मार्च से मिल सकती है रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन नामांतरण की सुविधा,मर्ज होगा ई-पंजीयन और भू-अभिलेख का आरसीएमएस

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मार्च से मिल सकती है रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन नामांतरण की सुविधा,मर्ज होगा ई-पंजीयन और भू-अभिलेख का आरसीएमएस

भोपाल। रजिस्ट्री की प्रक्रिया होते ही नामांतरण की प्रक्रिया ऑनलाइन करने को लेकर सोमवार को राजस्व विभाग और पंजीयन कार्यालय के अधिकारियों की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में दोनों विभागों के साफ्टवेयर को मर्ज कर रही कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया ऑटोमेटिक रहेगी। जैसे ही रजिस्ट्री होगी, वैसे ही संबंधित क्षेत्र के राजस्व विभाग के तहसीलदार को ऑनलाइन आरसीएमएस साफ्टवेयर के माध्यम से सूचना पहुंच जाएगी। वह पोर्टल पर नामांतरण प्रकरण दर्ज कर तारीख तय करेगा। एसएमएस से खरीददार और बेचने वाले को नामांतरण प्रक्रिया पूरी कराने की तारीख की जानकारी मिलेगी। यह प्रक्रिया अविवादित नामांतरणों के लिए होगी। विवादित नामांतरण प्रकरणों में आपत्तिकर्ता अपनी आपत्ति भी ऑनलाइन ही दर्ज करा सकेगा।

दरअसल, प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में धोखाधड़ी रोकने के लिए अब रजिस्ट्री कराने के साथ ही प्रॉपर्टी का नामांतरण भी हो जाएगा। यह सुविधा ऑनलाइन होगी। व्यवस्था एक जुलाई से शुरू होना तय है। हालांकि राजस्व विभाग इसे एक मार्च से प्रारंभ करने की योजना बना रहा है। इसके लिए दो साफ्टवेयर संपदा ई-पंजीयन और भू-अभिलेख के आरसीएमएस साफ्टवेयर को मर्ज करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दोनों साफ्टवेयर के मर्ज होते ही पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर दो जिलों मुरैना और शिवपुरी में रजिस्ट्री के साथ-साथ नामांतरण की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।

आरसीएमएस व संपदा ई-पंजीयन साफ्टवेयर को मर्ज करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हमने अपनी तरफ से पूरी तैयारियां कर ली है। महज एक सप्ताह का समय हमें और लग सकता है, इसके बाद सुविधा शुरू हो जाएगी।
कल्पना श्रीवास्तव, महानिरीक्षक पंजीयक मप्र

यह होंगे फायदे
– नामांतरण के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ेगी।
– तय समयसीमा में नामांतरण होगा।
– प्रदेश में सालाना दो लाख से ज्यादा रजिस्ट्रियां होती हैं। इस व्यवस्था से लोगों को बार-बार अफसर के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
– जमीन के मूलभूमि स्वामी की जानकारी राजस्व अफसरों और पंजीयन दफ्तर में उपलब्ध रहेगी।
– मूल व्यक्ति ही जमीन की रजिस्ट्री करा सकेगा, फर्जीवाड़ा या धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।
– स्टाम्प ड्यूटी भी सही वसूली जाएगी।

 

NEWS IN English

March can be facilitated online after registration, merge will be e-registration and RCMS of land records

Bhopal. As soon as the procedure is processed, the meeting of officials of the revenue department and the registration office took place in the ministry on Monday to make the process of transfer process online. In the meeting, the executives of the company, who merged the software of both the departments, said that after registration the process of nomination will be automatic. As soon as the Registry is there, the concerned revenue department of the respective region will receive the information through online RCMS software. He will register the date by entering the transfer case on the portal. SMS will be available to buyers and sellers for the date of completion of the transfer process. This process will be for undisputed nominations. In the disputed episode, the perpetrator will be able to register their objection even online.

Indeed, in order to prevent fraud in the purchase of property, registration will now be done in addition to registering the registry. This facility will be online. The arrangement is scheduled to start from July 1. However, the revenue department is planning to start it from March 1. For this, the process of merging RCMS software of two software assets e-registration and land records is in the final step. As soon as the merge of both the software is being processed, the process of nomination will be started simultaneously along with the registry in the two districts of Morena and Shivpuri, as a pilot project.

The process for merging RCMS and property e-registration software is in the final step. We have done all the preparations from our side. Only a week’s time can take us further, after which the facility will start.
Kalpana Srivastava, Inspector General of Registration, MP

It will be beneficial
– There will be no bribe for nomination.
– The nomination will be settled in the deadline.
There are more than two lakh registries in the state annually. With this arrangement, people will not have to resort to frequent officers.
– The landowner’s land information information will be available in the revenue officers and registration office.
– The original person will be able to register the land, fraud or fraud will be reversed.
Stamp Duty will also be corrected.

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