अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- आदिवासी अंचल में शिक्षा का अलख जगाया ममता वंजारी ने, निखार रहीं हैं बच्चों का भविष्य

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- आदिवासी अंचल में शिक्षा का अलख जगाया ममता वंजारी ने, निखार रहीं हैं बच्चों का भविष्य


छिन्दवाड़ा। जिले के सौंसर एवं पांढुरना तहसील की सीमा पर स्थित, सुदूर आदिवासी ग्रामीण अंचल के ग्राम रझाड़ी पिपला में स्थित, शासकीय हाईस्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती ममता वंजारी की कार्यकुशलता से यहां के छात्र छात्राऍं शिक्षा, शैक्षणिक कार्य के साथ-साथ विभिन्न खेलों, प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में अनेक किर्तिमान स्थापित कर चुके हैं।

मध्यप्रदेश शासन नें सन् 2006 में ममता वंजारी की नियुक्ति शासकीय हाईस्कूल रझाड़ी पिपला में की थी। कई बार यह हाईस्कूल एक शिक्षिका के भरोसे रहने के बावजूद भी शैक्षणिक कार्य के साथ-साथ खेल कूद, विभिन्न क्रियाकलापों एवं प्रतियोगिताओं में सफलताओं के कारण अपनी अलग पहचान बना चुका हैं यह हाईस्कूल।

एक ओर शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा के चलते शहरी क्षेत्रों में महंगी कोचिंग, ट्युशन तथा तगड़ी फीस देकर अपने बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में पढ़ा रहें हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अंचलों के बच्चें कमजोर आर्थिक स्थिति एवं साधनों के अभाव में सरकारी स्कूलों में पढ़ने पर विवश हैं। फिर भी बगैर ट्यूशन की व्यवस्था और पढ़ाई के साथ-साथ खेती किसानी में माता पिता को मदत कर, दूसरे ग्राम के परीक्षा केंद्र में जाकर परीक्षा देकर, शासकीय हाईस्कूल रझाड़ी पिपला के बच्चें बोर्ड परीक्षाओं में अपना परचम लहराते हैं।

पिछले तीन वर्ष का बोर्ड परीक्षा में परीक्षा परिणाम

👉🏻सन् 2019 में 64.5 प्रतिशत परीक्षा फल रहा एवं कु. कल्याणी पराड़कर नें 94.2 % अंक लेकर प्रथम स्थान पर रही तथा अधिकांश छात्र छात्राऍं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई।

👉🏻 सन् 2020 में 92.3 प्रतिशत परीक्षा फल रहा एवं कु. काजोल हिंगवे नें 94.5 % अंक लेकर प्रथम स्थान पर रही। कोई भी छात्र छात्राएं फेल नहीं हुई। अधिकांश छात्र छात्राएं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई।

विगत वर्ष 2021 में कोरोना लॉकडाउन एवं कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत बोर्ड परीक्षाएं निरस्त होकर छः माही प्रीबोर्ड परीक्षा के आधार पर परीक्षा परिणाम घोषित किए गए थे। जिसमें सभी छात्र छात्राऍं उत्तीर्ण हुए थे।

छात्राएं बजाती हैं स्कूल बैंड

इस हाईस्कूल में सन् 2018 में श्रीमती वंजारी द्वारा स्कूल बैंड खरीदा गया तथा 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की प्रभात फेरी में इस ग्रामीण अंचल में पहली बार स्कूल बैंड बजा। इस हाईस्कूल की छात्राओं ने प्रभात फेरी में स्कूल बैंड, बिगुल, बांसुरी, डम्बल क्रिडा, लेझीम नृत्य का सुंदर प्रर्दशन कर क्षेत्र में काफी वाहवाही बटोरी थी।

छात्राओं ने जीता था टेबलेट

विगत वर्ष साइंस रोबोटिक एग्जीबिशन में यहां की छात्राओं का माॅडल प्रथम स्थान पर आने से पूरे जिले में प्रशंसा हुई थी साथ ही छात्राओं को पुरस्कार स्वरुप टेबलेट एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया था।

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शिक्षा अधिकारियों का कहना हैं
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रझाड़ी पिपला हाईस्कूल में पदस्थ प्रिंसिपल श्रीमती वंजारी की कार्यशैली सराहनीय हैं। इनके द्वारा शिक्षा जगत में किए गए कार्य बालिकाओं एवं महिलाओं हेतु प्रेरणादायक हैं।
विजय कुमार धुरड़े, विकास खंड शिक्षा अधिकारी सौंसर
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श्रीमती वंजारी मेडम की कार्यकुशलता से शासकीय हाईस्कूल रझाड़ी पिपला, शैक्षणिक कार्य के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में अव्वल हैं। कोरोना काल में भी श्रीमती वंजारी मेडम को शिक्षा विभाग ने नगर परिषद मोहगांव हवेली दल प्रभारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी थी। जिसे भी उन्होंने कुशल पूर्वक निभाया।
आर. एन. पात्रीकर, पूर्व.विकास खंड शिक्षा अधिकारी सौंसर
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गायत्री के महान् साधक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने 21 वीं सदी नारी सदी कहा हैं, वंजारी मेडम जिसका साक्षात् उदहारण हैं।
योगीराज वानोडे, विकास खंड शिक्षा अधिकारी पांढुरना
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ग्रामवासियों का कहना हैं
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 वंजारी मेडम की कार्यकुशलता से यहां एक अच्छा शैक्षणिक वातावरण निर्मित हुआ हैं।
मोहन घागरे, पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत रझाड़ी पिपला
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जब से वंजारी मेडम यहां पदस्थ हैं तब से इस ग्रामीण क्षेत्र में शैक्षणिक वातावरण बन गया हैं।
बाबुराव सोमकुंवर, सरपंच, ग्राम पंचायत रझाड़ी पिपला
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हमारे गांव की लड़कियों में शिक्षा के प्रति जागरूकता आई हैं। वंजारी मेडम का कार्य प्रशंसनीय हैं।
सुनिता घागरे, पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत रझाड़ी पिपला
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मुझे शालेय गतिविधियों को संचालित करने में सभी ग्रामवासियों का पूरा सहयोग मिलता हैं। आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारीयां अच्छे से निभा रही हैं। महिलाएं ट्रेन ड्राइवर से लेकर, वैज्ञानिक, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति पद तक की जिम्मेदारीयों का निर्वहन कर चुकी हैं। मैं महिलाओं को इतना ही कहना चाहूंगी कि, कोई भी क्षेत्र कठीण नहीं हैं, बस कार्य करने का जज्बा होना चाहिए। यदि महिलाएं पाश्चात्य संस्कृति को त्यागकर, भारतीय सनातन संस्कृति की मर्यादाओं में रहें तो, समय आने पर वह झांसी की रानी हैं, संत मीराबाई हैं, छत्रपति शिवाजी महाराज को बनाने वाली जीजा माता हैं।

ममता गोपाल वंजारी, प्रिंसिपल, शास. हाईस्कूल रझाड़ी पिपला

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