पारसडोह डेम बनाने काटे जाएंगे 4655 पेड़,दस गुना पौधे लगाने के आदेश,विभाग करेगा इनकी देखभाल

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NEWS IN HINDI

पारसडोह डेम बनाने काटे जाएंगे 4655 पेड़,दस गुना पौधे लगाने के आदेश,विभाग करेगा इनकी देखभाल

जल संसाधन विभाग की मांग पर एडीएम कोर्ट ने दी काटने की अनुमति

विशेष संवाददाता
बैतूल/आठनेर। आठनेर क्षेत्र के पारसडोह में 382.29 करोड़ रुपए की राशि से बन रहे जिले के सबसे बड़े डेम से इस क्षेत्र का जल संकट तो दूर होगा, लेकिन एक दुखद पहलू यह भी है कि डूब क्षेत्र में आ रहे 5 गांवों के 4655 पेड़ कट जाएंगे। डेम का निर्माण तो पूर्व में शुरू हो चुका है, लेकिन डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की कटाई की अनुमति राजस्व विभाग से हाल ही में मिली है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कटने से इस क्षेत्र के पर्यावरण पर खासा असर पड़ेगा। काटे जाने वाले पेड़ों में से 723 तो फलदार पेड़ हैं। पारसडोह में ताप्ती नदी पर 382.29 करोड़ रुपए की लागत से जिले का सबसे बड़ा बांध बन रहा है। इस डेम के लिए भूमिपूजन करने स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आठनेर के बिसनुर गांव पहुंचे थे। डेम का निर्माण तो पिछले कई महीनों से चल रहा है, लेकिन अभी तक डूब क्षेत्र में आने वाली जमीन पर स्थित पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं मिल सकी है। जल संसाधन विभाग ने 18 अप्रैल 2017 को अपर कलेक्टर न्यायालय में अनुमति के लिए आवेदन दिया था। इसका परीक्षण और सुनवाई के बाद इसी महीने यहां से यह अनुमति दे दी गई है। अब एक महीने के भीतर यह पेड़ जमींदोज कर दिए जाएंगे। काटे जाने वाले पेड़ों में से ग्राम गरव्हा के 2089, बोरगांव के 1333, पचधार के 842, नांदकुड़ी के 249 और काजली के 142 पेड़ शामिल हैं। इनमें से 723 फलदार पेड़ हैं वहीं 3932 गैर फलदार पेड़ हैं। अनुमति मिलने के बाद 1 महीने के भीतर इन पेड़ों की कटाई करके वन विभाग को सौंपेगा। वन विभाग इनकी नीलामी करके प्राप्त राशि को शासकीय मद में जमा करवाएगा। जिले का सबसे बड़ा डेम बनने से इस क्षेत्र में पानी तो भरपूर हो जाएगा परंतु एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के काटे जाने से इस क्षेत्र के पर्यावरण पर खासा असर पड़ेगा।

पौधे कहां लगेंगे पता नहीं
पेड़ों को काटे जाने की अनुमति जल संसाधन विभाग को इस शर्त पर दी गई है कि काटे जाने वाले पेड़ों की जगह 10 गुना अधिक पौधे आवेदक विभाग द्वारा लगाए जाएंगे। विभाग को ही इन पौधों का संरक्षण व देखभाल भी करना होगा। अव्वल तो यह वैकल्पिक पौधरोपण कहां हो जाता है, इसका पता ही नहीं चलता है और यदि हो भी तो वह कम से कम इस क्षेत्र में नहीं होगा। ऐसे में वैकल्पिक पौधरोपण होने पर भी इस क्षेत्र को उसका लाभ मिलेगा ही नहीं। ऐसे में इस क्षेत्र के पर्यावरण को संतुलित कर पाना मुश्किल होगा।

विभाग की रिपोर्ट में अंतर
जल संसाधन विभाग ने अपर कलेक्टर न्यायालय में जो आवेदन पेश किया था उसमें जो पेड़ बताए थे उनमें और राजस्व विभाग से जो रिपोर्ट बुलाई गई उनमें पेड़ों की संख्या में काफी अंतर था। जल संसाधन विभाग ने काजली गांव में 34 फलदार और 107 गैर फलदार पेड़ बताए थे। पटवारी से जब प्रतिवेदन बुलवाया गया तो उसने क्रमशः 31 और 111 पेड़ बताए। इसी तरह नांदकुड़ी गांव में जल संसाधन विभाग ने 93 और 174 पेड़ बताए थे। पटवारी प्रतिवेदन में पेड़ों की संख्या क्रमशः 85 और 164 बताई गई। इन्हें ही सही माना गया।

डेम की क्षमता और सिंचाई क्षमता
इस डेम के बनने से अब तक असिंचित पड़ी 9,990 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में फसलें लहलहाने लगेंगी। इसकी क्षमता 46 एमसीएम होगी। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आठनेर, प्रभातपट्टन और बैतूल ब्लॉक के जल संकट से परेशान आधा सैकड़ा गांवों के हजारों लोगों को भरपूर पानी हासिल हो सकेगा। डेम का निर्माण मुख्य रूप से जल आपूर्ति के लिए हो रहा है। इससे आठनेर व प्रभातपट्टन ब्लॉक के 33 और बैतूल ब्लॉक के 23 गांवों में सिंचाई होगी। इसके अलावा डेम से ताप्ती ग्रामीण जल समूह योजना के तहत हर साल 6.10 मिलीयन घन मीटर पानी का आवंटन किया जाएगा। खास बात यह है कि यह पहला ऐसा डेम होगा जहां लगने वाली बिजली कहीं से लेना नहीं पड़ेगा। यहां बिजली निर्माण के लिए 21 करोड़ की लागत से सोलर पैनल लगाने के काम को भी मंजूरी दी गई है। इन सोलर पैनलों से बांध में लगने वाली बिजली का उत्पादन किया जाएगा।

 

NEWS IN English

Parasdoh Dame will be made to make 4655 trees, ten times the planting order, the department will take care of them.

ADM court gives permission for cutting of water resources department

Special correspondent
Betul / Einner The water crisis of this region will be overcome by the largest dam in the district, which is formed from the amount of Rs 382.29 crores in Parsdoh in the area of ​​Amner, but one sad aspect is that 4655 trees of 5 villages coming to the submerged area will be cut. The construction of Dame has already started in the past, but the harvesting of trees in the drowning area has recently been obtained from the revenue department. Together with such a large number of trees, there will be a lot of impact on the environment of this region. Of the trees cut, 723 are fruit trees. The biggest dam in the district is being constructed at Tapti river at Parsodoh at a cost of Rs 382.29 crores. Chief Minister Shivraj Singh Chauhan had arrived in Bisanur village on 8th to do the homework for this DEM. The construction of DEM has been going on for several months, but permission to cut trees on land which is still in the submerged area has not been allowed. The Department of Water Resources had applied for permission in the Additional Collector Court on April 18, 2017. This permission has been given from this month after trial and trial. Now within a month, this tree will be zamindoj. Among the trees cut, 2089 grams of gharha, 1333 of borgaon, 842 of Pachadhar, 249 of nandakudi and 142 trees of kajali are included. Of these, 723 are fruit trees and 3932 are non-fruit trees. After getting permission, after harvesting these trees within one month, they will hand over to the forest department. The Forest Department will make auction of the amount received by the auctioning in the official item. Due to the formation of the largest dam in the district, the water will become abundant in this area, but due to such a large number of trees cut, the area will have a significant impact on the environment.

Do not know where the plants will take
Permission to cut trees is given to the Water Resources Department on condition that 10 times more plants will be planted by the applicant department instead of the cut trees. The department will also have to preserve and care for these plants. The topmost place where this alternative plantation is done is not known and if it does, it will not be at least in this area. In this case, even if there is alternative plantation, this area will not only benefit it. In such a situation it would be difficult to adjust the environment of this region.

Difference in department report
The number of trees in which the water resources department had submitted the report which was introduced in the Additional Collector’s Court and the report of the Department of Revenue was very different. The Water Resources Department had told 34 plants and 107 non-fruit trees in Kajali village. When the report was called from Patwari, he told 31 and 111 trees respectively. Similarly, in the village of Nandakudi, the Water Resources Department had declared 93 and 174 trees. The number of trees in the Patwari report was stated to be 85 and 164 respectively. They were considered right.

DEM capacity and irrigation capacity
With the formation of this Dame, till now, more than 9,990 hectares of irrigated farm land will be spreading crops. Its capacity will be 46 MCM. The biggest advantage will be that thousands of people from hundreds of villages, with difficulty in water crisis of Etherar, Prabhat Patan and Betul block, get plenty of water. Dam is being constructed primarily for water supply. This will be irrigated in Einner and 33 villages of Prabhatpatan block and 23 villages of Betul block. Apart from this, allocation of 6.10 million cubic meters of water will be allocated under the Tapti Rural Water Group Scheme from Dame every year. The special thing is that it will be the first such dame where the electric power will not be taken anywhere. The construction of solar panels has also been approved for the construction of electricity at a cost of Rs. 21 crore. These solar panels will produce electricity in the dam.

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