भोपाल:आम बजट : केन-बेतवा लिंक का काम इसी साल शुरू होने की आशा

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भोपाल:आम बजट : केन-बेतवा लिंक का काम इसी साल शुरू होने की आशा

भोपाल। नदियों पर बनी सिंचाई परियोजनाओं या निर्माणाधीन परियोजना व उनसे किसानों के खेत तक पहुंचने वाली नहरों आदि में मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद साल-दर-साल कम होती जा रही है। विभिन्न् नदियों पर बनी वृहद और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार के त्वरित लाभ सिंचाई कार्यक्रम (एआईबीपी) में मप्र को पांच साल पहले जहां 288 करोड़ रुपए मिलते थे, वर्तमान में यह राशि घटकर 40 करोड़ रुपए पर सिमट गई है।

इसी तरह कमांड क्षेत्र विकास कार्यक्रम (सीएडीए) में केंद्र की मदद से किसानों के खेत तक नालियां बनाए जाने में मिलने वाली मदद भी पांच साल पहले के मुकाबले (290 करोड़ रुपए) 2015-16 में 88 करोड़ रुपए पर सिमट गई। मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी केनबेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश सरकार की आम बजट से कई अपेक्षाएं हैं। इसे प्रदेश सरकार राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने का प्रयास कर रही है। इससे केंद्र और राज्य के बीच व्यय में भार का अनुपात 90:10 रह जाएगा। जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया का कहना है कि प्रदेश सरकार की यह भी कोशिश है कि केंद्रीय बजट में केन-बेतवा लिंक परियोजना को वित्त वर्ष 2018-19 में ही शामिल कर लिया जाए और इसका काम भी चालू हो जाए। यही नहीं, राज्य शासन इसके द्वितीय चरण को भी पहले चरण के साथ ही चालू कराने की कोशिश में लगा है। द्वितीय चरण में शिवपुरी-दतिया लोअर परियोजना, बीना परियोजना व कोटा बैराज परियोजना से प्रदेश के शिवपुरी, दतिया, सागर-बीना व विदिशा का करीब 2 लाख हैक्टेयर कृषि क्षेत्र सिंचित हो जाएगा।

कम होती सहायता
आईबीपी योजना में प्रदेश की 10 सिंचाई परियोजनाएं सिंध, माही, बरियारपुर, बाणसागर, महान, पेंच, सिंहपुर बैराज, संजय सागर व महुआ को केंद्र सरकार से मदद मिलती है। इनके लिए केंद्र ने 2012-13 में 288 करोड़, 2013-14 में 102 करोड़, 2014-15 में शून्य, 2015-16 में 60 करोड़ और 2017-18 में करीब 40 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई थी। इस कारण योजनाओं में राज्य सरकार को दूसरे विकास के कामों में से राशि काटकर अपने बजट से इन पर खर्च करना पड़ा।

 

NEWS IN ENGLISH

Bhopal: General Budget: The Ken-Betwa link is expected to begin this year.

Bhopal. The help received from the central government in Madhya Pradesh, which is getting irrigation projects built on rivers or under construction projects and canals reaching farmers’ farm, is going down year after year. In the Central Government’s Quick Benefit Irrigation Program (AIBP) for large and medium irrigation projects built on different rivers, MPs got Rs 288 crores five years ago, this amount has now been reduced to Rs 40 crores.

Likewise, the help received in the construction of drains till farmers’ farm with the help of Center in the Command Area Development Program (CADA) was reduced to Rs 88 crores in 2015-16 (Rs. 290 crores) compared to five years ago. Madhya Pradesh’s ambitious Kenbetwa link project has many expectations from the Madhya Pradesh government’s general budget. It is trying to declare the state government a national project. With this, the proportion of the burden in the expenditure between the center and the state will be 90:10 Radheyamam Julianiya, Additional Chief Secretary, Water Resources Department, says that the state government has also tried to include the Ken-Betwa link project in the central budget only in the financial year 2018-19 and its work will also be started. Not only this, the state government has also tried to start its second phase with the first phase. In the second phase, Shivpuri-Datia Lower Project, Bina Project and Kota Barrage Project will be irrigated by about 2 lakh hectares of agriculture sector of Shivpuri, Datia, Sagar-Bina and Vidisha in the second phase.

Lowered help
In the IBP scheme, ten irrigation projects of Sindh, Mahi, Bariarpur, Bansagar, Mahan, Pench, Sinhpur Barrage, Sanjay Sagar and Mahua get help from the Central Government. For them, the Center had provided 288 crores in 2012-13, 102 crores in 2013-14, zero in 2014-15, 60 crores in 2015-16 and Rs. 40 crores in 2017-18. For this reason, in the schemes, the state government had to spend the amount of work from other development works and spend it on its own budget.

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