SBI और PNB ने डाला रंग में भंग, कर्ज महंगे

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SBI और PNB ने डाला रंग में भंग, कर्ज महंगे

नई दिल्ली। देश के दो बड़े बैंकों ने होली के रंग में भंग डाल दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने कर्ज की दरें बढ़ा दी हैं। इससे अब होम लोन, ऑटो लोन, एजूकेशन लोन समेत कई तरह के कर्ज महंगे हो गए हैं। एसबीआई ने कर्ज की दरें 0.20 फीसद तक बढ़ाई हैं। जबकि पीएनबी ने कर्ज पर ब्याज 0.15 फीसद बढ़ाया है। उसने जमा पर भी ब्याज दर 0.45 फीसद तक बढ़ाने का फैसला किया है।

एसबीआई ने गुरुवार को एक वर्ष की अवधि के एमसीएलआर (मार्जिनल लागत आधारित कर्ज की दर) 7.95 फीसद से बढ़ाकर 8.15 फीसद करने का एलान किया है। बैंक ने करीब पौने दो साल बाद कर्ज की ब्याज दर बढ़ाई है। इससे पहले अप्रैल 2016 में कर्ज महंगा किया है। अल्पावधि वाले कर्ज की दरें एक साल के एमसीएलआर पर ही तय की जाती हैं।

एसबीआई ने एक दिन पहले ही हर तरह की सावधि जमा की ब्याज दरें बढ़ाई थीं। एक महीने पहले उसने बल्क जमा दरें बढ़ाई थीं, तभी यह कयास लगाया गया था कि कर्ज के महंगे होने के आसार हैं। इस बात की संभावना है कि एसबीआई के बाद अब दूसरे बैंक भी कर्ज की दरों को बढ़ाएंगे। पीएनबी ने एक साल का एमसीएलआर यानी कर्ज की ब्याज दर 0.15 फीसद बढ़ाकर 8.30 फीसद की है।

नई दर तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। उसने हर तरह की जमा स्कीमों पर ब्याज की दरों को बढ़ाने का एलान किया है। पीएनबी ने जमा दरों में 0.10 फीसद से 0.45 फीसद तक की बढ़ोतरी की है। जमा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंक ने उत्तम फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम के नाम से एक नई योजना भी लांच की है जिसमें ग्राहकों को 0.5 से 0.10 फीसद ज्यादा ब्याज मिलेगा।

सनद रहे कि आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में भी इस बात के संकेत दिए थे कि आने वाले दिनों में कर्ज महंगे होने के आसार हैं। अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जून, 2018 के बाद से आरबीआई की तरफ से भी कर्ज को महंगा करने के लिए वैधानिक दरें यानी रेपो रेट बढ़ाया जा सकता है।

क्यों बढ़ने लगीं ब्याज दरें
एक के बाद एक बैंकों की तरफ से जमा स्कीमों पर ब्याज दर बढ़ाने का यह भी मतलब है कि इन बैंकों के समक्ष तरलता का संकट है इसलिए वह ज्यादा से ज्यादा जमा राशि जुटाने की कोशिश में हैं। साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि कर्ज लेने वालों की संख्या अब बढ़ने लगी है। यह अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी खबर है।

 

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NEWS IN ENGLISH

SBI and PNB dissolve in color, debt expensive

new Delhi. The country’s two big banks have dissolved in the color of Holi. State Bank of India (SBI) and Punjab National Bank (PNB) have increased rates of loans. Now, many types of loans, including home loans, auto loans, education loans, have become expensive. SBI has increased loan rates by 0.20 percent. Whereas PNB has increased the interest on loan by 0.15%. He has also decided to increase the interest rate on deposits up to 0.45 percent.

SBI has announced to increase the MCLR (marginal cost-based debt rate) of one-year period from 7.95 percent to 8.15 percent on Thursday. The bank has increased the interest rate of loan nearly two and a half years later. Earlier, in April 2016, the loan was expensive. Short term loan rates are decided on one year MCLR only.

SBI had raised interest rates on all types of fixed deposits a day earlier. One month ago, he had increased the bulk deposit rates, then it was conceived that debt was expected to be expensive. There is a possibility that after SBI, another bank will now increase the rates of loans. PNB has increased the interest rate of one year MCLR i.e., the loan rate of 0.15 percent to 8.30 percent.

The new rate has been implemented with immediate effect. He has announced to increase rates of interest on all types of deposit schemes. PNB has increased the deposit rates from 0.10 per cent to 0.45 per cent. In order to attract deposits, the bank has also launched a new scheme named as “Fixed Fixed Deposit Scheme” in which customers will get 0.5 to 0.10 per cent interest.

It is a compliment that the RBI had also indicated in its monetary policy review that loans are expected to be expensive in the days to come. It is now being speculated that since the end of June, 2018, the repo rate can be increased by the RBI to make the loan expensive.

Why interest rates rise
Increasing the interest rate on one side of the deposit schemes from banks also means that these banks have a liquidity crisis, so they are trying to raise more and more deposits. It also shows that the number of borrowers has increased now. This is a good news for the economy.

 

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