जालंधर : भिखारियों को सक्षम बनाने के लिये युवाओं ने छोड़ी लाखों की नौकरी

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जालंधर : भिखारियों को सक्षम बनाने के लिये युवाओं ने छोड़ी लाखों की नौकरी

जालंधर। सड़कों पर राह चलते बच्चों को भीख मांगते तो सभी ने देखा है। हर कोई उनके हाथों में चंद सिक्के थमाकर चल देता है, लेकिन उनकी तकलीफ को समझकर उनके हाथों से कटोरा लेकर कलम थमाने की पहल की है जालंधर के रहने वाले हर्ष कोठारी ने। हर्ष ने इन बच्चों को पढ़ाने के लिये लाखों की नौकरी छोड़ी और हर हाथ कलम नाम की संस्था बनाई। उनकी यह मुहिम रंग लाई लोग आते गए और कारवां बड़ता गया।

सामने था सुनहरा करियर-
हर हाथ में कलम थमाने के उद्देश्य से पटियाला के थापर इंजीनियरिंग कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों ने जुलाई 2014 में एक मुहिम शुरू की थी। जिसका नारा था- भीख हटाओ, देश बचाओ। ये इंजीनियरिंग छात्र अपनी-अपनी पढ़ाई पूरी कर जीवन में आगे बढ़ गए। हर्ष भी इनमें शामिल थे। लेकिन उनके लिए आगे बढ़ने का मतलब कुछ और था। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें देश की एक नामी ऑटोमोबाइल कंपनी में सात लाख रुपए सालाना के पैकेज पर पहली नौकरी (प्लेसमेंट) मिली थी, लेकिन आठ माह बाद उन्होंने वह नौकरी छोड़ अधूरे मिशन को पूरा करने का प्रण ले लिया। उस मुहिम को पुनः सक्रिय किया। नए-पुराने छात्रों को जोड़ा। पूरी कार्ययोजना बनाई और काम को अंजाम देने में जुट गए। नौकरी छोड़ने के फैसले से उनके अभिभावक हैरान थे, लेकिन हर्ष के जज्बे को देख अब वे भी उनके मिशन को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग कर रहे हैं। सैकड़ों इंजीनियरिंग छात्रों सहित पटियाला के सैकड़ों स्वयंसेवी इस मुहिम से जुड़ गए हैं।

चलाते हैं ऐंटी बेगिंग ड्राइव-
ये छात्र और स्वयंसेवी शहर के विभिन्न बाजारों-चौराहों पर पहुंच लोगों को भीख न देने की सीख देते हैं। उन्हें भिक्षावृत्ति के खिलाफ जागरूक करते हैं। लोगों को समझाते हैं कि भीख देने का मतलब दान करना नहीं बल्कि उस व्यक्ति को और भी कमजोर बनाना है, जिसे आप भीख देकर प्रोत्साहित कर रहे हैं। यदि आप उसे शिक्षा या रोजगार के लिए प्रेरित कर सकें और इसके लिए उसकी कुछ मदद कर सकें तो बेहतर होगा।

संवर रहीं जिंदगियां –
संस्था का प्रयास रंग ला रहा है और जिंदगियां संवरने लगी हैं। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ भीख मांगने को मजबूर हुए करीब 20 बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ा गया है। इनमें से एक लड़की संध्या अब दसवीं कक्षा में और सेम्युएल नौंवी कक्षा में पढ़ रहा है। अन्य 18 बच्चों की बेसिक तैयारी कराई जा रही है, जिन्हें अप्रैल से स्कूल भेजा जाएगा। हर्ष ने बताया कि इन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संगीत, नृत्य व चित्रकला में भी निपुण बनाया जा रहा है। समय-समय पर विभिन्ना समारोहों में उन्हें अपनेहुनर को प्रस्तुत करने का मौका दिलाया जाता है। प्रोत्साहन, पुरस्कार और प्रशंसा मिलने पर वे इन अभिरुचियों और पढ़ाई में मन लगाकर आगे बढ़ रहे हैं। इनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान लौट आया है। अब ये जीवन में कभी भी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहेंगे। हर्ष ने बताया कि कुष्ठ आश्रम में रहने वाले कुछ कुष्ठ रोगियों को भी भिक्षावृत्ति से रोकने में सफलता मिली है। उनके बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार से आर्थिक सहायता मुहैया करा उन्हें भीख मांगने से रोका है।

अब बेटे को आइटीआइ में पढ़ा रहा दर्शन-
दिव्यांग दर्शन (हाथों से लाचार) व उसकी पत्नी सुमित्रो, जिसकी दोनों टांगे पोलियोग्रस्त हैं, भीख मांगने को मजबूर थे। इन्हें थापर कॉलेज के पास ही एक रेहड़ी लगवा दी गई है, जिस पर वे भेलपूरी, चाट आदि बेच कर गुजर-बसर खुद करने लगे हैं। बेटे को आइटीआइ में पढ़ा रहे हैं।

अब भीख नहीं मांगता गणेश-
दिव्यांग गणेश, जिसकी एक टांग नहीं है, पहले खिलौने बेच कर गुजर करता था, लेकिन बेटी की शादी पर उसने सारी जमा-पूंजी लगा दी। हालात इतने बिगड़े कि भीख मांगने पर मजबूर हो गया। हर हाथ कलम के सदस्यों ने उससे बात की तो उसने पुनः खिलौने बेचने की इच्छा जताई। चार हजार रुपए के खिलौनों का बंदोबस्त कर उसका काम शुरू करवा दिया गया। अब गणेश भीख मांगने को मजबूर नहीं रहा। हर्ष कहते हैं कि सभी लोग इस काम में सहयोग कर रहे हैं।

 

NEWS IN English

Jalandhar: The youth left their jobs to enable beggars

Jalandhar. Everyone has seen the children begging children on the roads. Everybody pauses a few coins in their hands, but after understanding their problems, taking the bowl with their hands, is the initiative to stop the pen. Harsh Kothari, living in Jalandhar. Harsh left the job of lakhs of jobs to teach these children and every hand made the organization named Kalam. Their mobilized people came and the caravan grew.

The front was golden career-
With the aim of stopping pen in every hand, some students of Thapar Engineering College of Patiala had launched a campaign in July 2014. The slogan was: Remove the begging, save the country. These engineering students went ahead in their studies after completing their studies. Harsh was also involved in this. But moving forward for them meant something else. After completing the engineering of electrical engineering, he got his first job (placement) on a package of seven lakh rupees annually in a renowned automobile company, but after eight months he took the job of completing the job of leaving an incomplete mission. Reactivated that campaign Added new-age students. Completed the plan of action plan and got ready to do the work. His parents were surprised by the decision to quit, but seeing Harsh’s zeal, he is now fully cooperating with his mission. Hundreds of volunteers from Patiala, including hundreds of engineering students, have joined this campaign.

Run Anty Beging Drive-
These students and volunteers reach out to various markets and intersections of the city, teach them not to beg. They make them aware of begging. Explain to people that begging is not meant to donate, but to make the person more vulnerable, which you are encouraging by begging. If you can motivate him for education or employment and if he can help some of his help, then it will be better.

Living lives –
The organization’s effort is bringing color and life has started to grow. Due to financial constraints, about 20 children, who have been forced to leave studies, have been re-attached to education. One of these girls Sandhya is now studying in Class X and Samuul Ninth Class. Basic preparations are being done for other 18 children who will be sent from school to April. Harsh said that these children are being trained in music, dance and painting along with studies. From time to time, he is given an opportunity to present his misdeeds in different festivals. Incentives, prizes and accolades, they are moving forward in these interests and studies. Confidence and self-esteem have returned. Now they will never want to spread hands in front of anyone in life. Harsh told that some leprosy patients living in the leprosy ashram have also been successful in preventing beggary. Provided financial support from the government for their children’s education, they have stopped begging them.

Now the son is studying at ITI-
Divyaung Darshan (helpless hand) and his wife Sumitro, whose both legs were poliographers, were forced to beg. They have been given a rehearsa near Thapar College, on which they have begun to go by themselves by selling bhelpuri, chaat etc. The son is studying at the ITI.

Now do not beg the beggar Ganesh-
Divyang Ganesh, who does not have a leg, first used to go through toys, but on the daughter’s wedding, she put all the deposits. The situation was so disturbed that they were forced to beg. When every member of the hand paused to talk to him, he expressed his desire to sell toys again. The work of four thousand rupees was arranged and its work was started. Now Ganesh is not forced to beg Harsh says that all people are cooperating in this work.

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