नगर के मतदाताओं के सबके जुदा हैं सपने

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नगर के मतदाताओं के सबके जुदा हैं सपने


बैतूल/शाहपुर, (सचिन शुक्ला)। आमतौर पर नगर निकाय चुनावों में मुद्दा भी उसी क्षेत्र का स्थानीय और उम्मीदवार भी निजी पसंद का होता है। लेकिन कुछ बातें मूलभूत जरूरतों में शुमार, सड़क, बिजली, नाली, पानी, सफाई जैसे मुद्दे तो अपनी जगह हैं, जिनकी जरूरतें हमेशा बनी रहेंगी। लेकिन अब मतदाता काफी जागरुक हो गया है।

नगरीय निकाय जैसे स्थानीय चुनावों में मतदाता अब रोजगार, बच्चों का भविष्य, आमदनी बढ़ाने वाला, खेलों और अन्य माध्यम से बच्चों के कॅरियर का ध्यान रखने वाला पार्षद भी अब समय की मांग हो रही है। मांग है, तो रास्ते कैसे निकलेंगे, यह भी सुझाव आ रहे हैं। आमतौर पर माना जाता है कि इस तरह की चीजें विधानसभा चुनावों की होती हैं, नगर निकाय को इससे क्या लेना-देना? मगर अब इन चुनावों में भी ऐसी मांगें उठने लगी हैं।

हमने जिन वार्डों का दौरा किया, वहां कुछ ऐसी ही मांगें सामने आ रही हैं, जो किसी भी राजनैतिक दल के समग्र घोषणा पत्र में शामिल की जा सकती हैं। हालांकि इस बार केवल पार्षद पद के चुनाव हो रहे हैं, इसलिए माना जा रहा है, हर वार्ड का पार्षद अपना स्वयं घोषणा पत्र बनाएगा तो यह जरूरी भी नहीं है। पार्टी भी अपने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नगर के हर वार्डों में कुछ ऐसे काम करा सकती हैं, जब उनको परिषद में बहुमत मिले और अध्यक्ष उनका हो।

नगर पालिका चुनाव में जो पार्षद अपनी किस्मत आजमाने मैदान में आ रहे हैं, उनके लिए यह चिंताजनक है। हालांकि इस बात का दावा तो नहीं किया जा सकता है कि किसी वार्ड में कोई असंतुष्ट है तो यह किसी प्रत्याशी को नापंसद करने का कारण बन सकता है। पार्षदों में कुछेक नाम हैं, जिनका मतदाताओं से सीधा जुड़ाव पूर्व से जनता से है और वह अपने वार्ड के मतदाताओं को घर पहुंच सेवाएं दे सकते हैं इसीलिए कहा जाता है कि स्थानीय निकाय के चुनाव चेहरों पर भले लड़े जाएं, सबको संतुष्ट करना काफी मुश्किल होता है।

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