बैतूल : भारत भारती में जलेगी परंपरागत गोबर के कंडों की होली,होलिका दहन की तैयारी में जुटे छात्र

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बैतूल : भारत भारती में जलेगी परंपरागत गोबर के कंडों की होली,होलिका दहन की तैयारी में जुटे छात्र

गजेन्द्र सोनी
बैतूल। होली का त्यौहार और रंग-गुलाब ना हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। इसके साथ ही कुछ हुर्रियारों की टोली द्वारा हुडदंग भी की जाती है तो कहीं वनों का विनाश कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचते हुए लकडी की होली जलाई जाती है, लेकिन इन सबसे इतर भारत भारती आवासीय विद्यालय में होली के त्यौहार पर परम्परागत रंग बिखेरने की जहां पूरी तैयारियां कर ली गई है वहीं पर्यावरण का संरक्षण करते हुए गोबर के कंडो की होलिका का दहन करने होलिका का निर्माण किया जा चुका है। कुल मिलाकर परम्परागत तरीके से पलास के फूलों के रंग बिखेरेंगे और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी जन-जन तक पहुंचेगा।

प्रकृति संरक्षण का दिया जाएगा संदेश
छात्रों में शिक्षा के साथ प्रकृति प्रेम और पर्यावरण की सीख देने वाले भारत भारती आवासीय विद्यालय में होली का पर्व प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए मनाई जायेगी। इसके लिए छात्रों ने गाय के गोबर के पाँच सौ कंडों से होलिका का निर्माण किया है। हरे पेड और लकडी का उपयोग करने के स्थान पर होली के डंडे में अरण्डी के पेड का उपयोग किया गया है।

भयंकर होता है प्रकृति को नुकसान
भारत भारती के सचिव मोहन नागर ने बताया कि होलिका दहन में लाखों हजारों टन लकडी हर वर्ष होली पर जल जाती है जिससे प्रकृति को भयंकर नुकसान पहुंचता है। अगर इसके स्थान पर गोबर के कंडों का प्रयोग करें तो गौ संरक्षण भी होगा और पेड भी कटने से बचेंगे, वहीं प्रकृति का संरक्षण भी होगा। आज पर्यावरण असंतुलन से अतिवृष्ठि, ओलावृष्ठि, अल्पवृष्ठि हो रही है

गाय ही बचा सकती है पर्यावरण को
श्री नागर ने बताया कि केवल गाय ही पर्यावरण को बचा सकती है। गोबर एक जैव पदार्थ है इसलिए इसके जलने से प्रदूषण कम होता है। जब कंडों की होली जलेगी तब वन संपदा सुरक्षित रहेगी। वायु प्रदूषण का स्तर रहेगा। कंडों की लौ ऊपर नहीं जाती इसलिए आग लगने का अंदेशा कम रहता है और वायु मंडल में सूक्ष्मजीव जलने से बच जाते हैं। कंडों की राख का फसलों पर जैव कीटनाशक और खाद के रूप में छिडकाव किया जा सकता है।

पलास के रंग से मनेगी होली
भारत भारती आवासीय परिसर के विद्यार्थियों द्वारा रंगों का पर्व होली मनाने के लिए प्राकृतिक रंग बनाने की तैयारी व्यापक स्तर पर की जा रही है। परिसर में पलाश के फू ल टेसू को उबालकर रंग बनाया जाएगा तथा होली के दिन उसी रंग का प्रयोग कर फ ाग के साथ होली मनाई जाएगी। होली का त्यौहार पर भारत भारती में परम्परा के साथ-साथ सद्भाव के रंग भी बिखेरे जाएंगे जिनका एक अलग ही आनंद होगा।

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NEWS IN ENGLISH

Betul: Students studying in the preparation of Holi, Holika combustion of traditional cow dung coats in Bharat Bharti

Gajendra Soni
Betul It is not possible to have Holi’s festival and colors and roses. Along with this, a few hurricanes are also organized by horddongs, wood burning is done by destroying forests and harming the environment, but in most of these Bharat Bharti Residential Schools, Holi celebrates traditional color While the preparations have been done, the Holika has been constructed to combine the hollow of cow dung coats while protecting the environment. Overall, traditional colors will spread the colors of flowers and message of nature conservation will also reach the people.

Message will be given to nature conservation
In the Bharat Bharati Residential School, which teaches nature and love of nature with education in the students, the festival of Holi will be celebrated with the message of nature conservation. For this, students have created Holika with five hundred cans of cow dung. Instead of using green pad and wood, pomegranate trees have been used in Holi sticks.

Fierce is the loss of nature
Mohan Nagar, Secretary, Bharat Bharti said that millions of tons of timber in Holika combustion burn on Holi every year, which causes severe damage to nature. If the use of cow dung beans in place of it, then there will be cow protection and also avoid cutting trees, nature will be preserved as well. Today, due to environmental imbalance, overgrowth, hailstorm, undercurrent

Cow can save only the environment
Shri Nagar said that only cow can save the environment. Dung is a biological substance, hence its burning causes less pollution. When the Holi of candles will burn, the forest property will be safe. The level of air pollution will remain. The flame does not move upwards, so the fear of fire is low and microorganisms in the atmosphere get saved from burning. Can be used as bio-pesticide and manure on cane ash crop.

Holi with color of palace
To celebrate the Holi festival of colors by the students of the Bharat Bharti Residential Complex, the preparation of natural colors is being done on a wider scale. In the premises, boiling fur tusu of Palash will be painted and Holi will be celebrated with the help of the same color on Holi. On the festival of Holi, along with tradition in Bharat Bharati, color of harmony will also be scattered which will be a different joy.

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