भोपाल : चुनाव टाले, सहकारी बैंक प्रशासकों के हवाले

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भोपाल : चुनाव टाले, सहकारी बैंक प्रशासकों के हवाले

भोपाल। विधानसभा से पारित अधिनियम को ताक पर रखकर सहकारी बैंकों के चुनाव ही नहीं कराए जा रहे हैं। सहकारी कानून में सहकारी बैंक के संचालक मंडल का कार्यकाल खत्म होने के बाद चुनाव न होने की सूरत में सरकार छह-छह माह कर एक साल के लिए ही प्रशासक रख सकती है। इसके विपरीत 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में से 15 में प्रशासक पदस्थ हैं। इनमें ज्यादातर को चार साल हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि कहीं अंदरूनी राजनीति के चलते संचालकों ने इस्तीफा दे दिया है तो किसी बैंक ने तो चुनाव कराने का प्रस्ताव ही नहीं दिया। कमोबेश यही स्थिति सहकारी समितियों की भी है। चुनाव नहीं हो पाने की वजह से यहां भी प्रशासक तैनात करने पड़े हैं।

इसलिए नहीं हो पा रहे चुनाव
सूत्रों के मुताबिक छतरपुर बैंक के चुनाव हुए और संचालक मंडल चुन लिया गया। हालांकि अध्यक्ष को लेकर सहमति नहीं बनी और संचालकों ने इस्तीफा दे दिया। इसके चलते कोरम का अभाव हो गया और संचालक मंडल नहीं बन पाया। यही स्थिति गुना बैंक की भी है। देवास में मतदाता सूची की जांच चल रही है। रीवा और गुना में समितियां ही चुनाव के लिए पात्र नहीं हैं।

विकल्प ही नहीं बचा
उधर, प्राथमिक सहकारी समितियों का कार्यकाल समाप्त होने से जिला बैंकों के लिए चुने प्रतिनिधि का कार्यकाल भी समाप्त हो गया। इसके चलते अब सरकार के सामने बैंकों के चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि समिति के संचालकों में से ही एक को जिला सहकारी बैंक के संचालक चुनने के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता है। अधिनियम में होगा संशोधन : सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव केसी गुप्ता का कहना है कि कुछ बैंकों में चार साल से प्रशासक पदस्थ होने की बात सामने आई है। चुनाव न हो पाने से ऐसे हालात बने हैं। प्रशासक को लेकर सहकारी अधिनियम 1960 में जो प्रावधान हैं, उसे संशोधित करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, निर्वाचन प्राधिकारी प्रभात कुमार पाराशर ने बताया कि पंजीयक को पत्र लिखकर बैंकों की वसूली बढ़ाने के लिए कहा है, ताकि समितियां चुनाव में भागीदारी करने के लिए पात्र हो जाएं।

राजनीतिक नियुक्तियों पर मुख्यमंत्री करेंगे फैसला
अधिकारियों ने बताया सवा चार हजार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में गैर सरकारी व्यक्ति को प्रशासक बनाने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने इसका प्रस्ताव भेजा है, जिसे विभाग ने निर्णय के लिए मुख्यमंत्री समन्वय में भेज दिया है। अभी समितियों में अधिकारियों को या तो प्रशासक बना दिया गया है या फिर नियुक्ति की जा रही हैं।

 

NEWS IN English

Bhopal: Excluding the election, handing over cooperative bank administrators

Bhopal. Co-operative banks are not being held to keep the Act passed by the Assembly. In the cooperative law, after the end of the tenure of the governing board of the co-operative bank, the government can keep six-six months and administrators for one year only. Contrary to this, 15 of the 38 district cooperative central banks are administrators. Most of these are happening for four years. It is being told that though the operators have resigned because of internal politics, then no bank offered the proposal to hold elections. More or less the same is also of co-operative societies. Administrators have to be deployed here due to non-elections.

Why not
According to sources, Chhattarpur’s elections were held and the board of directors was elected. Although the agreement was not agreed on the president and operators resigned. This led to the lack of quorum and the governing body was not formed. This is also the case of Guna Bank. There is ongoing investigation of the voter list in Dewas. Committees in Rewa and Guna are not eligible for the election.

Not only options
On the other hand, the term of elected representatives for the district banks also expired after the end of the term of primary co-operative societies. As a result, there is no option left except for the elections of the banks in front of the government, as one of the directors of the committee is appointed to appoint a director of the district co-operative bank. The amendment in the Act: KC Gupta, Principal Secretary, Cooperative Department says that some banks have come to know that administrator has been appointed for four years. Such situations have not happened due to non-election. The procedure for amending the provisions of the Cooperative Act, 1960, regarding the Administrator, is underway. At the same time, Election Officer Prabhat Kumar Parashar told that the registrar has written a letter to increase the recovery of banks so that the committees are eligible to participate in the elections.

Chief Minister will decide on political appointments
Officials said the Chief Minister will finalize the final decision on the proposal to make a non-governmental person an administrator in the four thousand Primary Agricultural Credit Co-operative Society. Cooperative Minister Biswas Saarang has sent a proposal, which the department has sent to the Chief Minister for decision. In the committees, the officers have either been made administrators or are being appointed.

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