विधायक सुनील उइके और कांग्रेस पदाधिकारियो की आपत्ति से रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन पत्रों की जांच में रद्द नामांकन पत्र का फैसला पलटा

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विधायक सुनील उइके और कांग्रेस पदाधिकारियो की आपत्ति से रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन पत्रों की जांच में रद्द नामांकन पत्र का फैसला पलटा

आदिवासी समाज के अधिकार लिए एक बार फिर संवेदनशील विधायक ने सम्हाला मोर्चा

रंग लाई कांग्रेस की पहल


जुन्नारदेव, (दुर्गेश डेहरिया)। क्षेत्र के संवेदनशील विधायक सुनील उइके और कांग्रेस पदाधिकारियो ने एक बार फिर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बतौर जनपद सदस्य उम्मीदवार बने सात अभ्यर्थियों को उनके चुनाव लड़ने का अधिकार दिलाकर अनुसूचित वर्ग के उम्मीदवारों का दिल जीत लिया है। मंगलवार जुन्नारदेव विकासखण्ड की रिटर्निंग ऑफिसर रेखा देशमुख को कांग्रेस की कड़ी आपत्ति के बाद खुद के फैसले को बदलना पड़ा और नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा (स्क्रूटनी) के दौरान रदद् किए गए सात उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को बहाल करना पड़ा।

मंगलवार नामनिर्देशन पत्रों की संवीक्षा के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर रेखा देशमुख ने जुन्नारदेव जनपद की 23 सीटों के लिए बतौर जनपद सदस्य नाम निर्देशन पत्र भरने वाले अनुसूचित वर्ग के सात अभ्यर्थियों के फार्म्स मामूली सी त्रुटियों के चलते रदद् कर दिए थे जबकि चुनाव आयोग के इस संबंध में साफ निर्देश है कि मामूली त्रुटियों में सुधार करवाकर उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए। मंगलवार शाम तक जब यह खबर सुर्खी बनी की कुछ उम्मीदवारों के सपनो पर मामूली सी त्रुटि के चलते पानी फिर रहा है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधायक सुनील उइके और घनश्याम तिवारी ,विनोद निरापुरे ,छोटू पाठक तथा,नीटू गांधी जैसे जुझारू कांग्रेस पदाधिकारियों ने उम्मीदवारों के नाम निर्देशन पत्रों के रदद् किए जाने की मामूली सी वजहों पर कड़ी आपत्ति ली।

विधायक अपने साथियों के साथ अनुसूचित वर्ग के उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए जिले के निर्वाचन अधिकारी तक पहुँचे। उन्हें जनपद पंचायत के उम्मीदवारों के फार्म रिजेक्ट किए जाने की मामूली वजहें बताई गई साथ ही चुनाव आयोग के उन निर्देशो का हवाला भी दिया गया जिसमें साफ तौर पर आयोग ने निर्देशित किया कि मामूली त्रुटियों के चलते किसी को चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नही किया जाए बल्कि उसमे सुधार कर उसे जनता के बीच जाने का मौका दिया जाए। विधायक तथा कांग्रेस ने अपनी आपत्ति में साफ कहा कि यह अनुसूचित वर्ग के उम्मीदवारों को जनता दरबार मे जाने से रोकने का कुत्सित प्रयास है।

विरोधी दल के स्थानीय नेताओं का जनपद पंचायत कब्जाने का यह शार्ट फार्मूला है। जिसका विरोध करते है। ऊपर तक पहुँची आपत्तियों के बाद पता चला है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को आयोग के निर्देश बेहतर तरीके से समझाए गए और इस तरह मामूली सी त्रुटियों के कारण चुनाव से वंचित हो रहे सात उम्मीदवारों को चुनावी समर में जनता के बीच जाने का मौका मिला।

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