा प्लाटिंग कॉलोनाइजरो के द्वारा प्रशासनिक अमले से साठ-गांठ कर की गई है। जिसमे सारे नियम कायदों को तक पर रख धड़ल्ले से काम चल रहा है । सबसे ज्यादा प्लाट काट कर बेचने का काम ग्राम पंचायतों में चल रहा है।

बही बनाने के नाम पर होगी मनमानी वसूली
प्रशासनिक अमला इतना चालक है कि अब प्लाट खरीद चुके लोगो को बही बनाने के लिए शासकीय कार्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे । बही बनाने के नाम पर मनमानी वसूली होगी। शहर में चर्चाओं का बाजार इतना गर्म है कि लोग आए दिन कहते नज़र आते है कि पिछले दिनों बही बनाने के नाम पर 10 हजार, 15 हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक लोगो को देने पड़े थे जिसके बाद ही उनकी बही बन सकी थी। वही इस मामले में बताया जा रहा है कि अवैध कालोनिया विकसित करने की बात जिला प्रशासन के संज्ञान में आई थी। तीन-चार लोगों को भी नोटिस दिए गए हैं।

क्या हैं मानक
1- बिना ले आउट पास कराये कालोनी नहीं बनाई जा सकती।
2- आवास विकास की एनओसी भी होनी चाहिए।
3- नियत प्राधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट कालोनी निर्माण की अनुमति देते हैं। नक्शा भी पास होता है।
4- नगर पालिका परिषद से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया जाता है। यदि कॉलोनी ग्रामीण क्षेत्र में बनाई जा रही है तो ग्राम पंचायत में विकास शुल्क के साथ जरूरी दस्तावेजो कि मूल प्रति के साथ उनकी फोटो कॉपी भी ग्राम पंचायत में देना पड़ता है ।
5- कालोनी में पार्क निर्माण, सड़कों की चौड़ाई आदि का भी मानक है ।
6- टीएन्डसीपी का अप्रूवल लेना होता है ।

 

NEWS IN English

Betul: Sales of plots done by keeping the land revenue rules in conformity with Revenue Department

 Hemant Pawar
Betul For the past two years in the village panchayats as per the Betul city and the city, the rules and regulations of creating illegal colonies are being plotted by placing in the adjoining area with the administration and alliance of the colonizers. The problem of encroachment is going deeper with this illegal business being neglected by the standards. At the same time, the government workers and colonizers, who are involved in this grenade, are being mauled by plating on the ground. According to information from sources, revenue of more than 200 colonies in the Betul city and adjoining rural areas is not recorded in the record. The big thing about this whole issue is that the plots have been cut off by keeping the government rules on the legal framework without making any changes in the agricultural land. In these colonies the common people come in the temptation of the colonizers and buy the plot. But when they apply for a loan from the bank to make their own ashes. So the bank is refused loan to the people.

No plot you have purchased trouble
Plot buyers have bought the plot directly without taking the trouble. Because neither the Diverans nor the TANDCP was approved by the colonizer. This means that these colonies are directly illegal. The biggest damage is if anybody is one who is buying the plot in these colonies. Cutting the colonizer plot would be such a dull round as the Singh from the head of an asshole. The collusion between the administration and the colonizer has to be borne by those directly buying the plot.

The most plating has happened in these areas.
The highest plating has been done on the Chakkar Road of the city, the Marjaziri Panchayat, Ranipur Road, Amla Road, Betul Bazar Road, Einthner Road, Chicholi Road and Bharat Bharti Road. The highest platings in these areas have been done by the Coloniser from the administrative system. In which all rules and regulations are being worked out from Dhadalay. Most of the plot plotting work is going on in the village panchayats.

The book will be named after arbitrary recovery
The administrative staff is such a driver that the people who bought the plots will have to cut the government office to make the book. There will be arbitrary recovery on the name of making book. The market of discussions in the city is so hot that people come to the point of saying that in the name of making books in the last days, people had to give 10 thousand 15 thousand to 25 thousand rupees, after which they could become their sister. In the same case, it is being said that the matter of developing illegal colonies came to the notice of the district administration. Three-four people have also been given notice.

 What are the standards
1- Colony can not be made without passing out without layouts.
2- NOC of housing development should also be there.
3- Due authority / City Magistrate allow colony building. The map is also nearby.
4- Nomination certificate is also taken from municipal council. If the colony is being created in the rural area then the village panchayat has to give the necessary documents along with the development fee along with the original copy of their photo copy in the village panchayat.
5- The park is also standard for park building, width of roads etc.
6- TANDCP is to be accepted.

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