जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के आरक्षण SC वर्ग को होने के लिहाज से कुरुक्षेत्र बना क्षेत्र क्रमांक 11

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जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के आरक्षण SC वर्ग को होने के लिहाज से कुरुक्षेत्र बना क्षेत्र क्रमांक 11


जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहे पंचायत चुनाव की सरगर्मी अब सर चढ़कर बोल रही है। बीते दिवस नाम वापसी उपरांत चुनाव चिन्ह के आवंटन होने के बाद अब उम्मीदवार अपने-अपने पक्ष में मतदाताओं के करीबी पहुंचने लगे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अपनी एक विशेष रणनीति के तहत प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए विरोधी प्रत्याशियों का समर्थन भी अपने पक्ष में जुटाने की कवायद में लग चुके हैं। आज इसी कड़ी में एक बड़ी सफलता भाजपा को उस समय मिल गई कि जब यहां से चुनाव लड़ रही विमला करण डेहरिया ने भाजपा की रीति नीति से प्रभावित होकर अपना समर्थन भाजपा उम्मीदवार कांता पंचम आम्रवंशी के पक्ष में दे दिया।

गौरतलब है कि जिला पंचायत का क्षेत्र क्रमांक 11 अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष पद भी इसी वर्ग से आरक्षित होने के बाद यहां का चुनाव खासा महत्वपूर्ण हो चला है। बस यही कारण है कि इस पंचायत चुनाव के महाभारत का यह क्षेत्र कुरुक्षेत्र के रूप में बहुचर्चित हो गया है। आज भाजपा ने अपने अधिकृत उम्मीदवार कांता आम्रवंशी के समर्थन में विमला करन डेहरिया का समर्थन जुटाकर इस बहुप्रतिष्ठित लड़ाई में अग्रता हासिल कर ली है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस दौड़ में अब पिछड़ती नजर आ रही है।

कांग्रेस में बगावत, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अंगूरी नागवंशी और सुधा विनोद बंसे ने कांग्रेस को दिखाया आईना

जहां एक और भाजपा अपने प्रत्याशी के पक्ष में विरोधी खेमे के प्रत्याशियों से समर्थन हासिल कर रही है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस अहम और प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबले में पिछड़ती नजर आ रही है।

यहां पर उसकी पूर्व सफल उम्मीदवार रही अंगूरी नागवंशी ने बगावत करते हुए चुनाव मैदान में खुद को झोंक डाला है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ऊर्जावान युवा नेता विनोद बंसे की पत्नी सुधा बंसे भी यहां किस्मत आजमा रही है। इन दोनों ही उम्मीदवारों के कारण कांग्रेस की अपेक्षाकृत कमज़ोर प्रत्याशी जानकी खरे प्रारंभ से ही दौड़ में पिछड़ गई है। वैसे भी जानकी खरे को अपने पिछले चुनाव में करारी हार का मुँह देखना पड़ा था। वर्तमान हालात को देखकर यह स्पष्ट हो रहा है कि इस बार फिर इतिहास स्वयं को दोहराने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।

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