OBOR पर भारत को मिला ब्रिटेन का साथ, प्रोजेक्ट के पीछे चीन की सोच पर जताया शक

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OBOR पर भारत को मिला ब्रिटेन का साथ, प्रोजेक्ट के पीछे चीन की सोच पर जताया शक

नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी योजना वन बेल्ट-वन रोड (OBOR) पर भारत शुरुआत से ही अपना विरोध दर्ज करवाता रहा है। अब भारत को इस मुद्दे पर ब्रिटेन का भी साथ मिला है। ब्रिटेन ने चीन के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पर चिंता व्यक्त की है। ब्रिटेन की ओर से कहा गया है कि उन्हें चीन की इस प्रोजेक्ट के पीछे की लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म की सोच पर शक है। ब्रिटेन के अखबार द गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने साफ तौर पर चीन के इस प्रोजेक्ट के समर्थन से अपने आप को दूर ही रखा। अपने पहले चीन दौरे पर उन्होंने चीन को अपना नेचुरल पार्टनर बताया, लेकिन इस मुद्दे पर चुप्पी ही साधी। गौरतलब है कि चीन का ये प्रोजेक्ट करीब 60 देशों को जोड़ता है। इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन से यूरोप तक आना-जाना, व्यापार करना काफी आसान हो जाएगा।

खबर की मानें, तो ब्रिटेन सरकार इस प्रोजेक्ट से जुड़े किसी भी समझौते पर अपनी मंजूरी नहीं देगी। थेरेसा मे के मुताबिक, चीन और ब्रिटेन दोनों साथ मिलकर एक साथ दुनिया के लिए काम कर सकते हैं। जहां तक इस प्रोजेक्ट की बात है हमें अभी यह देखना होगा कि ये किस तरह अंतरराष्ट्रीय मापकों पर खरा उतरता है और इसका हमारे क्षेत्र में किस तरह असर पड़ता है। इस प्रोजेक्ट को सही तरीके लागू किया जाना चाहिए। आपको बता दें कि भारत, ब्रिटेन के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी इस प्रोजेक्ट पर विरोध जता चुके हैं।

भारत की आपत्ति क्या है?
बता दें कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर भारत की गहरी आपत्ति है। दरअसल सीपीईसी गिलगिट और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बालटिस्तान से होकर गुजरता है। भारत PoK सहित समूचे जम्मू-कश्मीर राज्य को अपना अखंड हिस्सा मानता है। सीपीईसी चीन की विशिष्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की महत्वपूर्ण परियोजना है और राजधानी बीजिंग में दो दिनों तक चलने वाली बैठक में इस परियोजना के प्रमुखता से उठने की संभावना है। बीते वर्ष मई में चीन में इसका उद्घाटन समारोह भी हुआ था, चीन की कई कोशिशों के बावजूद भारत इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ था।

जाने क्या है ये प्रोजेक्ट?
चीन ने आर्थिक मंदी से उबरने, बेरोजगारी से निपटने और अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को पेश किया है। चीन ने एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क मार्ग, रेलमार्ग, गैस पाइप लाइन और बंदरगाह से जोड़ने के लिए ‘वन बेल्ट, वन रोड’ के तहत सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट और मैरीटाइम सिल्क रोड परियोजना शुरू की है। इसके तहत छह गलियारे बनाए जाने की योजना है। इसमें से कई गलियारों पर काम भी शुरू हो चुका है। इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरने वाला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी शामिल है, जिसका भारत कड़ा विरोध कर रहा है। भारत का कहना है कि पीओके में उसकी इजाजत के बिना किसी तरह का निर्माण संप्रभुता का उल्लंघन है। कुछ दिन पहले ही चीन ने भारत को शामिल करने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का नाम बदलने पर भी राजी हो गया था, लेकिन बाद में इससे पलटी मार गया।

इन गलियारों से जाल बिछाएगा चीन

न्यू सिल्क रोड के नाम से जानी जाने वाली ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना के तहत छह आर्थिक गलियारे बन रहे हैं। चीन इन आर्थिक गलियारों के जरिए जमीनी और समुद्री परिवहन का जाल बिछा रहा है।

1. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा

2. न्यू यूराशियन लैंड ब्रिज

3. चीन-मध्य एशिया-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारा

4. चीन-मंगोलिया-रूस आर्थिक गलियारा

5. बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार आर्थिक गलियारा

6. चीन-इंडोचाइना-प्रायद्वीप आर्थिक गलियारा

 

NEWS IN ENGLISH

India meets India on OBOR, expresses China’s thinking behind project

new Delhi. On the one-belt-one-road (OBOR), China’s President Xi Jinping’s ambitious plan, India has been protesting from the very beginning. Now India has got the UK together with this issue. Britain has expressed concern over this ambitious project of China. The UK has been told that they suspect the long-term and short-term thinking behind this Chinese project. According to a report printed in Britain’s newspaper The Guardian, Prime Minister Theresa clearly cleansed herself with the support of this Chinese project. On his first visit to China, he described China as his natural partner, but the silence on this issue is simple. Significantly, this project of China connects about 60 countries. Through this project, moving from China to Europe will make trading easier.

Accept the news, the UK government will not approve any agreement related to this project. According to Theresa May, both China and the UK can work together for the world together. As far as the project is concerned, we have to see how it meets the international standards and how it affects our region. This project should be implemented correctly. Let us tell you that apart from Britain, US President Donald Trump and President Macro of France have also protested against this project.

What is the objection of India?
Explain that India’s deepest objection is on the China-Pakistan Economic Corridor (CPEC). In fact, CPEC passes through Gilgit and Baltistan of Pakistan Occupied Kashmir (PoK). India considers the Jammu-Kashmir state as its integral part, including the PoK. CPEC is a key project of the China-specific Belt and Road Initiative (BRI) and there is a possibility of a rise in the prominence of this project in a two-day meeting in Beijing, capital of Beijing. In May last year, its inauguration ceremony was held in China, despite many efforts of China, India did not participate in this program.

What is this project?
China has introduced ‘One Belt, One Road’ project to overcome economic slowdown, deal with unemployment and to make the economy grow. China has launched Silk Road Economic Belt and Maritime Silk Road Project under ‘One Belt, One Road’ to connect Asia, Europe and Africa with road, rail, gas pipeline and harbor. Under this, there are plans to build six corridors. Work on many corridors has already started. It also includes the China-Pakistan Economic Corridor, which has been under Pakistani Occupied Kashmir (PoK), which India is strongly opposed to. India says that construction of any kind is a violation of sovereignty without its permission in POK. Just a few days earlier, China had agreed to change the name of the China-Pakistan Economic Corridor to include India, but later it was overturned.

China will trap these corridors

Under the ‘One Belt, One Road’ project known as New Silk Road, six economic corridors are under construction. China is laying a network of ground and sea transport through these economic corridors.

1. China-Pakistan Economic Corridor

2. New Eurasian Land Bridge

3. China-Central Asia-West Asia Economic Corridor

4. China-Mongolia-Russia Economic Corridor

5. Bangladesh-China-India-Myanmar economic corridor

6. China-Indochina-Peninsula Economic Corridor

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