सागर : एमपीपीएससी के लिए विदेश का मतलब सिर्फ पाकिस्तान

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सागर : एमपीपीएससी के लिए विदेश का मतलब सिर्फ पाकिस्तान

सागर। मप्र पब्लिक सर्विस कमीशन (एमपीपीएससी) की नजर में विदेश का मतलब सिर्फ पाकिस्तान ही है, ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि एमपीपीएससी द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट के लिये जारी आवेदन से यह स्पष्ट हो रहा है। आवेदकों से पाकिस्तान तक का एड्रेस पूछ लिया गया है। दरअसल प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर की 2968 पोस्टों के लिये ऑनलाइन आवेदन किये जा रहे हैं। आवेदन में एमपीएससी ने पूछा है कि यदि आवेदक पाकिस्तान का निवासी है तो वह पाकिस्तान का पता दे और भारतीय संघ में प्रवजन की तारीख बताए। आवेदन फॉर्म में पीएससी ने सिर्फ पाकिस्तान को ही फोकस क्यों किया? क्योंकि कई देशों के नागरिक भारतीय संघ में नागरिकता ले चुके हैं। पाकिस्तान की जगह विदेश शब्द का इस्तेमाल भी किया जा सकता था, लेकिन पीएससी ने एड्रेस वाले कॉलम में सिर्फ पाकिस्तान का ही नाम लिखा है, जो आवेदकों की समझ से परे है।

आवेदकों से मांगे कई एड्रेस
पीएससी ने असिस्टेंट प्रोफेसर के आवेदन में आवेदकों से पांच एड्रेस मांगे हैं। सबसे पहले आवेदक के पिता का वर्तमान डाक पता (यदि पिता का स्वर्गवास हो गया हो तो पिछला पता), पिता का स्थाई पता, आवेदक का वर्तमान पता, आवेदक का स्थाई पता, यदि आवेदक पाकिस्तान का निवासी है तो उस देश में पता और भारतीय प्रव्रजन की तारीख की जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही एक कॉलम में लिखा गया है कि यदि आवेदक 21 वर्ष के बाद विदेश (जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है) में एक वर्ष से अधिक रहा हो तो वहां निवास की अवधियों का पूरा ब्यौरा दीजिए।

कई अजीब जानकारियां भी मांगी
पीएससी ने इस बार आवेदन फॉर्म में आवेदकों से जुड़ी कई अजीब जानकारियां मांगी है। पांच-पांच एड्रेस के बाद आवेदकों से उनके मोहल्ले के दो लोगों के नाम भी मांगे गए हैं, जो उन्हें जानते हों। इसके साथ ही आवेदक ने 15 वर्ष की आयु से जिन-जिन संस्थाओं में अध्ययन किया है। उन सभी संस्थाओं में प्रवेश की तारीख, उत्तीर्ण होने की तारीख और शाला या कॉलेज छोड़ने की तारीख तक मांगी गई है। कई आवेदकों का कहना है कि माइग्रेशन एक संस्था से दूसरी संस्था में जमा होने की वजह से उन्हें संस्था छोड़ने की दिनांक याद नहीं है। इससे फॉर्म भरने में काफी परेशानी हो रही है।

 

NEWS IN English

Sagar: Foreign for MPPSC means Pakistan only

sea. In the eyes of the MP Public Service Commission (MPPSC), it is not clear that foreign means is only Pakistan, but it is becoming clear from an application issued by the MPPSC for the post of Assistant Professor. The applicants have been asked for the address from Pakistan. In fact, online applications for Assistant Professor of 2968 posts are being made in the state. In the application, MPSC has asked that if the applicant is a resident of Pakistan then give it the address of Pakistan and tell the date of discharge in the Indian Union. Why did the PSC focus only on Pakistan in the application form? Because citizens of many countries have taken citizenship in the Indian Union. Foreign words could also be used in place of Pakistan, but PSC has written only the name of Pakistan in the address column, which is beyond the understanding of the applicants.

Many applicants demanded from the applicants
PSC has sought five addresses from the applicants in the application of Assistant Professor. First of all the applicant’s father’s current mailing address (If the father has died, the last address, father’s permanent address, current address of the applicant, permanent address of the applicant, if applicant is a resident of Pakistan then address and Indian Information for the date of migration has been sought. In addition, a column has been written that if the applicant has been abroad for more than a year after 21 years abroad (including Pakistan), then give full details of periods of stay there.

Many strange information also sought
PSC has asked for some strange information related to the applicants this time in the application form. After five-five addresses, applicants have also been asked to name the two people of their neighborhood, who they know. With this, the applicants who have studied in the institutions since the age of 15 All those institutions have been asked for the date of admission, the date of passing and the date of leave or leave of college. Many applicants say that because of the accumulation of migration from one institution to another, they do not remember the date of leaving the institution. There is a lot of difficulty in filling the form with this.

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