बाजार में नोटबंदी से पहले जितनी नकदी वापस आई, जानें फायदे-नुकसान

Advertisements

NEWS IN HINDI

बाजार में नोटबंदी से पहले जितनी नकदी वापस आई, जानें फायदे-नुकसान

99.17 फीसदी के साथ कैश की उपलब्‍धता के मामले में हम नोटबंदी से पहले की स्थिति में आ गए हैं. 4 नवंबर, 2016 की स्थिति में आने में लगभग 15 महीने लगे हैं. 9 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के लगभग 8 लाख करोड़ रुपए मूल्‍य के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था.

17.82 लाख करोड़ रुपए हैं सर्कुलेशन में इस समय
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 23 फरवरी, 2018 की तारीख में सर्कुलेशन में कुल करेंसी 17.82 लाख करोड़ रुपए है, जबकि 4 नवंबर, 2016 को यह 17.97 लाख करोड़ रुपए था. इस तरह वर्तमान कैश 4 नवंबर, 2016 की तुलना में 99.17 फीसदी है. जबकि नोटबंदी के बाद सर्कुलेशन में कैश की उपलब्‍धता लगभग आधी हो गई थी.

कम हो रहा है डिजिटल ट्रांजैक्‍शनहालिया ट्रेंड बताते हैं कि नोटबंदी के बाद बाध्‍य होकर बड़ी संख्‍या में लोगों ने डिजिटल पेमेंट की तरफ रुख तो किया था, लेकिन जैसे-जैसे सर्कुलेशन में कैश बढ़ा, वैसे-वैसे डिजिटल ट्रांजैक्‍शंस कम होने लगे.

सर्कुलेशन में कैश बढ़ने के ये हैं कारण
सर्कुलेशन में कैश बढ़ने और डिजिटल ट्रांजैक्‍शन कम होने के कई कारण हैं. टेक्‍नोलॉजी की कम जानकारी और पर्याप्‍त इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की कमी के साथ एक्‍सपर्ट की मानें तो देश में चुनावों के कारण भी कैश के यूज में बड़ी तेजी आती है. चूंकि भारत में चुनावी सीजन बना रहता है, ऐसे में इकोनॉमिक स्‍लोडाउन की स्थिति में भी कैश का यूज कम नहीं हो पाता है. खासकर लोकसभा या कई राज्‍यों में एक साथ विधानसभा चुनावों की स्थिति में इसमें जोरदार तेजी आती है.

आर्थिक विकास भी है एक वजह
कुछ इकोनॉमिस्‍ट कैश के बढ़ते यूज को इकोनॉमिक एक्टिविटी में उभार के रूप में भी देखते हैं. तीसरी तिमाही में 7.2 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ रेट से इस थ्‍योरी को एक तरह से मजबूती मिली है. ब्‍लैकमनी मामलों के एक्‍सपर्ट प्रोफेसर अरुण कुमार ने भी न्‍यूज18 हिंदी से बातचीत में इस थ्‍योरी की तस्‍दीक की. हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि अगर करेंसी इन सर्कुलेशन 15 महीने पहले के स्‍तर पर है तो इसका मतलब यह है कि 15 महीनों में वास्‍तविक अर्थों में इकोनॉमिक ग्रोथ हुई ही नहीं.

कुमार के अनुसार,
1950 से लेकर अभी तक करेंसी इन सर्कुलेशन जीडीपी ग्रोथ रेट के लगभग बराबर है. इसे देखते हुए इस समय करेंसी इन सर्कुलेशन लगभग 22 लाख करोड़ रुपए होने चाहिए थे. इस मामले में सरकार की दलील है कि डिजिटलीकरण के कारण कैश का यूज कम हुआ है, लेकिन जिस तरह डिजिटल ट्रांजैक्‍शंस कम हो रहे हैं और कैश की उपलब्‍धता बढ़ रही है, उससे इस दावे की भी पोल खुल जाती है.

खराब हुई क्रेडिबिलिटी ऑफ करेंसी
कुमार के अनुसार, नोटबंदी के बाद भले ही कैश की उपलब्‍धता पहले वाली स्थिति में आ गई हो, लेकिन क्रेडिबिलिटी ऑफ करेंसी यानी हमारी करेंसी की विश्‍वसनीयता कम हुई है. इससे लोग रुपए के बदले गोल्‍ड और फॉरेन करेंसी होल्‍ड करने लगे हैं, जिससे बैलेंस ऑफ पेमेंट की स्थिति लगातार खराब हो रही है. जिस तरह सरकार द्वारा 2000 रुपए के नोट को वापस लेने की चर्चा चल रही है और लोग इसे रखने से भी हिचकने लगे हैं, इससे भी हमारी करेंसी की विश्‍वसनीयता कम हुई है. जबकि जीडीपी के विस्‍तार के कारण बड़े करेंसी नोट की जरूरत बढ़ती है. इसे देखते हुए ही पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने सरकार से 2000, 5000 और 10,000 रुपए के करेंसी नोट चलन में लाने की सिफारिश की थी. ऐसे में 2000 रुपए के नोट वापस लेने की गुंजाइश नहीं दिखती, फिर भी इसे लेकर खौफ बना हुआ है.

 

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए लिंक पर क्लिक करके https://www.facebook.com/samacharokiduniya/ पेज को लाइक करें या वेब साईट पर FOLLOW बटन दबाकर ईमेल लिखकर ओके दबाये। वीडियो न्यूज़ देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करे। Youtube

 

NEWS IN ENGLISH

The amount of cash that came back before the ban on the market, the advantages and disadvantages

In case of availability of cash with 99.17%, we have come to the position before the ban on bondage. It took about 15 months to arrive in the position of November 4, 2016. On November 9, Prime Minister Narendra Modi had carried out notes worth rupees 500 and 1000 rupees worth rupees 8 lakh crores out of circulation.

17.82 lakh crores is currently in circulation
According to the latest data from the Reserve Bank of India, the total turnover in circulation at the date of February 23, 2018 is Rs 17.82 lakh crore, while on November 4, 2016, it was Rs 17.97 lakh crore. In this way, the current cache is 99.17% compared to November 4, 2016. While the availability of cash in circulation was almost half after the ban on bondage.

Digital TransactionHallia Trend indicates that due to the ban on bondage, a large number of people had turned towards digital payments, but as the cash increased in the circulation, digital transactions were getting reduced.

Causes to increase cash in circulation
There are several reasons for the increase in cash in circulation and decreasing digital transactions. Experts agree with the low knowledge of technology and the lack of adequate infrastructure, due to the elections in the country, there is a lot of speed in cash usage. Since the election season remains in India, in the event of the economic slowdown, the use of cash can not be reduced. Especially in the Lok Sabha or in many states, in the event of assembly elections, there is a lot of increase in it.

Economic development is also a reason
Some economists also see the growing use of cash as an emergence in economic activity. In the third quarter, this theory has strengthened in a way with a GDP growth rate of 7.2 percent. Expert Professor of Blackmoney Affairs Arun Kumar also tweeted this theory in News 18 Hindi. Although he also said that if the currency is in circulation 15 months ago then this means that in 15 months, there was no economic growth in the real sense.

According to Kumar,
Since 1950, the currency in circulation is almost equivalent to the GDP growth rate. In view of this, the currency circulation should have been around Rs 22 lakh crore at this time. In this case, the government has argued that due to digitization, the use of cash has decreased, but the way the digital transactions are decreasing and the availability of cash is increasing, the pole of this claim also opens.

Bad credit limit of currency
According to Kumar, even after the ban, even though availability of cash has come in the first place, credibility of the currency, that is, the credibility of our currency has decreased. With this, people are starting to hold gold and foreign currency in exchange for Rupee, so that the balance of payment is constantly getting worse. The way the government is discussing the withdrawal of Rs 2,000 notes and people are hesitant to keep it, this also reduces the credibility of our currency. While the need for large currency notes increases due to the expansion of GDP. In view of this, former RBI governor Raghuram Rajan had recommended the currency notes of 2000, 5000 and 10,000 rupees from the government. In such a situation, there is no scope for withdrawing notes of Rs 2,000, even then it is feared about it.

 

To get the latest updates, click on the link: https://www.facebook.com/samacharokiduniya/Like the page or press the FOLLOW button on the web site and press the OK Subscribe to our YouTube channel to see the video news. Youtube

Advertisements
Advertisements

 

Advertisements
Advertisements

Related posts

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.