एक और बैंकिंग स्‍कैम आया सामने, CBI की FIR में 11 आरोपियों में कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद का भी नाम

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एक और बैंकिंग स्‍कैम आया सामने, CBI की FIR में 11 आरोपियों में कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद का भी नाम

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और रोटोमैक के बाद एक और बड़ा घोटाला सामने आया है. ताज़ा घोटाला देश की सबसे बड़ी चीनी मिलों में से एक हापुड़ की सिम्भाऔली शुगर्स लिमिटेड से जुड़ा है. सीबीआई ने हापुड़ की एक शुगर मिल और उसके अधिकारियों के खिलाफ करीब 110 (109.08cr) करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का केस कर्ज किया है.

सीबीआई की एफआईआर में सिंभावली शुगर मिल- हापुड़, गुरमीत सिंह मान- चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, गुरपाल सिंह- डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर, जीएससी- सीईओ, संजय टपरिया- सीएफओ, गुरसिमरन कौर मान- एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर- कमर्शियल, 5 नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है. सीबीआई ने ये मुकदमा ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत पर दर्ज किया है. सीबीआई की एफआईआर में कंपनी के डिप्टी डायरेक्टर और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद गुरपाल सिंह का नाम भी है.

क्‍या है आरोप
आरोप है कि चीनी मिल ने 2012 में 5700 गन्ना किसानों को पैसे देने के नाम पर ओरिएंटल बैंक से 150 करोड़ रुपये का लोन लिया, लेकिन इस पैसे को किसानों को देने की बज़ाय निजी इस्तेमाल में ख़र्च किया. फिर मार्च 2015 में ये लोन एनपीए में बदल गया. उसके बाद भी बैंक ने इस मिल को 109 करोड़ का कॉरपोरेट लोन भी मंज़ूर कर दिया, जो पिछला बक़ाया चुकाने के लिए लिया गया. बाद में लोन की ये रक़म भी एनपीए में बदल गई. क्‍या कहा गया शिकायत में

शिकायत में लिखा गया है कि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने सिंभावली शुगर्स को गन्ना किसानों को ईख की खेती करने के लिए कर्ज देने की मंजूरी दी थी. बीएसई में सूचीबद्ध ये चीनी मिल, शुद्ध चीनी, सफेद चीनी, क्रिस्टल चीनी और विशेष चीनी का उत्पादन करती है. भारतीय रिजर्व बैंक (जुलाई 2011) द्वारा जारी किए गए एक परिपत्र के आधार पर साल 2012 में बैंक ने इस लोन को स्वीकृति दे दी गई.

8 नवंबर, 2011 को कंपनी द्वारा ओबीसी बैंक को एक प्रस्ताव पेश किया गया था. जिसमे कहा गया था कि शुगर मिल ने बैंक को बताया था कि इस लोन से हर किसान एक स्कीम के तहत शुगर मिल से ही अच्छी पैदावार के लिए बीज, उर्वरक और खाद खरीदेगा. शुगर मिल ने 5762 परिवारों की एक सूची बैंक में जमा की. इस लोन की सीमा प्रति किसान 3 लाख रुपये रखी गई और कंपनी कुल निवेश 159 करोड़ रुपये से अधिक नहीं हो सकता था. इस योजना के अनुमोदन के बाद, कंपनी ने किसानों के नाम के साथ उनकी जमीन के दस्तावेज और रिकॉर्ड भी बैंक को मुहैया कराए थे. साथ ही कंपनी को KYC फॉर्म भी जमा करने थे.

25 जनवरी 2012 से 13 मार्च 2012 के दौरान 5762 किसानों को ऋण दे दिया गया और करीब 148.59 करोड़ रुपये का कुल ऋण की राशि का भुगतान किया गया था. पूरे 5762 खाते खोले गए और लोन ट्रांसफर किया गया. लेकिन ये पूरी राशि कुछ दिन बाद वापस कंपनी के एकाउंट में चली गयी और कंपनी ने इसे किसी दूसरे बैंक एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया. हालांकि, करीब 60करोड़ रुपये कंपनी ने किश्तों के जरिये बैंक को लौटा दिए थे लेकिन बाकी 90 करोड़ वापस नही किया गया. जिसका ब्याज लगाकर कुल बकाया करीब 110 करोड़ रुपये का हो गया.

उसके बाद बैंक द्वारा की गई जांच से पता चला (ए) कंपनी ने किसानों के नाम पर गलत केवाईसी प्रमाण पत्र जारी किया. (बी) कंपनी ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के खाते से दूसरे बैंकों को धन हस्तांतरित कर दिया है, इसलिए धनराशि का दुरूपयोग हुआ(सी) प्राप्त ऋण पहले से आपूर्ति की गई गन्ने के बकाया का भुगतान करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. शिकायत में ओबीसी बैंक का कहना है कि एसबीआई की अगुवाई में कई बैंको के समूह द्वारा 110 करोड़ रुपए का कॉरपोरेट लोन कंपनी द्वारा किश्तों का भुगतान न करने के कारण 29 नवंबर 2015 को एनपीए (Non performing assets) में आ गया था.

 

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NEWS IN ENGLISH

Another banking scam came in front, the name of Captain Amarinder Singh’s son-in-law in 11 FIRs in CBI’s FIR

new Delhi. Another major scam has surfaced after Punjab National Bank (PNB) and Rotopmak. Fresh scam is one of the largest sugar mills in the country, connected to Simbhawoli Sugars Limited, Hapur. The CBI has taken a case of cheating of Rs 110 (109.08cr) million rupees against a sugar mills of Hapur and its officials.

In the CBI FIR, Sinbhavali Sugar Mill – Hapur, Gurmeet Singh Mana – Chairman and Managing Director, Gurpal Singh – Deputy Managing Director, GSC – CEO, Sanjay Taparia – CFO, Gursimran Kaur Mana – Executive Director – Commercial, 5 Non Executive Director and others Has filed a case against The CBI filed the lawsuit on the complaint of the Oriental Bank of Commerce. CBI FIR is also named after the Deputy Director of the company and son of Punjab Chief Minister Capt Amarinder Singh, son of Gurpal Singh.

What is the accusation
It is alleged that the sugar mill took a loan of Rs 150 crore from Oriental Bank in the name of giving money to 5700 sugarcane farmers in 2012, but spent the money in the private use of this money to the farmers. Then in March 2015, these loans turned into NPAs. Even after this, the bank also sanctioned a corporate loan of Rs 109 crore to this mill, which was taken to repay the last balance. Later this amount of loan also turned into NPA. What was the complaint

It has been mentioned in the complaint that the Oriental Bank of Commerce had given the irrigation sugar to the sugarcane farmers to provide loans to cultivate reed. These sugar mills, pure sugar, white sugar, crystal sugar and special sugar are listed in the BSE listed. On the basis of a circular issued by the Reserve Bank of India (July 2011), the loan was approved by the bank in the year 2012.

On November 8, 2011, a proposal was submitted to the OBC Bank by the company. It was said that Sugar Mill had told the bank that every farmer from this loan would buy seeds, fertilizers and fertilizers for a good yield from Sugar Mill under a scheme. Sugar Mill deposited a list of 5762 families in the bank. The limit of this loan was Rs 3 lakh per farmer and the company could not exceed the total investment of Rs 159 crore. After the approval of this scheme, the company also provided documents and records of their land along with the names of the farmers to the bank. The company also had to submit a KYC form.

During January 25, 2012, 13 March 2012, 5762 farmers were given loans and total loan amount of about Rs. 148.59 crore was paid. The entire 5762 accounts were opened and the loan was transferred. But the whole amount went back to the company’s account a few days later and the company transferred it to another bank account. However, around 60 crores of rupees were returned to the bank through installments but the remaining 90 crore was not withdrawn. With the interest, the total outstanding amounted to around Rs 110 crore.

After that the investigation by the bank came to know (a) the company issued incorrect KYC certificate on the names of the farmers. (B) The company has transferred money from the account of the Oriental Bank of Commerce to the other banks, hence the misuse of funds was made (C) The loan received was used to pay the arrears of the cane supplied previously. In the complaint, OBC Bank says that due to non-payment of installments by the corporate loan company of Rs. 110 crore by several banks led by SBI, it came in NPA (Non Performing Assets) on November 29, 2015.

 

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