सीरिया-इराक से भाग रहे IS आतंकियों से चीन की बढ़ी चिंता, अफगानिस्तान में बनाएगा सैन्य अड्डा

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सीरिया-इराक से भाग रहे IS आतंकियों से चीन की बढ़ी चिंता, अफगानिस्तान में बनाएगा सैन्य अड्डा

काबुल। कारोबार बढ़ाने की कोशिशों के साथ ही चीन अपनी सामरिक स्थिति भी मजबूत कर रहा है। अफ्रीका के जिबूती में पहला विदेशी सैन्य अड्डा बनाने के बाद वह अब अफगानिस्तान में दूसरा बेस बनाने की तैयारी कर रहा है। इससे साफ हो गया है कि अफगानिस्तान की धरती पर चीन की भूमिका बढ़ने वाली है। अफगान अधिकारियों ने बताया है कि अफगानिस्तान से चीन में आतंकियों के आने पर रोक लगाने के लिए पेइचिंग मिलिटरी बेस बनाने पर बात कर रहा है। चीन की चिंता यह है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी अफगानिस्तान के रास्ते देश में दाखिल हो सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया है कि यह आर्मी कैंप अफगानिस्तान के सुदूर और पहाड़ी वाखान कॉरिडोर में बनाया जाएगा। गौरतलब है कि हाल में इस इलाके में चीन और अफगानिस्तान के सैनिक संयुक्त रूप से गश्त करते देखे गए हैं। अफगानिस्तान का यह सर्द और बंजर इलाका चीन के तनावपूर्ण शिंजियांग क्षेत्र से सटा हुआ है। यह इलाका अफगानिस्तान के बाकी हिस्से इतना कटा हुआ है कि यहां के रहने वालों को अफगान संघर्ष की जानकारी ही नहीं है।

चीन की चिंता इस बात को लेकर है कि यहां रहने वाले लोगों के शिंजियांग के लोगों से काफी घनिष्ठ संबंध हैं और लोग एक दूसरे की तरफ आते-जाते रहते हैं। गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग आर्थिक और भूराजनीतिक दबदबा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए चीन दक्षिण एशिया में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। ऐसे में अगर आतंकियों से चुनौती मिलती है तो चीन के मंसूबे को झटका लग सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अफगानिस्तान से क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो सकती है, ऐसे में इस तरह के किसी कदम को सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

पेइचिंग की चिंता यह है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के उइघुर समुदाय के लोग वाखान के रास्ते शिंजियांग में आकर हमले करते हैं। चीन को डर है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी इराक और सीरिया से भागकर मध्य एशिया और शिंजियांग से होकर अफगानिस्तान पहुंच सकते हैं। यही नहीं, वाखान के रास्ते आतंकी चीन में भी दाखिल हो सकते हैं।

अफगान रक्षा मंत्रालय के उपप्रवक्ता मोहम्मद रदमनेश ने कहा कि अफगान और चीन के अधिकारियों ने दिसंबर में पेइचिंग में इस योजना पर चर्चा की थी लेकिन विस्तार से बातचीत अब भी जारी है। उन्होंने बताया, ‘हम बेस बनाने की इजाजत देंगे लेकिन चीन की सरकार ने हमें वित्तीय मदद के साथ ही उपकरणों व अफगान सैनिकों को प्रशिक्षण देने का आश्वासन दिया है।’ काबुल में चीनी दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने केवल इतना कहा कि पेइचिंग अफगानिस्तान में क्षमता निर्माण में शामिल है। गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारी पहले ही अफगानिस्तान में चीन की भूमिका का स्वागत कर चुके हैं।

 

 

 

NEWS IN ENGLISH

Syria: Increased concern from IS militants fleeing Iraq, military base to be built in Afghanistan

Kabul With efforts to increase business, China is also strengthening its strategic position. After making the first foreign military base in Djibouti, Africa, he is now preparing to build the second base in Afghanistan. It has been made clear that the role of China on Afghanistan’s land is going to increase. Afghan officials have said that Beijing is talking about making Beijing military base to prevent terrorists coming from Afghanistan. The concern of China is that Islamic State militants can enter the country through Afghanistan.

Officials have said that this army camp will be built in the remote and mountainous Wakhan corridor in Afghanistan. Significantly, in this region, the soldiers of China and Afghanistan have been jointly patrolled. This refrigerant and barren area of ​​Afghanistan is stuck with China’s stressful Shinjian region. The rest of Afghanistan’s area is so chopped that the people living here are not aware of the Afghan conflict.

Concerns of China are about the fact that people living here have a very close relationship with the people of Shinjiang and people keep coming and going one another. Significantly, China’s President Xi Chunfing is working towards increasing economic and geopolitical influence. For this, China is investing billions of dollars in South Asia. In such a situation, if there is a challenge from the terrorists, then the Chinese mindset may be a shock. Analysts say Afghanistan can cause volatility in the region; in such a situation, such a step should be seen from a security perspective.

The worry of Beijing is that people from the Uighur community of East Turkistan Islamic Movement (ETIM) attack in Shinjiang by way of Wakhan. China fears that Islamic State militants may flee Iraq and Syria and reach Afghanistan via Central Asia and Xinjiang. Not only that, terrorists may also enter China via Wakhan.

Mohammad Randanesh, deputy professor of the Afghan Ministry of Defense said that Afghan and Chinese officials discussed this plan in Beijing in December but the talks with the extension are still going on. They said, “We will allow the base, but the Chinese government has assured us to provide training to equipment and Afghan soldiers along with financial help.” Only senior officials of the Chinese embassy in Kabul said that Beijing was involved in capacity building in Afghanistan. Significantly, US officials have already welcomed China’s role in Afghanistan.

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