भाजपा के पक्ष में त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के रूझान, कांग्रेस पर संकट के बादल

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भाजपा के पक्ष में त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के रूझान, कांग्रेस पर संकट के बादल

नई दिल्‍ली। देश में ‘मोदी लहर’ बरकरार है…! त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय विधानसभा चुनावों के रुझान तो इस ओर ही संकेत कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी दावा कर रही है कि तीनों पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में सरकार बनाएगी। रूझानों में साफ नजर आ रहा है कि त्रिपुरा में लेफ्ट का किला ढहने जा रहा है। माणिक सरकार अब ‘सरकार’ से बाहर जाते नजर आ रहे हैं। इधर नगालैंड और मेघालय में भी सरकार बनाने के समीकरण भाजपा के पक्ष में ही नजर आ रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने तो जश्‍न मनाना भी शुरू कर दिया है। ऐसे में कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती नजर आ रही है। भाजपा का कांग्रेस मुक्‍त भारत का सपना धीरे-धीरे हकीकत में तबदील होता नजर आ रहा है।

त्रिपुरा रंग लाई भाजपा की कड़ी मेहनत
त्रिपुरा में लगभग 35 साल में पहली बार भाजपा को में इतनी बड़ी कामयाबी मिली है। 25 साल से लगातार सत्ता में रहा लेफ्ट यहां कमजोर हुआ है। इसके लिए भाजपा ने पिछले काफी समय से कड़ी मेहनत की है। दर्जनों मंत्रियों ने त्रिपुरा में चुनाव प्रचार किया। लेफ्ट की विचारधारा को धराशायी करने में भाजपा को समय तो लगा, लेकिन वो कामयाब होती नजर आ रही है। रुझानों में भाजपा गठबंधन 40 से ज्‍यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। दरअसल, त्रिपुरा में इस बार की सियासी लड़ाई पूरी तरह माकपा और भाजपा के बीच है। कांग्रेस फ्रेम में कहीं भी नजर नहीं आ रही थी। हालांकि त्रिपुरा में भी कांग्रेस के सामने अस्तित्व बचाने की लड़ाई है। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दस सीटों और 36 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर थी। लेकिन कई बार विभाजन के बाद पार्टी का सियासी भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। कांग्रेस से जीते 7 विधायक भाजपा में शामिल होकर इस बार कमल के फूल को खिलाने में जुटे हैं। भाजपा ने 2013 चुनावों के 2 फीसद वोट शेयर को बढ़ाकर 2014 में 6 फीसदी कर लिया था। त्रिपुरा भले ही छोटा राज्य है लेकिन भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। त्रिपुरा की जीत न सिर्फ चुनावी जीत होगी बल्कि यह वैचारिक जीत भी साबित होगी।

नगालैंड में भाजपा को रोकने में नाकाम कांग्रेस
नगालैंड विधानसभा के रुझानों में भाजपा और एनपीएफ के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। हालांकि, भाजपा ने अपनी बढ़त बना रखी है और रुझानों में बहुमत के करीब दिखाई दे रही है। राज्य में अब तक आए 59 सीटों के रुझान में भाजपा 29 सीटों पर आगे है वहीं एनपीएफ 26 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस यहां महज 1 सीट पर आगे चल रही है। अन्य के खाते में 3 सीट जाते दिखाई दे रही है। नागालैंड में 15 साल पहले तक कांग्रेस सत्ता में थी। लेकिन 2003 के बाद से लगातार कांग्रेस के प्रदर्शन में गिरावट आई है। 2018 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को राज्य की सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार तक नहीं मिले। कांग्रेस राज्य की 23 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए लेकिन 19 उम्मीदवार ही अपनी किस्मत आजमां रहे हैं। कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों को समर्थन का ऐलान किया है। नागालैंड में भाजपा ने एनडीपीपी से के साथ गठबंधन किया है। 60 सीटों में से एनडीपीपी 40 और 20 सीटों पर भाजपा ने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने भाजपा को रोकने के लिए एनपीएफ को समर्थन दिया है। लेकिन भाजपा को यहां भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है या ये कहें कि मोदी लहर के आगे कांग्रेस टिक नहीं पा रही है।

मेघालय में भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ में लगाई सेंध
पूर्वोत्तर में कांग्रेस की आखिरी उम्मीद मेघालय से है, लेकिन यहां भी भाजपा उसके सामने कड़ी चुनौती पेश कर रहा है। रुझानों को देखते हुए अगर मेघालय में भी भाजपा सरकार बना ले तो कोई हैरानी नहीं होगी। शुरुआती रुझानों में कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। मेघालय में सभी 59 विधानसभा सीटों पर रुझान आ गया है। 22 सीटों पर कांग्रेस, 7 सीटों पर भाजपा, 17 पर एनपीपी व 14 पर अन्य आगे चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यहां भाजपा और एनपीपी मिलकर सरकार बना सकती है। राज्य में कांग्रेस भले ही सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन एनपीपी और भाजपा के आपस में मिलने से समीकरण बदल सकता है। बता दें कि कांग्रेस को अगर उम्मीदों के मुताबिक, मेघालय से नतीजे नहीं आते हैं, तो पूर्वोत्तर में पार्टी सिर्फ मिजोरम तक सीमित हो जाएगी। मिजोरम में भी इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस की चिंता इस बार किसी भी तरह मेघालय में सरकार को बचाने की है। लेकिन भाजपा यहां भी कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की पूरी कोशिश में है। 2013 में मेघालय विधानसभा चुनावों की 60 सीटों में से कांग्रेस को 29 सीटें मिलीं थीं, जिनमें से पांच विधायकों ने भाजपा का दामन थामकर चुनावी मैदान में हैं।

भाजपा दावा कर रही है कि पूर्वोत्‍तर के तीनों में राज्‍यों में सरकार बनाएगी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, ‘तीनों राज्यों के रुझान नई राजनीतिक दिशा का संकेत देते हैं। इसका राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर होगा। हम सभी तीनों राज्यों में सरकार बनाने को लेकर विश्वस्त हैं।’

गौरतलब है कि पूर्वोत्तर कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ‘मोदी लहर’ के बाद अब कांग्रेस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सियासत ने ऐसी करवट ली कि कांग्रेस के हाथ से असम और मणिपुर निकल गया। त्रिपुरा भी कांग्रेस के हाथ नहीं आ रहा है। नगालैंड में भी भाजपा को रोकने में कांग्रेस नाकाम रही है। अब पार्टी मेघालय में अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए कवायद कर रही है। इसके अलावा नागालैंड में कांग्रेस की सियासी हालत बहुत ही खराब नजर आ रही है।

 

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NEWS IN ENGLISH

Tripura, Nagaland and Meghalaya trends in favor of BJP, clouds of crisis on Congress

new Delhi. ‘Modi wave’ remains in the country …! The trends of Tripura, Nagaland and Meghalaya assembly elections are indicative of this. The Bharatiya Janata Party is claiming that the three will form the government in the North-Eastern states. The trends have made it clear that the fort of left is going to collapse in Tripura. Manik Sarkar is now seen going out of the ‘Government’. Here, the equations for making the government in Nagaland and Meghalaya are seen in the BJP’s favor. BJP workers have also started celebrating. In this case, the Congress faces a big challenge. The BJP’s Congress-free India’s dream has gradually been transformed into reality.

Tripura painted the BJP’s hard work
For the first time in almost 35 years in Tripura, BJP has achieved such a big success. Lieutenant in power for 25 years has been weak here. For this, the BJP has worked hard for a long time. Dozens of ministers campaigned in Tripura. The BJP had time to dump the Left ideology, but it seems to be successful. In the trends, the BJP coalition is keeping an edge over more than 40 seats. Actually, the political battle of this time in Tripura is completely between the CPI (M) and the BJP. The Congress was not seen anywhere in the frame. Even in Tripura, there is a fight to save the existence of the Congress. In the 2013 assembly elections, Congress was in second place with 10 seats and 36 percent votes. But after partition, the political future of the party is in danger. 7 MLAs who have won from Congress are joining the BJP this time to feed the lotus flowers. The BJP had increased the 2 percent vote share of 2013 elections to 6 percent in 2014. Tripura is a small state but it is very important for the BJP. Tripura’s victory will not only be an election victory but also a conceptual victory.

Congress fails to stop BJP in Nagaland
In the trends of Nagaland assembly, the BJP and the NPF are witnessing a tough fight. However, the BJP has kept its edge and is showing closer to the majority in trends. In the trend of 59 seats in the state so far, the BJP is ahead in 29 seats, while the NPF has maintained an edge over 26 seats. Congress is leading in just 1 seat. Others are seen going to the 3 seats in the account. Congress was in power till 15 years in Nagaland. But since 2003, there has been a decline in the performance of the Congress continuously. In the 2018 assembly elections, the party did not get the candidates in all the 60 seats of the state. Congress declared candidates in 23 seats in the state but only 19 candidates have been successful. Congress has declared support to the secular parties to keep the BJP away from power. In Nagaland the BJP has tied up with NDPP. BJP has fielded candidates in NDPP 40 and 20 seats out of 60 seats, whereas Congress has supported the NPF to stop the BJP. But the BJP is facing a tough challenge here or say that the Congress is not able to stay ahead of the Modi wave.

In Meghalaya, BJP lays down Congress’ stronghold
The last hope of the Congress in the North-east is from Meghalaya, but here too the BJP is presenting a tough challenge. Given the trends, if there is a BJP government in Meghalaya, then there will be no surprise. In the early trends, the Congress is getting stiff competition. Trends in all 59 assembly seats in Meghalaya have come up. Congress in 22 seats, BJP on 7 seats, NPP at 17 and others on 14 are walking ahead Sources say that the BJP and NPP can together form the government here. Although the Congress is the biggest party in the state, meeting the NPP and the BJP together can change the equation. Tell the Congress that if the results are not met by the Meghalaya, then the party will be limited to Mizoram in the North-East. In Mizoram, assembly elections are due later this year. Concern of Congress this time is to save the government in any way in Meghalaya. But the BJP is also here in its best efforts to break into the Congress stronghold. Of the 60 seats in Meghalaya assembly elections in 2013, Congress got 29 seats, out of which five MLAs are in the fray for the BJP.

The BJP is claiming that the three will form the government in the states of the Northeast. Union Minister of State for Home Kiren Rijiju said, “The trends of the three states indicate a new political direction. It will also have an impact on national politics. We are confident about forming a government in all three states. “

Significantly, the Northeast has always been considered as a stronghold of the Congress. But after the ‘Modi wave’ at the national level, the clouds of crisis are on the rise now. Politics took such a step that Assam and Manipur got out of the hands of Congress. Tripura is also not coming to the hands of the Congress. In Nagaland, the Congress has failed to stop the BJP. Now the party is exercising to keep its power in Meghalaya. Apart from this, the political condition of Congress in Nagaland is very poor.

 

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