शाहपुर : जंगल छोड़ गांव में पहुंचा बाघ,ग्रामीणों ने की दहाड़ सुने जाने की पुष्टि,पद चिन्हों की जांच में जुटा वन विभाग

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NEWS IN HINDI

शाहपुर : जंगल छोड़ गांव में पहुंचा बाघ,ग्रामीणों ने की दहाड़ सुने जाने की पुष्टि,पद चिन्हों की जांच में जुटा वन विभाग

आशीष राठौर
बैतूल/शाहपुर। शाहपुर और घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के दर्जनों गांवों में पिछले एक पखवाड़े से बाघ की भारी दहशत है। कई स्थानों पर इसके पदचि- देखे गए हैं। यह बाघ अभी तक 2 मवेशियों का शिकार कर चुका है। बाघ की मौजूदगी से दहशतजदां ग्रामीण जंगल की ओर जाने से डर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार सतपुड़ा टाईगर रिजर्व या बोरी अभ्यारण्य का एक बाघ पिछले कुछ से दिनों जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में चहलकदमी कर रहा है। बताते हैं कि घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के मनकाढाना, मड़काढाना, कुंडीखेड़ा गांव और असीरगढ़ के जंगल में लगातार उसकी उपस्थिति बनी हुई है। यह बाघ अभी तक 2 मवेशियों का शिकार कर चुका है। इनमें से एक मड़काढाना के किसन धुर्वे का बैल और कुंडीखेड़ा के शिवचरण यादव की भैंस शामिल हैं। कुछ ग्रामीणों का तो कहना है कि उन्होंने बाघ की दहाड़ भी सुनी है। वन विभाग के चौकीदार महेश पटेल और मनकाढाना के सुकाली भूसमकर के मुताबिक उन्होंने बाघ की दहाड़ भी सुनी है। वे 15-20 दिनों से लगातार दहाड़ सुनने और पांव के निशान देखने का दावा करते हैं। बाघ के आने की जानकारी मिलने पर पिछले दिनों ग्रामीण सामूहिक रूप से असीरगढ़ के किले और उसके आसपास के क्षेत्र में पहुंचे तो वहां उन्होंने पगचिन्ह भी पाए हैं। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को भी बाघ की मौजूदगी और मवेशियों को मारे जाने की सूचना दी गई है। इसे देखते हुए वन विभाग द्वारा भी पगचिन्हों का परीक्षण कराया जा रहा है। इसके साथ ही उस क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग द्वारा मृत मवेशियों के एवज में नियमानुसार मुआवजा भी मवेशी मालिकों को दिया जा रहा है। प्रति मवेशी 3500 रुपए का मुआवजा दिए जाने की कार्यवाही वन विभाग द्वारा की जा रही है।

नहीं जा पा रहे जंगल
जंगल में बाघ की मौजूदगी के मद्देनजर ग्रामीणों में खासी दहशत है। केवल इन 3-4 गांवों में ही नहीं बल्कि क्षेत्र के दर्जनों ग्रामों के लोग इस कदर आतंकित हैं कि वे दिन में भी जंगल में नहीं जा पा रहे हैं और न अपने मवेशी ही छोड़ रहे हैं। शाम होते ही अपने घरों से भी बाहर निकलने में वे डर रहे हैं। उनके अनुसार जब तक इस क्षेत्र से बाघ बिदा नहीं होता है, तब तक वे खुद को सुरक्षित नहीं समझ सकते हैं।

रतजगा करने मजबूर

बाघ की दहशत का आलम यह है कि ग्रामीण सामूहिक रूप से रतजगा कर रहे हैं। टोलियों में ग्रामीण जागते हुए इस बात पर नजर रखे रहते हैं कि यदि रात में मवेशी की तलाश में बाघ गांव की ओर आ जाए तो उसका मुकाबला किया जा सके। सुरक्षा के लिए एहतियात के तौर पर वे अपने साथ लाठियां और अन्य हथियार भी रख रहे हैं। बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की दिनचर्या खासी प्रभावित की है।

कोर एरिया में कई गांव
सतपुड़ा टाईगर रिजर्व ओर बोरी अभ्यारण्य वैसे तो होशंगाबाद जिले में हैं, लेकिन इसका कोर एरिया जिले की सीमा के भीतर तक आता है और इसके दायरे में कई गांव हैं। संभावना जताई जा रही है कि इन्हीं दोनों में से किसी एक से यह बाघ विचरण करते हुए इस क्षेत्र में आ गया है। यह कभी इधर तो कभी छिंदवाड़ा जिले में अक्सर पहुंच जाता है। इसके अलावा मेलघाट टाईगर रिजर्व का भी यह बाघ हो सकता है।

संशय में वन अधिकारी
जिले में बाघ की आमद के चलते एक पखवाड़े से वन विभाग के अफसर हैरान हैं। विभागीय अधिकारी यह तो स्वीकार कर रहे हैं कि ग्रामीण जो बता रहे हैं वह शत-प्रतिशत सही है, लेकिन अपने क्षेत्र को छोड़ कर बाघ आखिर बाहर क्यों आ गया यह बेहद चिंता का विषय है। वन विभाग बाघ के द्वारा 2 मवेशियों का शिकार किए जाने को लेकर बेहद संशय में हैं। बाघ रहवासी क्षेत्र में आकर आमतौर पर पालतू मवेशियों को शिकार नहीं बनाते हैं जिससे वन अधिकारी हैरत में हैं। एसडीओ द्वारा लिए गए पगमार्क का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके बाद ही अफसर किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।

इनका कहना है।
विगत 23 दिसंबर को एक बैल के मारे जाने की घटना जानकारी में आई है। पदचिन्हों को जांच में लिया गया है। उस क्षेत्र में विभाग द्वारा निगरानी बढ़ा दी गई है। मृत मवेशी के बदले मुआवजा दिया जा रहा है।
एमएल सोलंकी, एसडीओ, वन विभाग, शाहपुर

 

NEWS IN English

Shahpur: The tiger reached the village leaving the forest, confirming the roar of the villagers, the forest department in the investigation of the post marks

Ashish Rathore
Betul / Shahpur In the dozens of villages of Shahpur and Ghoradongri block, there is a tremendous panic of tigers from the last fortnight. Its footprints have been seen in many places. This tiger has already hunted two cattle. With the presence of tigers, terrorists are scared of going towards the rural forest. According to the information received, a tiger of Satpura Tiger Reserve or Bori Reserve is walking past the district from the last few days. Says that Ghoradongri block has consistently been in presence of Manakdhana, Madkadana, Kundikhada village and Asirigad forest. This tiger has already hunted two cattle. One of them includes the bull of Kisan Dhurve and the buffalo of Shiv Charan Yadav of Kundikheda. Some villagers have to say that they have also listened to the tiger’s roar. According to forest department’s watchman Mahesh Patel and Sukali Bhusomkar of Mankadhana, he has also heard the tiger’s roar. They claim to hear roar continuously for 15-20 days and see footprints. On receiving information about the coming of the tiger, the villagers arrived in the fort of Asirigarh and in the surrounding areas, they had also found a sign of the past. The forest department has also been informed about the presence of tigers and killing cattle. In view of this, the forest department is also conducting trials of the pug identities. Along with this, surveillance has been increased in that area. In lieu of the cattle laid by the Forest Department, the compensation is also given to cattle owners according to the rules. Proceeding of compensation of Rs 3500 per cattle is being done by the Forest Department.

Jungle can not go
In view of the presence of tigers in the forest there is a lot of panic in the villagers. Not only in these 3-4 villages, but the people of dozens of villages are so scared that they are not able to enter the jungle even in the day nor they are leaving their livestock. In the evening, they are scared to get out of their homes too. According to him, till the tiger is not spared from this area, he can not understand himself as safe.

Forced to go

The tragedy of the tiger is that the villagers are doing collectively. Keeping in mind the villagers in the trolley, they keep an eye on the fact that if the tiger approaches the village in search of cattle at night, then it can be fought. As a precaution for safety, they are also carrying sticks and other weapons with them. The presence of the tiger has greatly affected the daily routine of the villagers.

Many villages in the core area
Satpura Tiger Reserve and Bori Reserve are in Hoshangabad district, but its core area comes within the bounds of the district and many of its villages are within its purview. It is being said that this tiger has come into this area by changing the tiger from any of these two. This sometimes goes to Chhindwara district often and often. Apart from this, this tiger may also be the Melghat Tiger Reserve.

Forest officer in doubt
Due to the influx of tigers in the district, the officers of the forest department are shocked by a fortnight. The departmental officials are accepting that what rural people are saying is 100 percent correct, but why the tiger came out after leaving its territory, it is a matter of great concern. Forest department is very skeptical about the hunting of two cattle by the tiger. Tigers usually do not hunt pets in the residential areas, so that the forest officials are shocked. The pagmarks taken by SDOs are being analyzed. After this the officers will reach any conclusions.

They have to say
The incident of the killing of a bull on December 23 came to light. Footprints have been examined. Monitoring has been increased by the department in that area. Compensation for dead cattle is being compensated.
ML Solanki, SDO, Forest Department, Shahpur

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