नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों में हुए फेरबदल की जांच सुप्रीम कोर्ट करेगा

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 नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों में हुए फेरबदल की जांच सुप्रीम कोर्ट करेगा

नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर) संशोधित रूल्ज 2017 के नियमों में हुए फेरबदल की जांच सुप्रीम कोर्ट करेगा। एनजीटी बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर 29 जनवरी को सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की बेंच ने बार एसोसिएशन की आपत्तियों पर विचार करने के लिए सहमति दे दी है। एनजीटी बार एसोसिएशन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर) संशोधित रूल्ज 2017 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पहले के नियम के अनुसार एनजीटी की बेंच में कम से कम दो न्यायिक अधिकारियों का होना अनिवार्य था, लेकिन संशोधित नियमों के तहत एक सदस्यीय बेंच भी मामलों की सुनवाई कर सकती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी बार की तरफ से पेश हुए। उनका तर्क था कि संशोधित नियमों को खारिज किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि एनजीटी के पूर्व प्रमुख स्वतंत्र कुमार के सेवानिवृत होने के बाद जस्टिस यूडी साल्वी ट्रिब्यूनल का कामकाज देख रहे हैं, लेकिन कई पद खाली होने की वजह से एनजीटी की कार्यवाही पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्र ने हाल ही में फाइनेंस एक्ट 2017 के विरोध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा था कि सरकार व अन्य सभी संबंधित पक्ष एक साथ बैठकर रिक्त पदों को भरने का मसौदा तैयार करें। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा था कि फाइनेंस एक्ट 2017 को लेकर जो आपत्तियां हैं, उन पर बाद में भी विचार किया जा सकता है। पहले रिक्त पदों को भरना जरूरी है।

 

NEWS IN English

The Supreme Court will investigate the changes in NGT rules

new Delhi. The National Green Tribunal (Practice and Procedure) will revise the rules of revised Rules 2017 by the Supreme Court. The petition filed by the NGT Bar Association will be held on January 29. The bench of Chief Justice Deepak Mishra has agreed to consider the Bar Association objections. The NGT Bar Association has challenged the National Green Tribunal (Practice and Procedure) modified Rules 2017 in the Supreme Court. According to earlier rules, it was compulsory for at least two judicial officers to be in the NGT benches, but one member bench may also hear cases under revised rules.

Senior advocate Mukul Rohatgi appeared on behalf of the bar. They argued that the revised rules should be dismissed. It is worth mentioning that after the retirement of former NGT chief Swat Kumar, Justice UD is watching the work of the Salvi Tribunal, but due to the vacancy of many posts, the action of NGT has had adverse effects.

Although Chief Justice of the Supreme Court Deepak Mishra had recently heard the petitions filed against the Finance Act, 2017, he had said that the government and all other concerned parties should sit together and prepare a draft for the vacant posts. The Chief Justice also said that the objections to the Finance Act 2017 can be considered later on. It is important to fill the vacancies first.

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