शंकराचार्य जी को बालाजीपुरम में भाव भीनी श्रद्धाजंलि अर्पित

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शंकराचार्य जी को बालाजीपुरम में भाव भीनी श्रद्धाजंलि अर्पित

गजेंद्र सोनी
बैतूल। कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेन्द सरस्वती के देहावसान पर बालाजीपुरम में भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारत के पांचवें धाम श्री रुक्मणी बालाजी मंदिर बालाजीपुरम में आज बुधवार को शाम 5 बजे भगवान बालाजी के मुख्य मंदिर परिसर के ठीक सामने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें शंकराचार्य जी के चित्र के समक्ष दीपक जलाकर उनका ध्यान किया गया। इसके उपरांत बालाजीपुरम के संस्थापक सेम वर्मा , प्रमुख पुजारी असीम पंडा स्वामी समेत सभी पुजारियों और श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर बालाजीपुरम संस्थापक सेम वर्मा ने कहा कि बालाजीपुरम की प्राणप्रतिष्ठा के समय शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी बैतूल आए थे। इसके बाद भी वे बालाजीपुरम की पूजन-कार्यक्रम आदि में अपना मार्गदर्शन देते रहे हैं। शंकराचार्य सरस्वती जी बालाजीपुरम के मुख्य संरक्षक में से एक थे। उनका देहावसान हम सभी के लिए दुखद है।

बालाजीपुरम के प्रमुख पुजारी असीम पंडा स्वामी ने बताया कि शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी का जन्म 18 जुलाई 1935 को हुआ था। वे दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में काँचीपुरम नगर में स्थित काँची कामकोटि पीठ के 69 वें शंकराचार्य थे। सन् 1983 में उन्होंने शंकर विजयेन्द्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके पहले 22 मार्च 1954 को चंद्रशेखेन्द्ररा सरस्वती स्वामीगल ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। श्रध्दांजलि सभा में सुनील व्दिवेदी, रामेश्वर वर्मा , बंटी वर्मा आदि उपस्थित थे।

 

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NEWS IN ENGLISH

Shankaracharya presented Bhav Bhanei Shraddhangalali in Balajipuram

Gajendra Soni
Betul In the Balajiipuram on the plight of the Shankaracharya Jayende Saraswati of Kanchi Kamkoti Peeth, a homage tribute was presented. In the fifth house of India, Mr. Rukmani Balaji Mandir Balajiipuram was held in the evening just around 5 in the evening, in front of the main temple complex of Lord Balaji, a tribute assembly was organized. In this, the attention was taken by lighting a lamp in front of Shankaracharya’s picture. After this, Balajipuram founder Same Verma, Chief priest and Asim Panda Swami, all priests and devotees paid floral tributes to the devotees.
 
On this occasion, Balajipuram founder, Sam Verma, said that Shankaracharya Jayendra Saraswati ji had come to Betul during the lifetime of Balajiipuram. Even after this, he has been guiding his father’s program in Balajipuram. Shankaracharya Saraswati was one of Balajiipuram’s main patrons. His death is sad for all of us.

Asim Panda Swamy, the chief priest of Balajipuram said that Shankaracharya Jayendra Saraswati was born on July 18, 1935. He was the 69th Shankaracharya of Kanchi Kamkoti Peeth situated in Kanchipuram Nagar in Tamil Nadu state of south India. In 1983, he had declared Shankar Vijayan Saraswati as his successor. Earlier on March 22, 1954 Chandrashekendra Saraswati Swamagal declared him his successor. Sunil Vivedyi, Rameshwar Verma, Bunty Verma etc. were present in the House of worship.

 

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