गौठाना में नाले की जमीन हड़पने गायब कर डाले चांदे, सरकारी जमीन पूरे शहर में असुरक्षित होती जा रही है

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गौठाना में नाले की जमीन हड़पने गायब कर डाले चांदे, सरकारी जमीन पूरे शहर में असुरक्षित होती जा रही है

वामन पोटे
बैतूल। शासकीय भूमि पूरे बैतूल शहर में असुरक्षित होती जा रही है। भूमि का वास्तविक सीमांकन के लिये चांदा-मुनारा का सहारा अब बीते दिनों की बात हो गई है। चांदा-मुनारा के नक्शे गायब कर दिए गए। इसका फायदा भूमाफिया और जमीन के कारोबारी उठाने लग गए। इधर भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि खसरा नम्बर 173/15 में रकबा 1.862 हेक्टयर भूमि की खरीदी की गई है।जमीन का राजस्व विभाग ने फरद बटान देखे बिना ही ज्यादा भूमि के पट्टे राजस्व विभाग ने आन फानन में बना दिये है। जिसके चलते अब राजस्व विभाग अपनो को बचाने की जद्दोजहद करने में लगा है। रजिस्ट्री में दर्ज जमीन से ज्यादा कैसे बहि बन गई और नामांतरण हो गए अब यह भी जांच का विषय बन गया है। बैतूल कलेक्टर कार्यालय से एक किलोमीटर दूर गौठाना के पटवारी हल्का क्रमांक 35 में खसरा नंबर 176 नाला मद की भूमि लगभग पूरी तरह से गायब कर दी गई है। इस जमीन का सीमांकन करने के लिए कमिश्नर के आदेश पर पहुंची राजस्व विभाग की टीम दूसरे दिन भी बैरंग लौट गई। इलाके में 70 साल पहले स्थापित किए गए चांदे ही गायब कर दिए गए हैं। इलाके में सेटलमेंट का एक भी कुआं नहीं है जिसके चलते नपाई और सीमांकन का काम पूरी तरह से सही हो पाना संभव नजर नहीं आ रहा है। सुबह से शाम तक राजस्व अमला इलाके में चांदे तलाशते रहा, लेकिन कामयाबी न मिलने से बैरंग लौट गया। उल्लेखनीय है कि गौठाना इलाके में बैतूल टाऊन के नाम से कॉलोनी का निर्माण किया गया है। कमिश्नर से की गई शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि कॉलोनी का निर्माण करने वालों के द्वारा सरकारी जमीन पर भी प्लाट काटकर बेच दिए गए और लोगों ने उस पर मकान भी बना लिए हैं। अब कमिश्नर के आदेश पर जमीन का सीमांकन अधीक्षक भू-अभिलेख के द्वारा 2 राजस्व निरीक्षकों के साथ 9 राजस्वकर्मियों के सहयोग से 28 फरवरी से शुरू किया गया है। अधीक्षक भू-अभिलेख के साथ जमीन का सीमांकन करने के लिए राजस्व निरीक्षक सुखराम सिरसाम, नीरज बैस के साथ ईटीएस प्रशिक्षित पटवारी दिलीप करोचे, उदयराम धुर्वे, मोहन धुर्वे और पटवारी गोपाल महस्की, मंजुला सोनी, चैनमेन मीना जगदेव दूसरे दिन भी जुटे रहे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

 

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NEWS IN ENGLISH

Gathena land grabbed land grabbed by land, government land is becoming unsafe in the entire city.

Vaman Pote
Betul Government land is becoming unsafe in whole city of Betul. Chanda-Munara’s Sahara for the actual demarcation of land has now become a thing of the past. Maps of Chanda-Munara have disappeared. It started taking advantage of the landlords and land traders. According to reliable sources, the land measuring 1.862 hectare land has been purchased in Khasra No. 173/15. The Revenue Department of the land has made the lease of land more than the land revenue department has made in the house. Because of this, now the revenue department has been trying hard to save you. How much of the records registered in the registry became externally and transferred, it has also become the subject of investigation. Land of Khasra No. 176 Nalla item has almost completely disappeared in Patwari Light No. 35 of Gothana, one kilometer from Betul Collector’s office. The revenue department, which reached the commissioner’s order to demarcate this land, returned to the bar on the second day. Plants installed in the area 70 years ago have been vanished. There is no single well-settled settlement in the area, which is not possible due to the fact that the construction of the monorail and demarcation can not be fully corrected. From morning till evening the revenue went on exploring the land in Amla area, but the return was not returned due to failure. It is noteworthy that the colony was built in the name of Betul Town in Gothana area. In the complaint made to the Commissioner, it has been alleged that those who built the colony were also sold and sold on government land, and people have also built houses on it. On the order of the commissioner, now the land demarcation was started by the Superintendent of Land Records with the help of 9 revenue officials with 2 revenue inspectors from 28th February. In order to demarcate the land with Superintendent land records, revenue inspector Sukhram Sirasam, Neeraj Bass, ETS-trained Patwari Dilip Karochi, Udayam Dhurve, Mohan Dhurve and Patwari Gopal Mehski, Manjula Soni, Chainman Meena Jagdev were also present for the second day, but Did not get success

 

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