बैतूल: सफलता की कहानी-लोगों का ललचा रहा है एप्पल बेर का स्वाद

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बैतूल: सफलता की कहानी-लोगों का ललचा रहा है एप्पल बेर का स्वाद

बैतूल। आज कल बैतूल के प्रमुख फल विक्रेताओं के पास हरे सेब की तरह दिखने वाले फल बहुतायत में दिखाई दे रहे हैं। हम जब पास जाकर इन हरे सेब का दाम पूछने लगे तो विक्रेता के द्वारा यह बताए जाने पर कि यह सेब नहीं बल्कि बेर हैं, यह जानकर हमारी आंखों को विश्वास ही नहीं हुआ। विक्रेता के कहने पर जब फल को अपने हाथ में लेकर अच्छे से देखा एवं उसका स्वाद चखा, तब भी विश्वास नहीं हुआ कि हम बेर खा रहे हैं।

हम बात कर रहे हैं हरे सेब की तरह दिखने वाले एप्पल बेर की। एप्पल बेर, जैसा नाम-वैसा गुण। दिखने में बिल्कुल एप्पल की तरह, मगर स्वाद में एप्पल से भी बढक़र। जिले के बैतूल एवं घोड़ाडोंगरी विकासखण्ड में लगभग 6-7 हजार एप्पल बेर के पेड़ वर्तमान में फलन पर हैं, जिनके फल सिर्फ बैतूल के बाजारों में ही नहीं, बल्कि बैतूल के आसपास इटारसी, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, नागपुर, अमरावती आदि जिलों के बाजारों में भी धूम मचा रहे हैं।

एप्पल बेर की जैविक रूप से खेती करने वाले बैतूलबाजार निवासी किसान नवनीत पुत्र श्री श्यामकिशोर वर्मा की कहानी इस प्रकार है-
नवनीत कोई सामान्य किसान नहीं हैं, बल्कि तकनीकी रूप से जागरूक कृषि स्नातक किसान हैं, जिन्होंने आज से दस वर्ष पूर्व इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय से कृषि में स्नातक की डिग्री हासिल की है। नवनीत अपनी डिग्री के दौरान हासिल किताबी ज्ञान को किसी छोटी-मोटी नौकरी कर उपयोग करने की बजाय
वर्तमान में जमीनी स्तर पर प्रयोग कर अपनी परम्परागत खेती को नई तकनीक से जोडऩे में प्रयोग कर रहे हैं।

नवनीत के परिवार में कुल 15 एकड़ जमीन है, जिस पर पूर्व में उनके पिता श्री श्यामकिशोर वर्मा भी कृषि की नवीन तकनीक अपनाकर सोयाबीन, गन्ना, गेहूं आदि कृषि की फसलों एवं कुछ सब्जियों की खेती करते थे, जिससे होने वाली खेती में सामान्य आमदनी होती थी। चूंकि नवनीत स्वयं कृषि स्नातक है, एक दिन यूं ही बैठे-बैठे उद्यानिकी की खेती करने का जोखिम उठाने की बात उनके दिमाग में आई। जोखिम इसलिए क्योंकि शहर के पास जमीन होने के कारण उद्यानिकी की फसलें उगाने हेतु लगने वाले मजदूर आसानी से एवं उचित दाम में नहीं मिल पाते थे, परन्तु जब नवनीत ने कुछ नया करने का मन में ठान ही लिया था, तो सफलता कैसे हाथ नहीं लगती और यहीं से शुरुआत होती है नवनीत के जैविक एप्पल बेर की कहानी।

वर्ष 2015 में नवनीत ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में अपनी 1.5 एकड़ जमीन में महाराष्ट्र से मंगवाकर एप्पल बेर के लगभग 500 पेड़ लगाए। शुरु से ही एक जागरूक किसान की तरह नवनीत ने अपने बगीचे में किसी भी तरह के रसायन का प्रयोग न करते हुए पूर्ण रूप से स्वयं के द्वारा बनाए जा रहे जैविक खाद एवं जैविक दवाइयों का उपयोग किया। कई तरह के जैविक ट्रैप का प्रयोग भी अपने बगीचे में किया। साथ ही समय-समय पर अपने बेर के पेड़ों का उचित जैविक उपचार भी किया। नवनीत की मेहनत आज उनके जैविक एप्पल बेर के स्वाद में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

पहले दो सालों तक बेर के पेड़ों में दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ फीट की पट्टी छोडक़र नवनीत ने दो लाइनों के बीच में पहले साल फूलगोभी एवं दूसरे साल मटर की फसल ली, जिससे उन्हें लगभग एक लाख 20 हजार रूपए की अतिरिक्त आय भी हुई। तीसरे साल से बेर के पेड़ों में व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ हो गया। नवनीत के एक-एक जैविक एप्पल बेर का औसत वजन लगभग 100 से 165 ग्राम तक है। वर्तमान में नवनीत प्रतिदिन लगभग एक क्विंटल बेर की रोजाना तुड़ाई कर रहे हैं जो थोक में लगभग 35 रूपए एवं चिल्लर में 50 से 60 रूपए प्रति किलो की कीमत में आसानी से बिक रहे हैं। अभी तक लगभग चार क्विंटल जैविक एप्पल बेर की तुड़ाई की जा चुकी है। नवनीत का अनुमान है कि इस वर्ष कुल 80 से 100 क्विंटल जैविक एप्पल बेर की उपज उन्हें प्राप्त हो जाएगी।
नवनीत के जैविक एप्पल बेर के फलों का स्वाद चखकर एवं उनकी सफलता को देखकर बैतूल जिले के अन्य कई कृषक भी एप्पल बेर की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा नवनीत को उनके जैविक एप्पल बेर को सीधे ग्राहकों को बेचने में मदद की जा रही है, जिससे हो रहे लाभ से प्रोत्साहित होकर नवनीत आने वाले वर्ष में एप्पल बेर के रकबे में बढ़ोत्तरी करने की ओर अग्रसर हैं। एप्पल बेर के अलावा नवनीत आने वाले वर्षों में अन्य कई नई उद्यानिकी फसलें जैसे ड्रेगन फ्रुट, थाई अमरूद, लीची आदि की खेती करने में भी अपना हाथ आजमाना चाहते हैं।

NEWS IN ENGLISH

Betul: Success Story – People’s Taste Takes Apple Plum

Betul Today fruits are seen in the abundance of fruit appearing like green apples near Batul’s major fruit sellers. When we got close to asking for the price of these green apples, our eyes did not believe knowing that by the seller it was not apple but rather plum. When the seller said, after taking the fruit in his hand and tasted good taste, he did not believe that we are eating nuts.

We’re talking about apple berry that looks like green apple. Apple berry, like name-those qualities Just like Apple in appearance, but also the taste enhances from Apple. About 6-7 thousand apple berry trees are currently under operation in Betul and Ghoddongri development blocks of the district, whose fruits are not only in Betul markets, but also in the markets of districts of Itarsi, Hoshangabad, Chhindwara, Nagpur, Amravati etc. around Betul. They are also screaming.

Here is the story of Kishan Navneet son Shri Shyamkishor Verma, resident of Batulbazar, who is biologically cultivating Apple berry:
Navneet is not an ordinary farmer but a technically conscious agricultural graduate farmer, who has received a bachelor’s degree in agriculture from Indira Gandhi Agricultural University, ten years ago today. Navneet, instead of using a small job earned during her degree,
Currently experimenting at grass root level, using their traditional farming techniques to connect with new technology.

There is a total of 15 acres of land in Navneet’s family, on which his father Shri Shyamkishor Verma also used to adopt new techniques of farming, cultivating agricultural crops and some vegetables like soyabean, sugarcane, wheat etc, due to which there would be general income in agriculture was. Since Navneet is a self-agricultural graduate, one day he came to his mind to take the risk of cultivating sitting horticulture. Risk because of the land being occupied by the land due to the cultivation of horticultural crops, the laborers could not get easily and fairly, but when Navneet decided to do something new, then how does success seem to be? And this is where the story of Navneet’s biological Apple Plum begins.

Navneet in 2015, under the guidance of the Department of Horticulture, procured around 500 trees of apple berry by procuring Maharashtra from its 1.5 acres of land. As a conscious farmer from the beginning, Navneet used organic fertilizers and biological medicines made entirely of self by not using any kind of chemical in his or her garden. Many types of biological traps are also used in their garden. Also, from time to time, proper biological treatment of its plum trees was also done. Navneet’s hard work is clearly visible in the taste of his biological apple berry today.

For the first two years, excepting a half-and-a-half feet strip on both sides in the plum trees, Navneet took the first year cauliflower and the second year of pea crop in between two lines, thereby earning additional income of about one lakh 20 thousand rupees. In the third year, commercial production started in plum trees. The average weight of each apple biar apple of Navneet is around 100 to 165 grams. At present, Navneet is daily crushing about one quintal of berry daily, which is being sold in bulk at around 35 rupees and in Chillar at a price of 50-60 rupees per kg. So far nearly four quintals of organic apple plum have been tarnished. Navneet estimates that they will get the yield of 80 to 100 quintals of biological apple berry this year.
Seeing the taste of the biological Apple berry fruits of Navneet and seeing their success, many other farmers of Betul district are also attracted to the cultivation of apple berry. Navneet is being helped by the Department of Horticulture to sell its biological apple plum directly to the customers, encouraged by the benefits being generated, Navneet is looking forward to increasing the area of ​​Apple Plum in the coming year. In addition to apple berry, Navneet wants to try his hand in cultivating many other new horticultural crops such as dragon fruit, Thai guava, litchi etc. in the coming years.

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