पूर्वोत्तर विधानसभा चुनाव: त्रिपुरा और नगालैंड में बीजेपी गठबंधन की सरकार, मेघालय के लिए जंग

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पूर्वोत्तर विधानसभा चुनाव: त्रिपुरा और नगालैंड में बीजेपी गठबंधन की सरकार, मेघालय के लिए जंग

नई दिल्ली। पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए अपना विजय अभियान जारी रखा है. त्रिपुरा में बीजेपी ने वाम दलों का किला ध्वस्त करते हुए शनिवार को आए विधानसभा चुनावों के परिणामों में विरोधियों को चित कर दिया है. त्रिपुरा में भाजपा गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद सरकार बनना तय है, जबकि भगवा पार्टी नगालैंड में भाजपा गठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में अग्रसर है. वहीं, मेघालय में भी भाजपा गैर-कांग्रेसी दलों को साथ लेकर सरकार बनाने की कोशिश कर रही है. भाजपा संसदीय बोर्ड की शाम में हुई बैठक में यह विश्वास जताया गया कि पार्टी नगालैंड और मेघालय में भी सरकार बनाएगी.

त्रिपुरा में बीजेपी को दो तिहाई बहुमत
बीजेपी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 25 सालों के वाम किले को ढहा दिया है. बीजेपी ने यहां 35 सीटों पर जीत हासिल की है. वहीं, गठबंधन में उसकी सहयोगी स्वदेशी पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) 8 सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही है. इस प्रकार बीजेपी गठबंधन ने 59 सीटों में से 43 सीटों पर विजय हासिल की है. बता दें कि इस आईपीएफटी गठबंधन ने प्रदेश की सभी सुरक्षित 20 जनजातीय विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है.

5 साल में पहले बीजेपी के 49 उम्मीदवारों की जमानत हो गई थी जब्त
त्रिपुरा में भाजपा को 2013 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 1.5 फीसदी वोट मिले थे और 50 में 49 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. जबकि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को 43 फीसदी वोट मिले हैं. वहीं, वाम मोर्चे को 2013 के चुनाव में कुल 50 सीटें मिली थीं और वह अभी सिर्फ 18 सीटों पर आगे चल रही है.

माकपा और भाकपा गठबंधन को 44 फीसदी से अधिक वोट मिले हैं, जो पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में लगभग छह फीसदी कम है. माकपा को अकेले 42.7 फीसदी वोट मिले हैं. कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में 10 विधानसभा क्षेत्रों में जीत मिली थी लेकिन इस बार पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल पाई. प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा की 59 सीटों पर 18 फरवरी को मतदान हुए थे. जनजातीय सुरक्षित सीट चारीलम में 12 मार्च को मतदान होगा. यहां माकपा उम्मीदवार नारायण देबबर्मा का निधन हो जाने से मतदान नहीं हो पाया था.

नगालैंड में बीजेपी के दोनों हाथों में है लड्डू
नगालैंड में तेजी से बदलते घटनाक्रम में ऐसा लगता है कि बीजेपी के दोनों हाथों में लड्डू है. उसके और एनडीपीपी के गठबंधन को ज्यादा सीटें तो मिली ही हैं, दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री टी.आर.जेलियांग के नेतृत्व में एनपीएफ पहले ही प्रस्ताव पारित कर चुकी है और उसने भाजपा के साथ गठबंधन में रहने की इच्छा जताई है. शनिवार को आए 59 सीटों के परिणाम में नगालैंड में सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा की झोली में 11 सीटें आई हैं. एक सीट पर एनडीपीपी के नेता नेफियू रियो पहले ही निर्विरोध जीत चुके हैं.

पिछली बार एनपीएफ को मिला था बहुमत
राज्य में अभी नगा पीपल्स फ्रंट यानी एनपीएफ की सरकार थी. ये वही एनपीएफ है जिसके साथ बीजेपी का करीब 15 साल पुराना गठबंधन था. नगालैंड की सत्ता पर नगा पीपल्स फ्रंट 2003 से ही काबिज है. यह सत्ता एनपीएफ ने कांग्रेस को बेदखल करके हासिल की थी. शुरहोजेलि लियोजित्सु इसके अध्यक्ष हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में एनपीएफ ने राज्य की 60 सीटों में से 37 सीट पर जीत दर्ज की थी.

मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस को नुकसान
मेघालय में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 21 सीटों पर जीत हासिल की है, इसके बावजूद उसे पिछले चुनाव के मुकाबले नुकसान झेलना पड़ा है. बता दें कि पिछले चुनावों में पार्टी ने 60 में से 29 सीटें जीती थीं. वहीं, भाजपा की संभावित गठंबधन साझेदार नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने 19 सीटें जीत ली हैं और भाजपा को 2 सीटों पर जीत मिली है.

गोवा और मणिपुर जैसे हालात से बचने के लिए कांग्रेस का हाईकमान जीत के तुरंत बाद ही एक्टिव हो गया. यही वजह है कि शनिवार देर रात मेघालय कांग्रेस के अध्यक्ष विंसेंट पाला और कांग्रेस के महासचिव सीपी जोशी ने राज्यपाल गंगा प्रसाद से मुलाकात की. साथ ही कांग्रेस की तरफ से सरकार बनाने की दावेदारी वाला लेटर भी सौंपा. लेटर में लिखा गया है कि कांग्रेस पार्टी राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर बनकर उभरी है. संवैधानिक नियमों के अनुसार कांग्रेस को जल्द से जल्द सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दिया जाना चाहिए. विधानसभा में तय दिन और समय के अनुसार पार्टी बहुमत सिद्ध कर देगी.

 

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NEWS IN ENGLISH

North-Eastern assembly elections: BJP coalition government in Tripura and Nagaland, battle for Meghalaya

new Delhi. In the three states of the North-East, the Bharatiya Janata Party has continued its campaign while performing historically. In Tripura, BJP has demolished the Left Front fortress in the outcome of the assembly elections held on Saturday. In Tripura, BJP coalition, after getting majority, is ready to form the government, while the saffron party is moving towards Nagaland to form the government of BJP coalition. At the same time, in Meghalaya, BJP is trying to form government with non-Congress parties. In the evening of the BJP Parliamentary Board meeting in the evening, it was believed that the party would form the government in Nagaland and Meghalaya.

Tripura BJP gets two-third majority
BJP has demolished the 25-year-long Left Front by registering a historic victory in Tripura assembly elections. The BJP has won 35 seats here. At the same time, his allies in the coalition, Swadeshi Peoples Front of Tripura (IPFT) have managed to capture 8 seats. Thus, BJP alliance has won 43 of the 59 seats. Let me tell you that this IPFT alliance has won all 20 safe seats in the state.

Seven BJP candidates secured bail in 5 years
In Tripura, BJP got only 1.5 percent of the votes in the 2013 assembly elections and in 49 seats 49 candidates were seized from the party’s candidates. In this assembly elections, BJP has got 43 percent of the votes. At the same time, the Left Front got a total of 50 seats in the 2013 elections and it is just ahead of only 18 seats.

The CPI (M) and the CPI-AL combine have got more than 44 per cent of the votes, which is about six per cent lower than the previous assembly elections. The CPI (M) got 42.7 percent of the votes alone. Congress won the last assembly elections in 10 assembly constituencies but this time the party could not even open its account. There were 59 constituencies in the 60-member assembly of the state on February 18. Tribal safe seats will be held on March 12 in Charul. There was no voting in the presence of CPI (M) candidate Narayan Debbarma.

Laddu is in both hands of BJP in Nagaland
In the rapidly changing developments in Nagaland, it seems that the BJP has both laddus in both hands. The NDPF has already passed the proposal and it has expressed the desire to be in the coalition with the BJP, on the other hand, under the leadership of Chief Minister T. J. Jiliang, he and the NDPP coalition have got more seats. In the result of the 59 seats that came on Saturday, the ruling Naga People’s Front (NPF) in Nagaland has won 27 seats, while BJP has bagged 11 seats. One seat NDPP leader Nefieu Rio has already won uncontested elections.

The last time NPF got the majority
Now the Naga People’s Front in the state was NPF’s government. This is the same NPF with which the BJP had nearly 15 years old coalition. Naga Peoples Front is occupying the Nagaland power since 2003. This power was obtained by the NPF by ousting the Congress. Shurhozeli Leighsu is the president of it. In the last assembly elections, the NPF won 37 of the state’s 60 seats.

Despite the largest party in Meghalaya, the Congress suffered losses
In Meghalaya, the ruling Congress has won the highest number of 21 seats, despite this it has suffered losses against the previous elections. In the last elections, the party won 29 of the 60 seats. At the same time, the BJP’s possible alliance partner National People’s Party (NPP) has won 19 seats and the BJP has won two seats.

To avoid the situation like Goa and Manipur, the Congress high command became active immediately after winning. That is why on Saturday late night, Meghalaya Congress President Vincent Pala and Congress General Secretary CP Joshi met Governor Ganga Prasad. At the same time, the Congress has given the claimant’s letter to form the government. The letter states that the Congress party has emerged as the largest party in the state assembly elections. According to constitutional rules, Congress should be invited to form the government at the earliest. According to the day and time fixed in the assembly, the party will prove majority.

 

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