मुलताई : किसानों को ओलावृष्टि का मुआवजा बांटने मुलताई एसडीएम ने प्रदेश सरकार से मांगे आठ करोड़

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मुलताई : किसानों को ओलावृष्टि का मुआवजा बांटने मुलताई एसडीएम ने प्रदेश सरकार से मांगे आठ करोड़

जय मालवीय
बैतूल/मुलताई। पिछले दिनों क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि के बाद खेतों में सेर्व का काम लगभग पूरा हो चुका है। मुलताई तहसील में 50 गांवों में इस ओलावृष्टि से बुरी तरह से प्रभावित हुई है और 9 हजार खातेदार किसानों की फसले ओलावृष्टि से तबाह हुई है। मुलताई एसडीएम राजेश शाह द्वारा सरकार को रिपोर्ट भेजकर 8 करोड़ रुपए मुआवजा वितरण के लिए मांगे है। एसडीएम ने बताया कि सर्वे के बाद सूची पंचायतों में चस्पा कर दी गई है। गेहू सहित सब्जियों की फसल पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि में बुरह तरह से प्रभावित हुई थी। ओलावृष्टि के बाद गांव-गांव से किसानों ने तहसील आकर फसलों के सर्वे की मांग करते हुए मुआवजा मांगा था। ओलावृष्टि को देखते हुए अधिकारी, नेताओं ने खेतों में जाकर तबाही का मंजर देखा था। किसानों की मांग पर प्रशासन द्वारा खेतों में सवे्र का आदेश किया गया था। खेतों में सर्वे का काम लगभग पूरा हो चुका है एवं आखिरी रिपोर्ट बनाकर पंपंचायतों में चस्पा भी की जा चुकी है। एसडीएम राजेश शाह ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है और मुआवजा वितरण के लिए सरकार से आठ करोड़ रुपए की मांग की गई है। राशि आते ही मुआवजा की राशि प्रभावित किसानों के खातों में डाली जाएगी। एसडीएम राजेश शाह ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मुलताई क्षेत्र के पिपरिया, बरखेड़, सांवरी, सेमझिरा, टेमझिरा अ, कान्हाखापा, बाबाड़ेगांव, खेड़ी, बरखेड़, घाटबिरोली, चिचखेड़ा, सर्रा, जूनापानी, आमाडोह, धारणी, परमंडल, मोही, हिवरा, डहुआ, बघोली, बुकाखेड़ी, चैनपुर, हतनापुर, बांडियाखापा सहित 50 पंचायतों में ओलो से जमकर तबाही हुई है। उन्होंने बताया कि बरखेड़, पिपरिया सहित आसपास के क्षेत्र में ज्यादा ओले गिरे थे, यहां ज्यादा नुकसानी हुई है।

बीमा अधिकारियों के अते-पते नहीं
फसल बर्बादी के बाद किसानों को आस थी कि बीमा अधिकारी खेतों में आएंगे, लेकिन फसल का बीमा कराने के बाद भी अभी तक बीमा अधिकारियों के अते-पते नहीं है। हर साल किसानों के खातों से फसल बीमा की राशि काट ली जाती है, लेकिन तबाही होने के बाद भी किसानों को बीमा नहीं दिया जाता है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने बताया कि जिन टोल फ्री नंबरों को जारी किया गया था, उन नंबरों पर फोन ही नहीं लग रहा था, जिससे बीमा अधिकारियों को वह तबाही की सच्चाई नहीं बता पाए।

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NEWS IN ENGLISH

Multai: SDM distributing compensation for hailstorm to farmers, demanded eight crore

Jai Malavi
Betul / Multai. In the past, after the hail of the area, the work of the surve of the fields is almost complete. This hail is affected badly in 50 villages in Multai Tehsil and 9 thousand account holders have been devastated by the hail of farmers. Mulatai SDM Rajesh Shah sent the report to the government and asked for a compensation of Rs 8 crore for distribution. SDM said that after the survey the list has been patched in panchayats. Vegetable crops including wheat were badly affected in the recent past. After the hail, farmers from the villages and villages demanded compensation for the survey of the crops and came for compensation. In view of the hailstorm, the officials, the leaders had seen the scourge of destruction in the fields. On the demand of farmers, the order was ordered by the administration in the fields. The work of the survey is almost complete in the fields and the last report has been made in pamphlets. SDM Rajesh Shah told that the survey report has been sent to the government and demand for eight crore rupees has been sought from the government for the payment of compensation. As soon as the amount comes, the amount of compensation will be credited to the affected farmers’ accounts. According to the survey report, according to the survey report, in Pultia, Barkhed, Sawari, Semjira, Temzira A, Kanhakhapa, Babadgaon, Khedi, Barkhed, Ghatbiroli, Chinchheda, Sarra, Junapani, Adadoh, Dharni, Paramandal, Mohi, Hivra, 50 panchayats, including Dahua, Bagoli, Bukakhedi, Chainpur, Hatnapur, Bandiakhapha, have been severely devastated. He told that the adjoining areas, including Barkhed, Pipariya, had much hail fall, there has been a lot of damage.

Not all the addresses of insurance officers
After the crop waste, the farmers were expecting that the insurance officers would come to the fields, but even after insuring the crop, the insurance officers do not have the addresses yet. Every year, the amount of crop insurance is deducted from the accounts of the farmers, but even after the devastation, farmers are not insured, resulting in huge resentment among the farmers. Farmers said that the toll free numbers were not released on the numbers, so that the insurance officials could not tell the truth about the devastation.

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