भोपाल : नशामुक्ति पर जोर, लेकिन प्रदेश में शराब अहाते बंद करने के लिए सहमति नहीं

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भोपाल : नशामुक्ति पर जोर, लेकिन प्रदेश में शराब अहाते बंद करने के लिए सहमति नहीं

भोपाल। प्रदेश में शराब अहाते बंद होंगे या नहीं, यह बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में तय होगा। वाणिज्यिक कर विभाग बैठक में 2018-19 के लिए आबकारी नीति का मसौदा प्रस्तुत करेगा। बताया जा रहा है कि विभाग अहाते बंद करने पर सहमत नहीं है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि दुकानों के बाहर अफरा-तफरी मच जाएगी और कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

कुछ दुकानें बंद भी की जा सकती हैं। वहीं, नीति में इस बार जोर नशामुक्ति पर रहेगा। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के संचालक विजय सिंह वर्मा को तमाम विरोधों के बाद संविदा नियुक्ति देने पर फैसला हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में पूरक एजेंडे के तौर पर आबकारी नीति प्रस्तुत होगी। राजधानी में शक्तिकांड के बाद मुख्यमंत्री ने शराब अहाते बंद करने की घोषणा की थी। विभाग आबकारी नीति में इसे शामिल करने को लेकर सहमत नहीं है।

इसके पीछे तर्क यह है कि लगभग 20 साल पहले अहाते शुरू ही इसलिए किए गए थे कि दुकानों के पास अफरा-तफरी मचने लगी थी। झगड़े होने के कारण कानून व्यवस्था बिगड़ने लगी थी। इससे आबकारी आय में लगभग 22 फीसदी की वृद्धि भी हुई थी। यदि अहाते बंद किए जाते हैं तो लगभग 400 से 500 करोड़ रुपए राजस्व का नुकसान तो होगा ही कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका है। बताया जा रहा है कि नशामुक्ति को लेकर नीति में स्कूल, कॉलेज, धार्मिक स्थानों के आसपास शराब दुकानें नहीं रखने का निर्णय लिया है। इससे कुछ दुकानों को बंद भी किया जा सकता है।

इसके अलावा बैठक में करीब डेढ़ दर्जन अन्य मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। इसमें लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के संचालक विजय सिंह वर्मा की संविदा नियुक्ति का मुद्दा भी शामिल है। अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संगठन (अजाक्स) सिंह की संविदा नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिख चुका है। संगठन का कहना है कि इससे न सिर्फ मुख्य अभियंताओं का हक मारा जाएगा, बल्कि नीचे से आगे बढ़ने की प्रक्रिया भी बाधित होगी। वैसे भी पदोन्न्ति नहीं होने से इंजीनियरों का काफी नुकसान हो रहा है।

 

NEWS IN English

Bhopal: Emphasis on drug de-addiction, but no consensus is needed to stop drinking liquor in the state

Bhopal. Whether the liquor premises will be closed in the state or not, it will be decided in the meeting chaired by Chief Minister Shivraj Singh Chauhan on Wednesday. The Commercial Tax Department will present the draft Excise Policy for 2018-19. It is being told that the department does not agree to stop the Ajaht. The reason behind this is the fact that there will be confusion outside the shops and law and order can get worse.

Some shops can also be closed. At the same time, the emphasis in the policy will be on the addiction. Apart from this, a decision on giving contractual appointment to Vijay Singh Verma, operator of project implementation unit of Public Works Department, after all protests can be decided. According to sources, the excise policy will be presented as a supplementary agenda in the cabinet. Chief Minister had announced the closure of liquor premises after the capital was deployed. The Department does not agree to include it in the Excise Policy.

The reason behind this is that almost 20 years ago, Ahadas were started only because they started making fun of the shops. Due to the dispute, the law system started to worsen. This resulted in an increase of excise earnings by about 22 percent. If the hazards are closed, then there will be loss of revenue of about 400 to 500 crores, as the situation of law and order situation is worrisome. It is being told that in the policy about drug de-addiction, the decision has not been taken to maintain liquor shops in schools, colleges and religious places. Some stores can also be closed by this.

In addition, about one and a half dozen other issues will also be considered in the meeting. This includes the issue of contract appointment of Vijay Singh Verma, operator of Project Implementation Unit of Public Works Department. The letter has been written to the Chief Minister, Chief Secretary and Principal Secretary to the Department against the proposal of contractual appointment of the Scheduled Caste-STO employee organization (Ajax) Singh. The organization says that not only will the chief engineers be killed, but also the process of moving forward from below will be disrupted. Anyway, there is a huge loss of engineers due to lack of promotion.

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