बैतूल : जिले में अब होगी रावण पुत्र मेघनाथ की पूजा

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बैतूल : जिले में अब होगी रावण पुत्र मेघनाथ की पूजा

बैतूल। जिले के गावो में होली के दूसरे दिन धुरेंडी से लेकर पंचमी तक रावण पुत्र मेघनाद का पूजन होगा। इसके साथ ही मेला भी लगेगा। गुरुवार को मुलताई में मेघनाद पूजन और मेले को लेकर मेघनाद मोहल्ले में दिन भर तैयारी चलते रही। हर गांव में मेघनाद मोहल्ला है , यहां पर 40 से 42 फीट ऊंची लकड़ी के खंभे है। इस दिन मेघनाद की सफाई-पुताई कर गल चढ़ाया।

इस गल पर धुरेंडी की शाम में लोग रस्सी बांधकर झूलेंगे। बुजुर्गों ने बताया मेघनाद के दोनों खंभों के बीच एक छोटे खंभे पर कपड़ा लपेटकर बांधा जाता है। जिसे गल कहते हैं। यह मेघनाद की भुजा मानी जाती है। धुरेंडी पर दोपहर 2 बजे से मेघनाद का पूजन शुरू होगा। मेघनाद की पुताई करने वाला भक्त लगातार आठ घंटे तक बैठकर पूजा करेगा। इस दौरान यहां मेला भी लगेगा। इसके साथ ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली मंडलियों के बीच फाग स्पर्धा भी होगी। इन स्थानों पर मेले का भी आयोजन होता है। ग्रामवासी तैयार होकर रावण पुत्र मेघनाथ की पूजा अर्चना करते है।

 

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NEWS IN ENGLISH

Betul: In the district there will now be the worship of Meghnath, the son of Raavan

Betul On the second day of Holi in the district of Gowa, the worship of Meghnad will be the worship of Ravan’s son from Dhurendi to Panchami. This will also take place with the fair. On Thursdays, preparations were going on throughout the day in Meghnad Mohalla for Meghnad Pooja and Mela. Every village has Meghnad Mohalla, it has 40 to 42 ft tall wooden pillars. On this day, cleanliness-painted meghnaad-plated.

On the neck of Dhurandei people will hang on with a rope. The elderly said the cloth is wrapped on a small pillar between the two pillars of the meghnaad. Which is called GAL. It is considered to be the arm of Meghnad. Meghnad will start from Dhurendi at 2 pm. The worshiper worshiping Meghnad will worship for eight consecutive hours. A fair will also be held here during this period. With this there will also be a phag contest among the circles coming from the rural areas. The fair is organized at these places. The villagers get ready and worship Ravana son Meghnath.

 

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