उप्र में अब शहरी क्षेत्र से बाहर होंगे स्लॉटर हाऊस

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उप्र में अब शहरी क्षेत्र से बाहर होंगे स्लॉटर हाऊस

लखनऊ। उप्र के राज्यपाल राम नाईक ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गये तीन अध्यादेशों को अनुमति प्रदान कर दी है। नाईक ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) अध्यादेश 2018, उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश 2018 एवं उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश 2018 को अपनी मंजूरी दी है। सहकारी समिति संशोधन अध्यादेश लागू होने से सहकारी समितियों में निबंधक और प्रबंध निदेशक को व्यापक अधिकार मिल गया है, जबकि अन्य दोनों अध्यादेश के लागू होने से नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र से बाहर स्लाटर हाऊस बनाने का आदेश प्रभावी हो जाएगा।

राजभवन से दी गई जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में राज्य विधान मंडल सत्र न होने और विषय की तात्कालिकता को देखते हुए राज्यपाल ने कैबिनेट के प्रस्ताव को विधिक परीक्षण के बाद अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तर प्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश 2018 और उत्तर प्रदेश नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश 2018 द्वारा पूर्व में अधिनियमित धाराओं को संशोधित कर उसमें से ‘वधशाला’ शब्द निकाल दिया गया है। इसके अलावा और भी कई प्रभावी व्यवस्था की गई है। सरकार ने इस अध्यादेश के जरिये नगर निगम और नगर पालिका परिषदों से बाहर स्लाटर हाऊस बनाने का फैसला किया है।

अब कोई भी व्यक्ति नियमों के तहत निजी रूप से स्लाटर हाऊस चला सकता है। 17 जनवरी को कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। नगर निगम अधिनियम 1959 और नगर पालिका अधिनियम 1916 में संशोधन के तहत स्लाटर हाऊस शहरों से बाहर स्थापित किये जाएंगे। पहले इन अधिनियमों में यह व्यवस्था थी कि नगर निगम और नगर पालिका परिषद स्लाटर हाऊस चलाएंगी, बनाएंगी और उसको नियंत्रित करेंगी। अब नई व्यवस्था में नगर पालिका और नगर निगमों को स्लाटर हाऊस चलाने और बनाने की व्यवस्था से अलग कर दिया गया है। अब कोई भी व्यक्ति नियमों को पूरा कर स्लाटर हाऊस चला सकता है। केंद्र सरकार, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने स्लाटर हाऊस के संदर्भ में पहले से ही गाइड लाइन तय की है। सरकार कानूनी रूप से उसका पालन कराने को प्रतिबद्ध है। पशु वध केवल स्लाटर हाऊस के अंदर ही हो सकेगा।

 

NEWS IN English

Slaughterhouse will now be out of urban area in Upro now

Lucknow. The Governor of UP, Ram Naik has given permission to the three Ordinances sent by the State Government. Naik has given its approval to the Uttar Pradesh Cooperative Committee (Amendment) Ordinance 2018, Uttar Pradesh Municipality (Amendment) Ordinance 2018 and Uttar Pradesh Municipal Corporation (Amendment) Ordinance 2018. With the enactment of the amendment to the Co-operative Committee, the Registrar and Managing Director in the co-operative societies has got extensive rights, while the implementation of the other two Ordinances will be effective from the making of the slater house outside the municipal and municipal area.

According to the information given to Raj Bhavan, considering the state legislative session and the urgency of the subject at the present time, the Governor has given his approval after the legal test has been approved by the cabinet. Modifying the streams enacted in the east by the UP Municipality (Amendment) Ordinance 2018 and Uttar Pradesh Municipal Corporation (Amendment) Ordinance 2018, the word ‘abattoir’ has been removed from it. Apart from this, many more effective arrangements have been made. Through this Ordinance, the Government has decided to make the slater house out of the municipal corporation and municipal councils.

Now anyone can run the slater house privately under the rules. On January 17, the cabinet approved the proposal. Under the amendment in the Municipal Corporation Act 1959 and the Municipality Act 1916, the slater houses will be installed outside the cities. Earlier, in these Acts it was a system that the Municipal Corporation and the Municipal Council will run the slater house and make it govern. Now in the new system, municipalities and municipal corporations have been separated from the system of running and making the slater house. Now anyone can run the slater house by fulfilling the rules. Central Government, NGT and Supreme Court have already set guidelines in respect to the slater house. The government is legally committed to implement it. Animals will be slaughtered only inside the slater house.

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