श्योपुर : सरकारी खर्च पर छोटे से गांव के किसान का बेटा मानसिंह जाएगा ऑस्ट्रेलिया पढ़ने

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श्योपुर : सरकारी खर्च पर छोटे से गांव के किसान का बेटा मानसिंह जाएगा ऑस्ट्रेलिया पढ़ने

श्योपुर। श्योपुर जिले के छोटे से गांव बगडुआ के किसान हरिमोहन जाटव का बेटा मानसिंह पढ़ाई के लिए आस्ट्रेलिया जाएगा। यह पहला मौका है, जिसमें जिले से कोई छात्र विदेश शिक्षा के लिए चयनित होकर सरकारी खर्च पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जा रहा है। इस छात्र की पढ़ाई का पूरा खर्च आदिम जाति कल्याण विभाग उठाएगा। जिसकी सहमति भोपाल के अनुसूचित जनजाति विभाग द्वारा दी जा चुकी है। छात्र की पढ़ाई के लिए करीब 45 लाख रुपए खर्च होंगे, जिसे किश्तों में समय-समय पर आस्ट्रेलिया के बैंक में ट्रांसफर किया जाएगा। छात्र मानसिंह जाटव जो आस्ट्रेलिया के सिडनी शहर स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी में कंप्यूटर कंट्रोलिंग इंजीनियरिंग (मास्टर डिग्री) की पढ़ाई करेगा। अभी तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर बीई कर चुके मानसिंह ने विदेश शिक्षा के तहत पढ़ाई करने के लिए आवेदन किया था। छात्र की उच्च शिक्षा को देखते हुए प्रदेशस्तर से ही उसका चयन किया गया है। इसके 9 लाख 66 हजार 704 रुपए की पहली किश्त आदिम जाति कल्याण विभाग प्रबंधन को भेजे जाने के लिए कहा गया है। यह राशि जल्द ही नेशनल आस्ट्रेलिया बैंक में ट्रांसफर की जाएगी। जुलाई में शिक्षण सत्र शुरू होते ही मानसिंह आस्ट्रेलिया के लिए रवाना होगा।

 

सरकारी स्कूलों ने बना दिया विदेश के लायक
मानसिंह की प्रारंभिक पढ़ाई बगडुआ के सरकारी स्कूल से ही शुरू हुई। श्योपुर उत्कृष्ट स्कूल से 12वीं करने के बाद वह सागर के इंदिरा गांधी कॉलेज से बीई करने पहुंचा। उसके बाद कंप्यूटर कंट्रोलिंग की शिक्षा के लिए आस्ट्रेलिया में ऑनलाइन आवेदन कर दिया। जहां से चयनित होने के बाद मानसिंह ने विदेश उच्च शिक्षा योजना के तहत आवेदन किया था। जिसमें उसका चयन हो गया। इस मौके को लेकर मानसिंह का कहना था कि उन्होंने शुरू से ही सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की है और उन्हीं स्कूलों में मिले ज्ञान की बदौलत वह विदेश शिक्षा के लायक हो पाए हैं।

खड़ा करूंगा कंप्यूटर से जुड़ा बड़ा प्रोजेक्ट
छात्र मानसिंह का कहना है कि वह कंप्यूटर के क्षेत्र में एक बड़ा प्रोजेक्ट तैयार करेगा। यही सोचकर वह विदेश में शिक्षा लेने के लिए जा रहा है। बचपन से ही खेतों में रहने वाले मानसिंह खुद को एक सफल कंम्प्यूटर इंजीनियर के रूप में साबित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि हिन्दुस्तान में कंम्प्यूटर कंट्रोलिंग के क्षेत्र में काम करने की बहुत जरूरत है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिस पर हमारे यहां कम ही ध्यान दिया जाता है लेकिन बढ़ते आईटी के दौर में यह शिक्षा अहम हो गई है।

स्नातक में 60 फीसदी से अधिक अंक होना जरूरी
अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग विदेश उच्च शिक्षा योजना के तहत हर साल करीब 50 बच्चों को चयनित करने के लिए आवेदन मांगता हैं। इसके लिए जुलाई में आवेदन मांगे जाते हैं। आवेदक को आवेदन में ही जिस देश में वह जाना चाहते हैं उसकी च्वॉइस फिल करनी होती है। स्नातक में 60 फीसदी से अधिक अंकों वाले छात्र इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद दिसंबर में विभाग द्वारा छात्रों के इंटरव्यू लिए जाते हैं। मास्टर डिग्री, पीएचडी और रिसर्च के लिए छात्र आवेदन कर सकते हैं।

इनका कहना है
जिले से पहली बार किसी छात्र का चयन विदेश शिक्षा के लिए हुआ है। फीस का पैसा भी आ गया है, जिसे जल्द आस्ट्रेलिया के बैंक में ट्रांसफर किया जाएगा। खास बात ये है यह छात्र एक किसान का बेटा है। जिसकी पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
पीआर दौहरे, प्रभारी सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग श्योपुर

 

NEWS IN English

Sheopur: The son of a small village farmer on government expenditure will be studying Australia

Sheopur Son of Harimohan Jatav, farmer of Baghua, a small village in Sheopur district, will visit Australia for study. This is the first time in which a student from the district is going to be selected for foreign education and to study engineering at government expenditure. The primary welfare department of this student will take up the expenditure. Whose consent has been given by the Scheduled Tribes Department of Bhopal. About 45 lakh rupees will be spent for the student’s studies, which will be transferred from time to time to the Australian bank. Student Mansingh Jatav who will study Computer Controlling Engineering (Master Degree) at University of Technology Sydney, Sydney, Australia. So far, Mansingh, who has studied in government schools, applied for education under foreign education. Looking at the student’s higher education, he has been selected from the state level. The first installment of 9 lakh 66 thousand 704 rupees has been asked to be sent to the Tribal Welfare Department management. This amount will soon be transferred to the National Bank of Australia. As soon as the education session begins in July, Mansingh will leave for Australia.

Government schools have made foreign worth
The initial education of Mansingh started from the Government School of Baghwa. After completing 12th from Sheopur Uttam School, he reached Sagar’s Indira Gandhi College from BE. After that, for online computer education, the online application was made in Australia. After being selected, Mansingh had applied under the Foreign Higher Education Scheme. In which he was selected. On this occasion, Mansingh said that he has studied in government schools from the beginning and due to the knowledge he received in those schools, he has been able to get foreign education.

I will make a big project connected to the computer
Student Mansingh says that he will make a big project in the field of computer With this thinking, he is going to take education abroad. Mansingh, who lives in the fields since childhood, wants to prove himself as a successful computer engineer. He believes that there is a great need to work in the field of computer control in India. This is an area where we are given less attention but in the growing IT era, this education has become important.

Graduation must have more than 60 percent marks
Scheduled Tribes Welfare Department seeks applications to select around 50 children every year under the Foreign Higher Education Scheme. Applications are invited for this in July. Applicants have to fill the queue of the country in which they want to go. Students with more than 60% marks in the graduation can apply under this scheme. After the application, the students are interviewed by the department in December. Students can apply for Master’s degree, PhD and Research.

They say
For the first time, a student has been selected for foreign education. Fee money has also come, which will soon be transferred to the Australian bank. The special thing is this student is the son of a farmer. The government will take full expenditure on its studies.
PR Daurah, Assistant Commissioner, Primary Welfare Department, Sheopur

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