गोंड कलाकार भज्‍जू श्‍याम, लेखिका मालती जोशी सहित मप्र के चार को पद्मश्री

Advertisements

NEWS IN HINDI

गोंड कलाकार भज्‍जू श्‍याम, लेखिका मालती जोशी सहित मप्र के चार को पद्मश्री

भोपाल। मध्‍यप्रदेश के आदिवासी गोंड कलाकार भज्‍जू श्‍याम और लेखिका मालती जोशी के साथ ही लेखक केशवराव मुसलगांवकर व कलाकार बाबा योगेंद्र को पद्मश्री अवाॅर्ड देने की घोषणा की गई है। अपनी कृतियों के लिए दुनियाभर में ख्‍याति अर्जित कर चुके भज्‍जू श्‍याम जबलपुर के पास पाटनगढ़ गांव के निवासी हैं। भज्‍जू श्‍याम ने अभावों और असुविधाओं से जूझते हुए अपनी प्रतिमा को निखारा और अब तक अनेक पुरस्‍कार जीते हैं। गोंड कलाकार भज्जू श्याम की पेंटिंग की दुनिया में अलग ही पहचान बनी है। 1971 में जन्मे भज्जू श्याम की मां घर की दीवारों पर पारंपरिक चित्र बनाया करती थीं और दीवार के उन भागों पर जहां उनकी मां के हाथ नहीं पहुंच पाते थे, भज्जू श्याम अपनी मां की सहायता करते थे।

अभावों से जूझते हुए भज्‍जू श्‍याम करीब 16 वर्ष की उम्र में राजधानी भोपाल काम की तलाश में आए। वे रात में चौकीदार का काम करने लगे। इसके बाद रिश्‍ते के एक चाचा ने उनमें छिपी चित्रकार की प्रतिभा को पहचाना।चाचा जनगढ़ सिंह श्याम की गिनती भी तब अच्‍छे गोंड कलाकारों में होती थी।

उनके मार्गदर्शन में भज्‍जू की प्रतिभा निखरी और वे 1998 में अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर जाने जाने लगे। इसके बाद विदेशों में उनके चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई। भज्‍जू श्‍याम के कई चित्र किताब का स्‍वरुप ले चुके हैं। मालती जोशी और केशवराव मुसलगांवकर ने लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय कार्य किया है जबकि बाबा योगेंद्र ने कला के क्षेत्र में ख्‍याति अर्जित की है।

 

NEWS IN English

Gond artist Bhajjya Shyam, along with writer Malti Joshi,

Bhopal. Along with Madhya Pradesh tribal Gond artist Bhajjoo Shyam and writer Malti Joshi, author Keshavrao Mussalgaonkar and artist Baba Yogendra have been announced the Padma Shri award. Bhajjya Shyam, who has earned worldwide fame for his works, is a resident of Patangarh village near Jabalpur. Bhajjya Shyam has struggled with the disadvantages and disadvantages and has won many awards so far. The painting of Gond artist Bhajji Shyam has become a different identity in the world of painting. Born in 1971, the mother of Bhajjya Shyam used to make traditional paintings on the walls of the house and on those parts of the wall where her mother could not reach, Bhajjya Shyam used to help her mother.

Bhajjya Shyam, struggling with problems, at the age of about 16, the capital Bhopal came in search of work. They started working as a watchman at night. After this, an uncle of the relationship recognized the talent of the hidden artist in him. Chacha Jangarh Singh Shyam was also counted among good Gond Cast.

Under his guidance, Bhajju’s talent grew and he became known internationally in 1998. After this, exhibition of his paintings in foreign countries was set up. Many images of Bhajju Shyam have taken the form of the book. Malti Joshi and Keshavraoo Mussalgaonkar have done remarkable work in the field of writing and education while Baba Yogendra has earned a reputation in the field of art.

Advertisements
Advertisements
Advertisements
Advertisements

Related posts

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.