सारनी : बंद होती खदान ने ऐसे दिखाया दम की वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड पाथाखेड़ा अधिकारी रह गए हैरान

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सारनी : बंद होती खदान ने ऐसे दिखाया दम की वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड पाथाखेड़ा अधिकारी रह गए हैरान

प्रमोद गुप्ता
बैतूल/सारनी। वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड पाथाखेड़ा की बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी शोभापुर खदान ने रेजिंग में क्षेत्र की सबसे बड़ी खदान तवा को उत्पादन में पछाड़ दिया है। बताया जाता 31 मार्च तक पाथाखेड़ा क्षेत्र की भूमिगत खदानों से लगभग 28 लाख मेट्रिक टन कोयले का उत्पादन किया जाना है। और इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए क्षेत्रीय महाप्रबंधक के माध्यम से लगातार क्षेत्र की भूमिगत खदानों पर दबाव बनाकर उत्पादन लेने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी शोभापुर माइंस में वर्तमान समय में 5,00 कर्मचारी कार्यरत हैं। और इन 5,00 कर्मचारियों के माध्यम से 6,00 मेट्रिक टन कोयले की रेजिंग ( कम समय मे ज्यादा उत्पादन ) की जा रही है। जबकि क्षेत्र की सबसे बड़ी तवा खदान में वर्तमान समय में दो हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। लेकिन वहां पर कोयले की रेजीग केवल 500 मेटरीक टन हो पा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी शोभापुर खदान बंद होने के पूर्व भी अपनी पूरी ताकत लगाने में जुटी हुई है।

सात वर्ष तक बढ़ सकती है शोभापुर खदान की आयु
सन 1972 में शुरू हुई कोयले की खदान शोभापुर को कभी भी बंद करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इसी बीच पाथाखेड़ा क्षेत्र के अधिकारियों के माध्यम से एक शिक्षण की खोज की है। जो इस स्कीम के तहत चलेगी यदि सब कुछ ठीक रहा। तो यह खदान की आयु 7 वर्ष और बढ़ने की संभावना बनी हुई है । यदि अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए तो मार्च 2019 तक यह खदान बंद हो जाएगी। हालांकि बंद होने की पूर्वी यह शोभापुर खदान क्षेत्र की सभी कोयला खदानों को पछाड़ने में जुटी हुई है ।

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NEWS IN ENGLISH

Sarni: Closed mine has shown that the Western Coalfield Limited Pathakheda Officer was left surprised

Pramod Gupta
Betul / Sarani Shobhapur mine, which reached the verge of closure of Western Coalfield Limited, Patkheda, has overturned the largest quarry of the field in production in the field. It is reported that by March 31, about 28 lakh metric tonnes of coal is to be produced from underground mines of the Pathkhheda area. And to fulfill this goal, efforts are being made to make production through constant pressure of the field’s underground mines through the Regional General Manager. At Sobhapur Mines, which reached the verge of closure, at present 5,00 employees are employed. And through these 5,00 employees, 6,00 metric tons of coal (more production is being made in less time) is being done. Whereas, in the largest pond mine of the region, more than two thousand employees are employed in the present time. But there is only one 500 mt of RAJig coal being there. It can be estimated from the fact that Shobhapur, which reached the verge of closure, is engaged in putting its full strength even before closing the mine.

Age of Shobhapur mine may increase for seven years
The possibility of closure of the coal mine, which started in 1972, can never be ruled out. But in the meantime, a teaching was discovered through officials of Patkhheda area. If all goes well under the scheme then everything is fine. So this quarry is likely to increase the age of 7 years. If the officials raised their hands, then the mine will be closed till March 2019. Although the closure of this, Shobrapur mine is trying to overtake all the coal mines in the area.

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