त्रिपुरा BJP में 90% कांग्रेस-TMC कार्यकर्ता, पोर्क खाकर जीता दिल: देवधर

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त्रिपुरा BJP में 90% कांग्रेस-TMC कार्यकर्ता, पोर्क खाकर जीता दिल: देवधर

नई दिल्ली। त्रिपुरा में 25 साल पुरानी वाम सत्ता को उखाड़ फेंकने वाले बीजेपी के राज्य प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि राज्य में संगठन खड़ा करने के लिए उन्होंने खुद पर बहुत काम किया. यहां तक कि अपनी फूड हैबिट में भी बदलाव किया. त्रिपुरा आकर पोर्क खाना शुरू किया. उन्होंने बताया, बीजेपी ने यह करिश्मा कांग्रेस के हथियार से ही किया जिसे कभी खुद कांग्रेस नहीं कर पाई. राज्य का मौजूदा बीजेपी संगठन 90% कांग्रेस और तृणमूल कार्यकर्ताओं से ही बन पाया.

उन्होंने इस बात को पूरी तरह से खारिज किया कि बीजेपी ने सत्ता के लिए त्रिपुरा में विचारधारा से समझौता कर गठबंधन किया.सुनील देवधर ने तमाम ऐसे मुद्दों पर बात की जो अब तक सामने नहीं आ पाए थे. उन्होंने बीजेपी की जीत का सक्सेस फॉर्मूला भी बताया. आइए पढ़ते हैं विस्तृत बातचीत के संपादित अंश, जानते हैं सुनील का त्रिपुरा सक्सेस फॉर्मूला, उन्होंने ऐसा क्या किया जो 25 साल तक कांग्रेस नहीं कर पाई…क्या त्रिपुरा में बीजेपी की ऐसी जीत का भरोसा था?

देवधर: त्रिपुरा में ऐसी जीत का मुझे बिलकुल भरोसा नहीं था. जब अमित भाई ने मुझे घर बुलाकर दायित्व सौंपा तो मैंने उनसे सवाल भी किया. मैं कैसे कर पाऊंगा? उन्होंने कहा, मुझे आप पर पूरा भरोसा है. पार्टी के निर्देश के बाद मैं त्रिपुरा पहुंचा. 6 महीने रहा तो मैंने महसूस किया कि लोगों में डर है और लोग बदलाव भी चाहते हैं. कई सालों से राज्य में वाम सत्ता काबिज थी. उसके खिलाफ कांग्रेस (विपक्ष) ने जमीन पर कुछ नहीं किया था.

राज्य में संगठन खड़ा करने के लिए किस तरह शुरुआत की?

देवधर: त्रिपुरा में पार्टी के अभियान को बढ़ाने के लिए मैंने जो पहला काम शुरू किया वह था जनजातियों का मफलर यानी गमछा पहनना. हमने इस तरह की बहुत सी छोटी-छोटी चीजें की. ऐसी चीजें काफी मदद करती हैं.

पार्टी को मजबूत बनाने के लिए खुद पर किस तरह काम किया?

देवधर: मेरे दिमाग में कभी हार या जीत नहीं थी. यहां लोग मुझे अपना समझें, ये मेरा मुख्य मकसद था. मैंने अपनी फूड हैबिट तक बदल दी. हालांकि मैं नॉनवेज पहले से खाता था पर मैंने पोर्क खाना त्रिपुरा में ही शुरू किया (यहां के समाज में पोर्क खाया जाता है). महाराष्ट्र से आकर यहां ये सबकुछ करना आसान नहीं था.

क्या पोर्क खाना चुनावी रणनीति का हिस्सा था?

देवधर: ऐसा नहीं है. ये चुनाव जीतने के लिए नहीं था. मुझे कभी हार या जीत की फिक्र नहीं थी. मैंने संगठन खड़ा करने के लिए ऐसा किया. मैं संघ में प्रचारक रहा हूं. हमें सिखाया गया है कि ‘यस्मिन देशे यदाचार…’ यानी जहां आप जाएंगे वहां के रीति-रिवाज में घुलमिल कर रहेंगे तो आत्मीयता हो जाती है. आत्मीयता बढ़ती है.

खुद पर और किस तरह काम करना पड़ा, ऐसी कोई बात जो बताना चाहें?

देवधर: मैं यहां आने से पहले थोड़ी बहुत बंगाली जानता था, लेकिन यहां आने के बाद मैंने उस पर अच्छे से काम करना शुरू किया. बंगाली सीखने के लिए मैंने ट्यूटर रखा. रोज मेहनत की. बंगाली गाने सुनता था. जनजातीय भाषा सीखने के लिए भी अलग ट्यूटर रखा, हालांकि यह अनियमित था. ट्रांसलेटर भी रखा. जो देवनागरी स्क्रिप्ट में जनजातीय भाषा में स्पीच ट्रांसलेट करके देता था. लोगों से जुड़ने में इन चीजों ने काफी मदद की.

जिस वक्त आपने अभियान की शुरुआत की देश में बीफ पर बहस हो रही थी, क्या खान-पान को लेकर त्रिपुरा में इस तरह के सवाल से सामना हुआ?

देवधर: बीफ को लेकर देश में जारी डिबेट का त्रिपुरा में कोई असर नहीं दिखा. हम बस बांग्लादेश से पशुओं की अवैध तस्करी की खिलाफत कर रहे थे. त्रिपुरा में 90 प्रतिशत हिंदू हैं और वो बीफ नहीं खाते. सीपीएम ने मुस्लिमों में जरूर दुष्प्रचार किया. लेकिन मजेदार बात यह है कि इस राज्य में दूध की भारी कमी थी. यहां पाउडर का दूध इस्तेमाल होता है. जो काफी नुकसानदेह है. हिंदू, मुसलमान, ईसाई, कम्युनिस्ट- सबके बच्चों को दूध चाहिए. त्रिपुरा में दूध के लिए गो संवर्धन करने का फैसला राज्य की वाम सरकार का निर्णय है.

जीत के बाद आरोप लग रहे हैं कि बीजेपी ने सत्ता के लिए विचारधारा से समझौता कर लिया माणिक सरकार ने नहीं किया. एक तरह से लोग इसे बीजेपी की हार भी बता रहे हैं?

देवधर: किसी संगठन का अलग राज्य की मांग करना कोई देश विरोध नहीं है. हमने जिनके साथ गठबंधन किया उन्होंने अलग राज्य की मांग की है. उनके आतंकी होने या ऐसे संगठनों से संबंध का कोई आधार नहीं हैं. यह सिर्फ आरोप भर हैं. हमने उनको मनाया. हमने समझाया कि अलग राज्य की मांग बाजू रखकर हमारे साथ आइए. आदिवासियों का उत्थान करें. इन लोगों (विपक्ष) को आतंकवाद पर बोलने का अधिकार नहीं. हमारी दृष्टि में अलग राज्य की मांग अनप्रैक्टिकल है पर कॉन्सटिट्यूशनल बिल्कुल नहीं. हमने वहां के सामाज में अलगाव को कम करने का प्रयास किया, सीपीएम ने तो इसे बढ़ाना चाहा. यह प्रचारित किया कि बीजेपी ईसाइयों के खिलाफ है. लेकिन हमें यहां उनका भी वोट मिला. ईसाई बीजेपी के खिलाफ नहीं हैं.

त्रिपुरा में बीजेपी की जीत को देश के दूसरे हिस्सों में किस तरह देखते हैं?

देवधर: नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी का ब्रेक करना बहुत बड़ी बात है. देशभर में बहुत पॉजिटिव मैसेज जाएगा. त्रिपुरा में वाम पर जीत का जश्न केरल और पश्चिम बंगाल में भी मनाया गया है. इसके दूरगामी असर होंगे.

 

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NEWS IN ENGLISH

Tripura BJP 90% Congress-TMC activist, Pork khakar wins heart: Deodhar

new Delhi. BJP’s state in-charge Sunil Deodhar, who has overthrown the 25-year-old Left in Tripura, said that he had done a lot of work to create an organization in the state. Even changed their food habit. Tripura came and started eating pork. He said, BJP did this charisma only with Congress’s weapon, which Congress itself could never do. The existing BJP organization of the state can get 90% of Congress and Trinamool workers.

He completely rejected the fact that BJP formed a coalition with power for the sake of power in Tripura. Sunil Deodhar spoke on all such issues which had not been able to appear till now. He also told the BJP’s victory formula formula. Let’s read the edited excerpts of the detailed dialogue, know that Sunil’s Tripura Success Formula, what did he do that Congress could not do for 25 years … Was the BJP’s confidence in such victory in Tripura?

Deodhar: I did not believe in such a win in Tripura. When Amit Bhai invited me to the house and gave him the responsibility, I also questioned him. How can i do He said, I have full confidence in you. After the party’s instructions, I reached Tripura. Staying 6 months I felt that people are scared and people want change too. For many years the Left was in power in the state. The Congress (opposition) did nothing on the ground against him.

How did you start the organization in the state?

Deodhar: The first work I started to increase the party’s campaign in Tripura was to wear tribesman’s muffler. We have done many small things like this Such things help a lot.

How did it work to strengthen the party?

Deodhar: There was no defeat or victory in my mind. Here people think of me, this was my main motive. I changed my food habit. Although I used to eat non-veg but I started pork food in Tripura (pork is eaten in the society here). It was not easy to come here from Maharashtra and do all this.

Was pork food a part of the election strategy?

Deodhar: It is not so. This election was not to win. I was never worried about losing or winning. I did this to create an organization. I am a pracharak in the union. We have been taught that ‘Yasmeen Desh Kadaracha …’ means that wherever you go, you will be absorbed in the customs of the place, then there is intimacy. Intimacy increases.

And how did you work on yourself, what would you like to say?

Deodhar: I knew Bengali a little before coming here, but after coming here I started working on it well. I learned tutor for learning Bengali. Work hard every day. Used to listen to Bengali songs. To learn tribal language also kept a separate tutor, though it was irregular. Translator also kept. Which used to translate speech in tribal language in Devanagari script. These things helped a lot in connecting with the people.

At the time when you started the campaign, there was a debate on beef in the country, did you face this kind of question in Tripura regarding food?

Deodhar: The issue of debate in the country regarding Beef has no effect in Tripura. We were just protesting against illegal trafficking of animals from Bangladesh. Tripura has 90 percent Hindus and they do not eat beef. The CPM has certainly preached against Muslims. But the funny thing is that there was a great lack of milk in this state. Powder milk is used here. Which is quite harmful. Hindus, Muslims, Christians, Communists- Children of all need milk. In Tripura, the decision to promote the goat for milk is the decision of the state government.

After the victory, there are allegations that the BJP has not compromised with the ideology of ideology for the government. In a way, people are telling it the BJP’s defeat?

Deodar: There is no country opposition to demand a separate state of an organization. The people we combine with have demanded a separate state. There is no basis for their terror or relation with such organizations. It’s just full of charges. We celebrated them. We explained that with the demand for separate state, come with us. Raise tribals. These people (the opposition) have no right to speak on terrorism. In our view, demand for a separate state is unpractal but not at all constitutational. We tried to reduce the isolation in the society there, the CPM then wanted to increase it. It has propagated that BJP is against Christians. But we got their vote here too. Christians are not against BJP.

How do you see the victory of BJP in Tripura in other parts of the country?

Deodhar: Breaking BJP in North-East is a big deal. There will be very positive message across the country. Celebrations on the left in Tripura are celebrated in Kerala and West Bengal also. It will have far-reaching effects.

 

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