मप्र में वर्षों से 130 डॉक्टरों की कुर्सी खाली,लेकिन पद भरे

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मप्र में वर्षों से 130 डॉक्टरों की कुर्सी खाली,लेकिन पद भरे

भोपाल। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर कहीं मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर बन गए हैं, तो किसी ने नर्सिंग होम खोल लिया है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनके पद भरे हुए हैं। किसी अस्पताल में डॉक्टरों की गिनती होती है तो अस्पताल न आने वाले डॉक्टरों को भी शामिल कर लिया जाता है। जबकि, इन्होंने मरीज तो दूर सालों से अस्पताल की सूरत तक नहीं देखी है। अलग-अलग संभाग में ऐसे डॉक्टरों की संख्या 10 से 17 के बीच है। यानी पूरे प्रदेश में करीब 130 डॉक्टर ऐसे हैं, जो अस्पताल नहीं आ रहे हैं। सरकार अब इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। शनिवार को इन डॉक्टरों को स्वास्थ्य सचिव कवींद्र कियावत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही अस्पतालों में भी नोटिस चस्पा किए गए हैं। 15 दिन के भीतर अगर डॉक्टरों का जवाब नहीं मिला तो एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, इनमें कुछ पुराने डॉक्टर हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था। वीआरएस नहीं मिलने पर उन्होंने नौकरी में आना बंद कर दिया। इसी तरह से कुछ नए डॉक्टर हैं, जिन्होंने मेडिकल कॉलेज ज्वाइन कर लिया या फिर पीजी और सुपर स्पेशलिटी की पढ़ाई करने चले गए। हालांकि, पढ़ाई के लिए सरकार अनुमति देती है, लेकिन कोर्स पूरा करने के बाद डॉक्टर को एक तय अवधि तक काम करना होता है। लिहाजा कुछ डॉक्टर इस झंझट से बचने के लिए नौकरी ही छोड़ देते हैं। गैर हाजिर डॉक्टरों में 95 फीसदी 2014 के बाद के हैं।

ज्यादातर सीएचसी व पीएचसी के डॉक्टर गैरहाजिर
गैरहाजिर डॉक्टरों में ज्यादातर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) के हैं। ये अस्पताल जिला मुख्यालयों से दूर हैं, जबकि ज्यादातर डॉक्टर जिला मुख्यालय में रहते हैं। लिहाजा दूर के चलते वे नौकरी छोड़ देते हैं। दूसरी दिक्कत सुविधाओं की है।

इधर, प्रदेश में 2824 डॉक्टरों की कमी
प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 3228 पद हैं। इनमें 1274 डॉक्टर पदस्थ हैं। यानी 1954 विशेषज्ञों की कमी है। प्रदेश के 14 जिलों में विशेषज्ञों को एक-एक लाख रुपए वेतन का भी ऑफर दिया गया, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। इसी तरह से मेडिकल आफिसर्स के 3859 पदों में सिर्फ 2989 कार्यरत हैं। यानी 870 डॉक्टरों की कमी है। कुल मिलाकर 2824 डॉक्टरों की कमी है।

 

NEWS IN English

In 130 years, 130 doctors vacated the vacant post, but filled the post

Bhopal. The Doctor of Health Department has become a lecturer in some medical college, so someone has opened a nursing home. But his posts are full of government records. If doctors are counted in a hospital, doctors who are not coming to the hospital are also included. However, the patient has not seen the hospital since then for years. The number of such doctors in different departments ranges from 10 to 17. That is, there are about 130 doctors in the entire state who are not coming to the hospital. The government is now going to take action against these doctors. On Saturday, these doctors have issued a notice to Health Secretary, Mr Ketan Kiyavat and asked for an answer. In addition, notices have been paused in hospitals too. If doctors do not get the answer within 15 days, unilateral action will be taken. Actually, there are some old doctors who applied for voluntary retirement (VRS). When VRS was not found, they stopped joining the job. Similarly, there are some new doctors, who joined the medical college or went to study PG and super specialty. However, the government allows for studies, but after completion of the course the doctor has to work for a fixed period. So some doctors leave the job to avoid this problem. 95% of non-spot doctors are after 2014.

Most of the chemists of CHC and Ph.C. are absent
Most of the absent doctors are from the Community Health Center (CHC) and the Primary Health Center (PHC). These hospitals are away from the district headquarters, while most doctors live in the district headquarters. So they leave the job because of distance The other problem is the problem.

Here, the lack of 2824 doctors in the state
There are 3228 posts of specialist doctors in the state. Of these 1274 doctors are posted. That is, 1954 lack of experts. Experts in 14 districts of the state were also offered salaries of one lakh rupees, but doctors did not get it. In the same way, there are only 2,899 posts of 3859 posts of Medical Officers. That is the lack of 870 doctors. Altogether, there is a shortage of 2824 doctors.

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