.. तो क्या एमपी में बदला रहा है जनता का मूड

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.. तो क्या एमपी में बदला रहा है जनता का मूड

करीब 15 साल से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा को बुधवार को आए दो विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनावों के परिणामों से झटका लगा है. तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा के हाथों से ये दोनों सीटें निकल गईं.

यहां मुकाबला शिवराज सरकार बनाम कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हो गया था. चुनाव नतीजों से यह संकेत मिल रहा है कि प्रदेश में भाजपा के लिए पहले जैसा अनुकूल माहौल नहीं रहा है. वहीं, चुनाव परिणाम जनता के मूड में बदलाव की ओर भी इशारा कर रहे हैं.

राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिवपुरी के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनाव काफी अहम माने जा रहे थे. सत्ताधारी पार्टी और सरकार ने चुनाव जीतने के अपने प्रयास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी.

वहीं, कांग्रेस की कमान युवा सांसद सिंधिया के हाथ में थी. उन्हें चुनाव प्रचार अभियान में पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया और सहरिया जनजाति में गहरी पैठ रखने वाले मनीष राजपूत का भरपूर साथ मिला.

यह बात सही है कि, यह दोनों विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के कब्जे वाले रहे हैं, साथ ही यह सांसद सिंधिया के संसदीय क्षेत्र के अधीन आते हैं. उसके बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री चौहान और संगठन ने जीत के लिए किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी. लगभग पूरा मंत्रिमंडल और संगठन के पदाधिकारी कई-कई दिन तक यहां डेरा डाले रहे. वहीं सिंधिया के करीबी और सांसद प्रतिनिधि के. पी. यादव को भाजपा में शामिल कराकर सिंधिया को बड़ा झटका दिया था.

मुख्यमंत्री चौहान ने लगभग हर सभा और जनसंपर्क के दौरान दोनों जगहों के मतदाताओं से पांच माह के लिए भाजपा का विधायक मांगा और वादा पूरे न करने पर अगले चुनाव में नकार देने तक की बात कही, मगर जनता का उन्हें साथ नहीं मिला.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस हार को स्वीकारते हुए कहा है कि, यह दोनों क्षेत्र कांग्रेस के थे. यहां आम चुनाव में कांग्रेस बड़े अंतर से जीती थी. उसके बाद भी भाजपा के कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की और मुकाबले को बनाए रखा. भाजपा बहुत कम अंतर से हारी है.

वहीं कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि, भाजपा आगामी चुनाव में 200 पार का नारा दे रही है और दो विधानसभा चुनाव को तो पार कर नहीं पाई है. यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ पनपते आक्रोश की जीत है. इस जीत में सांसद सिंधिया और कार्यकर्ताओं की मेहनत का बड़ा योगदान रहा है. इन चुनाव के नतीजों से शिवराज सरकार की विदाई का क्रम शुरू हो गया है.

राजनीति के जानकारों की मानें तो इन नतीजों से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, मगर कांग्रेस में उत्साह का संचार जरूर होगा. वहीं भाजपा को अपनी कार्यशैली और रणनीति पर विचार करने को मजबूर होना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने दोनों चुनाव जीतने के लिए हर दाव पेंच लगाए. पहले आदिवासियों को प्रतिमाह 1000 रुपये देने का ऐलान किया. उसके बाद जाति के आधार पर तीन मंत्री बनाए गए. यह सारी कोशिशें बेकार नजर आ रही हैं. आगामी चुनाव के लिए शिवराज और उनकी सरकार को मास्टर स्ट्रोक की तलाश रहेगी.

विधानसभा के दो उप-चुनाव की जीत कांग्रेस में नया उत्साह तो भरेगी ही, क्योंकि उसे इस जीत से वह खुराक भी मिल गई है, जिसकी उसे दरकार थी. आम चुनाव कुछ माह बाद हैं, दूसरी ओर कई वर्गों में सरकार के खिलाफ असंतोष पनप रहा है. इन स्थितियों का भाजपा और शिवराज कैसे मुकाबला करेंगे, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है.

 

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NEWS IN ENGLISH

..What is changing in MPs? Public mood

For nearly 15 years, the BJP, which is in power in the state, was shocked by the results of the by-elections of two assembly constituencies that came to power on Wednesday. Despite all the attempts, both of these seats came out from BJP’s hands.

The fight there was between Shivraj Vajjar and the Congress MP Jyotiraditya Scindia. Election results indicate that there is no favorable atmosphere for the BJP in the state. At the same time, election results are also pointing towards changes in public mood.

Prior to the assembly elections in the state this year, the sub-elections of municipal assembly constituencies of Kolaras and Ashoknagar of Shivpuri were considered very important. The ruling party and the government had left no stone unturned in their efforts to win the elections.

At the same time, the Congress command was in the hands of the young MP, Scindia. In the election campaign, he got a lot of support from former Union Minister Kamal Nath, State President Arun Yadav, leader of the Opposition Ajay Singh, state in-charge Deepak Babariya and Manish Rajput, who had a deep penetration in Saharia tribe.

It is true that both of these constituencies are being held by the Congress, as well as the MPs are subject to the parliamentary constituency of Scindia. Despite this, the state’s Chief Minister Chauhan and the organization did not leave any shortcomings to win. Nearly the cabinet and the office-bearers of the organization have been camping for several days. While there, close to Scindia and MP from the MP By inserting P. Yadav in the BJP, he gave a big jolt to Scindia.

Chief Minister Chauhan sought the BJP MLA for five months from the voters of both the places during public meetings and public relations, and did not fulfill the promise till refusing to contest the next election, but the people did not get along with them.

Chief Minister Shivraj Singh Chauhan has acknowledged this defeat and said that both of these areas were of Congress. In the general election, Congress won by big margin. Even then, the BJP workers worked hard and kept the match strong. The BJP is defeated by very little difference.

At the same time, Congress Leader of the Opposition Ajay Singh and State President Arun Yadav say that the BJP is giving 200 different slogans in the forthcoming elections and has not been able to cross the two assembly elections. This election is the victory of anger against the Congress and the BJP. The victory of MP Scindia and the workers in this victory has contributed a lot. The result of these elections has begun the departure of the Shivraj government.

Political analysts believe that these results will not make any difference to the health of the government, but the communication of enthusiasm in the Congress will definitely be necessary. At the same time, the BJP will have to comprehend its style and strategy. This is because the BJP screwed every claim to win both the elections. Earlier, the tribals declared to give 1000 rupees per month. After that, three ministers were formed on the basis of caste. All these efforts are seen to be worthless. Shivraj and his government will be looking for master stroke for the upcoming elections.

The victory of two sub-elections of the Assembly will bring new enthusiasm to the Congress as it has got the dose with this victory, which he deserves. The general elections are a few months later, on the other hand dissatisfaction against the government is flourishing in many sections. This is how the BJP and Shivraj will compete in these situations.

 

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